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गरुड़ पुराण(592)

गरुड़ पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 592 प्रश्न उपलब्ध हैं।

जीवन एवं मृत्यु

नरक में प्रवेश के बाद क्या होता है?

नरक में प्रवेश के बाद दक्षिण द्वार पर प्रथम यातना, नरक के यमदूतों को सौंपना, पापों की याद दिलाना, निरंतर दंड और अंत में पाप-दंड पूर्ण होने पर पुनर्जन्म — यह क्रमबद्ध प्रक्रिया है।

#नरक#प्रवेश#यातना
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस स्थिति में रखा जाता है?

नरक में जीव — जंजीरों में बँधा, पीठ पर लोहे का भार, रक्त वमन करता, निरंतर विलाप करता। मानसिक रूप से भय और पश्चाताप में, आत्मिक रूप से विवश, सामाजिक रूप से पूर्णतः अकेला।

#नरक#स्थिति#जीव
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस प्रकार से दंड दिया जाता है?

नरक में दंड — शस्त्रों से पिटाई, अग्नि में उबालना, तलवार-पत्तों से काटना, पशुओं-राक्षसों द्वारा नोचना, तप्त लोहे पर रखना, गड्ढों में गिराना, और मनोवैज्ञानिक यातना — ये सब प्रकार हैं।

#नरक#दंड प्रकार#यातना
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस क्रम में दंड दिया जाता है?

नरक में दंड का क्रम — प्रवेश पर प्रथम दंड → पाप की गंभीरता के अनुसार एक नरक से दूसरे नरक → महापापों का पहले, लघु पापों का बाद में। 'एक नरक से दूसरे नरक को' — यही क्रम है।

#नरक#दंड क्रम#पाप
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नरक में जीव को कहाँ बांधा जाता है?

नरक में जीव को गले-हाथ-पैरों में जंजीरों से, पाश और अंकुश से, लोहे के खंभों से बाँधकर रखा जाता है। यह बंधन जीवन के पाप-बंधनों का स्थूल प्रतिरूप है।

#नरक#बंधन#जंजीर
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नरक में जीव को कहाँ गिराया जाता है?

नरक में जीव को वैतरणी नदी में, असिपत्रवन में, अवीचि के पर्वत से नीचे, रक्त के गड्ढों में और अंधकूप में गिराया जाता है। यमदूत 'घोर नरक वाले स्थान में गिराते हैं' — यही शास्त्रोक्त वर्णन है।

#नरक#गिराना#कुंड
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नरक में जीव को कहाँ ले जाया जाता है?

नरक में जीव को — यमराज के दरबार में → नरक दर्शन → वापस मृत्युलोक → तेरहवें दिन पुनः → वैतरणी → दक्षिण द्वार → कर्मानुसार नरक में ले जाया जाता है। एक नरक से दूसरे नरक की यात्रा भी होती है।

#नरक#यात्रा#यमदूत
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नरक में जीव को कहाँ रखा जाता है?

नरक पृथ्वी के नीचे पाताल लोक में है। जीव को पाप के अनुसार — रक्त के गड्ढों में, मल-मूत्र के कुंड में, जलते अंगारों में, अंधे कुएँ में, तप्त धातु के पात्रों में रखा जाता है।

#नरक#स्थान#पाताल
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कौन दंडित करता है?

नरक में मुख्यतः यमदूत दंड देते हैं — लोहे की लाठी, मुद्गर, गदा, मूसल से। प्रत्येक नरक में विशेष यमदूत हैं। भयंकर कुत्ते, सर्प, राक्षस भी माध्यम हैं। सर्वोच्च अधिकार यमराज का है।

#नरक#दंड#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कौन निर्देश देता है?

नरक में यमराज की आज्ञा सर्वोच्च निर्देश है। नरक के विशेष यमदूत जीव को यातना देने का कार्य करते हैं और उसके पापों की याद दिलाते हैं। चित्रगुप्त के लेखे पर आधारित यमराज का निर्देश अटल है।

#नरक#यमदूत#निर्देश
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नरक में जीव के शरीर का स्वरूप कैसे बदलता है?

नरक में जीव 'यातना-देह' में रहता है जो पिंडदान से बनती है। यातना से क्षत-विक्षत होती है, रक्त वमन होता है। नष्ट होने पर यमराज की शक्ति से पुनः निर्मित होती है — यह पाप-शुद्धि की प्रक्रिया है।

#नरक#शरीर#यातना देह
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नरक में जीव को कितनी बार पुनर्जीवित किया जाता है?

संजीवन नरक में मारकर बार-बार पुनर्जीवित किया जाता है — निश्चित संख्या नहीं। 'बिना भोगे कर्म समाप्त नहीं होता' — जब तक पापों का दंड पूरा न हो, यह चक्र चलता रहता है।

#नरक#पुनर्जीवित#संजीवन नरक
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नरक में जीव को कितनी बार पीटा जाता है?

गरुड़ पुराण में 'बार-बार' और 'अत्यधिक' पिटाई का वर्णन है। बेहोश होने पर पुनः होश लाकर पीटा जाता है। निश्चित संख्या नहीं — पाप का दंड पूरा होने तक यह चलता रहता है।

#नरक#पीटना#मुद्गर
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नरक में जीव को कितनी बार काटा जाता है?

असिपत्रवन में तलवार-पत्तों से, स्रपदन्त में नाखूनों से, अनेक नरकों में पशुओं-सर्पों से बार-बार काटा जाता है। निश्चित संख्या नहीं — पाप-दंड पूरा होने तक यातना चलती रहती है।

#नरक#काटना#असिपत्रवन
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नरक में जीव को कितनी बार जलाया जाता है?

गरुड़ पुराण में जलाने की निश्चित संख्या नहीं, परंतु यह निरंतर प्रक्रिया है। संजीवन नरक में जलाकर पुनः जीवित करके बार-बार जलाया जाता है। 'प्रलयपर्यंत घोर नरकों में पकते रहते हैं' — यही वर्णन है।

#नरक#जलाना#बार-बार
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नरक में जीव को किस प्रकार के धातु पात्रों में डाला जाता है?

नरक में खौलते लोहे का बर्तन (तप्तकुंभ), तेल से भरी कुंभी (कुंभीपाक), तप्त लोहे का नरक (तप्तलोहमय), गर्म लोहे का बिस्तर और नुकीला लोहे का तीर (महाप्रभ) — ये प्रमुख धातु-पात्र हैं।

#नरक#धातु पात्र#कुंभीपाक
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नरक में जीव को किस प्रकार की अग्नि में डाला जाता है?

नरक में अग्नि के कई रूप हैं — कुंभीपाक में खौलते तेल का कड़ाहा, रौरव में अग्नि-कुंड, तपन में चारों ओर आग, विलेपक में लाख की आग, अंगारोपच्य में अंगारे। हर पाप के लिए अलग प्रकार की अग्नि।

#नरक#अग्नि#कुंभीपाक
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नरक में भेजने की प्रक्रिया क्या है?

नरक में भेजने की प्रक्रिया है — यमराज का निर्णय → यमदूत द्वारा पकड़कर ले जाना → दक्षिण द्वार से प्रवेश → नरक के यमदूतों को सौंपना → पाप के अनुसार यातना शुरू। एक से अधिक नरकों में क्रमशः दंड हो सकता है।

#नरक#भेजने की प्रक्रिया#यमराज
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धर्मराज द्वारा दंड देने का क्रम क्या है?

धर्मराज का दंड-क्रम है — यमलोक पेशी → चित्रगुप्त लेखा → निर्णय → यममार्ग की यातना → वैतरणी → नरक में वास्तविक दंड → पाप-दंड पूरा होने पर पुनर्जन्म।

#धर्मराज#दंड क्रम#नरक
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धर्मराज के आदेश को कौन लागू करता है?

धर्मराज के आदेश को यमदूत लागू करते हैं — यममार्ग पर ले जाना, नरक पहुँचाना, यातना देना। नरक में विशेष यमदूत होते हैं। द्वारपाल 'धर्मध्वज' प्रवेश की व्यवस्था करते हैं। सभी यमराज की आज्ञा के अधीन हैं।

#धर्मराज#यमदूत#आदेश
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धर्मराज के निर्णय का स्वरूप कैसा होता है?

धर्मराज का निर्णय स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म — इन तीनों में से एक होता है। यह निर्णय निष्पक्ष, अटल और तत्काल प्रभावी है। कोई अपील नहीं। चित्रगुप्त के अचूक लेखे के आधार पर कोई भूल नहीं होती।

#धर्मराज#निर्णय#न्याय
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यममार्ग में जीव को किन स्थानों पर कष्ट दिया जाता है?

यममार्ग में गर्म बालू का मैदान, असिपत्रवन, वैतरणी नदी, सिंह-व्याघ्र-कुत्तों का स्थान, सर्प-बिच्छू क्षेत्र और आग से जलाने वाले स्थान — इन सभी जगहों पर पापी जीव को कष्ट मिलता है।

#यममार्ग#कष्ट#स्थान
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यममार्ग में जीव को किन स्थानों पर रोका जाता है?

यममार्ग में जीव को 16 पड़ावों (नगरों) पर, वैतरणी नदी के तट पर और यमलोक के द्वार पर रोका जाता है। प्रत्येक स्थान पर कर्मों का एक भाग देखा जाता है। यह यात्रा 47 दिनों तक चल सकती है।

#यममार्ग#रोकना#16 नगर
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यममार्ग में जीव को किन स्थानों पर विश्राम मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग 'विश्रामरहित' है — पापी को कहीं रुकने नहीं दिया जाता। पुण्यात्मा और पिंडदान प्राप्त जीव को 16 पड़ावों पर कुछ राहत मिलती है। पापी के लिए यह निरंतर कष्टयात्रा है।

#यममार्ग#विश्राम#पुण्यकर्म
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यममार्ग में जीव को जल किस प्रकार मिलता है?

यममार्ग पर स्वच्छ जल का घोर अभाव है। जिसने जीवन में जलदान किया, उसे यहाँ कुछ राहत मिलती है। पापी को कहीं जल नहीं मिलता। वैतरणी का जल रक्त-मवाद से भरा है — वह और यातना देता है।

#यममार्ग#जल#जलदान
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यममार्ग में जीव को भोजन किस रूप में मिलता है?

यममार्ग पर जीव को पिंडदान से भोजन और शक्ति मिलती है। दानी जीवों को अपने जीवन के दान का फल मिलता है। पापी और पिंडदानविहीन जीव को कुछ नहीं मिलता — वह भूखा-प्यासा यातना सहता हुआ चलता है।

#यममार्ग#भोजन#पिंडदान
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यममार्ग में पिंडदान के अभाव में जीव क्या खाता है?

पिंडदान के अभाव में यममार्ग पर जीव को कुछ नहीं मिलता। वैतरणी में भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह रक्त-मांस युक्त नदी का जल पीने पर विवश होता है। इसीलिए पिंडदान अनिवार्य बताया गया है।

#यममार्ग#पिंडदान#भूख
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वैतरणी नदी में दुर्गंध का वर्णन कैसे किया गया है?

वैतरणी नदी रक्त, मांस, मवाद, मल-मूत्र और सड़े-गले पदार्थों से 'दुर्गंधपूर्ण' बताई गई है। केशरूपी सेवार (काई) इसे और दुर्गम बनाती है। यह दुर्गंध पापी जीव के कुकर्मों का प्रतीक है।

#वैतरणी नदी#दुर्गंध#गरुड़ पुराण
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वैतरणी नदी में जल का स्वरूप कैसा बताया गया है?

वैतरणी नदी में सामान्य जल नहीं है। इसमें रक्त, मांस, कीचड़, मल-मूत्र, चर्बी, मज्जा और अस्थि मिले हैं। पापी को देखते ही यह 'खौलते घी की भाँति' उबलने लगती है।

#वैतरणी नदी#जल#रक्त
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वैतरणी नदी में जीव को किन-किन प्रकार के जीव काटते हैं?

वैतरणी में सूई-मुख कीड़े (शरीर में चुभते हैं), वज्र-चोंच गीध और कौए (नोचते हैं), वज्रदन्त घड़ियाल (पकड़कर खींचते हैं), महाविषधर सर्प-बिच्छू (डसते हैं) और मांसभक्षी पक्षी — ये सभी पापी जीव को कष्ट देते हैं।

#वैतरणी नदी#जीव#कीड़े
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नरक में जीव को किन-किन साधनों से यातना दी जाती है?

नरक में लोहे की लाठी-मुद्गर-भाला-गदा-मूसल, गर्म तेल का कड़ाह, जंजीर-पाश, कुत्ते-सर्प-गीध, रक्त-भरे गड्ढे, काँटेदार वृक्ष और चट्टानें — ये सब यातना-साधन हैं। हर पाप के लिए अलग साधन।

#नरक#यातना साधन#अस्त्र-शस्त्र
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नरक में जीव के शरीर की स्थिति कैसी होती है?

नरक में जीव 'यातना-शरीर' में होता है जो पिंडदान से बनता है। यह शरीर जंजीरों में बँधा, पिटा हुआ, जला हुआ, काटा हुआ और रक्त वमन करता हुआ होता है। यह मरता नहीं — बार-बार पुनः उत्पन्न होता है।

#नरक#शरीर#यातना शरीर
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नरक में अंधकार का क्या वर्णन है?

नरक में तामिस्त्र और अंधतामिस्त्र घोर अंधकार के नरक हैं। अंधकूप में ज्ञान-अहंकारियों को डाला जाता है। नरक का अंधकार जीव के ज्ञान-अभाव और अज्ञान का प्रतीक है।

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नरक में आग का क्या वर्णन है?

नरक में कुंभीपाक में गर्म तेल में उबाला जाता है, कालसूत्र में गर्म सलाखों से दंड, तपन और संप्रतापन नरक में चारों ओर आग, जलते अंगारों पर चलाया जाता है। आग पापों के दाहक परिणाम का प्रतीक है।

#नरक#आग#अग्नि
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नरक में जीव को किन जीवों द्वारा कष्ट दिया जाता है?

नरक में कुत्ते (नोचना-काटना), सर्प-बिच्छू (दंश), वज्र-चोंच गीध, राक्षस (खाना), कौए-चील, और सूई-मुख कीड़े जीव को कष्ट देते हैं। प्रत्येक जीव उस पापी के कर्म का प्रतिफल है।

#नरक#जीव#कष्ट
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क्या नरक में जीव को भोजन मिलता है?

नरक में जीव को सात्विक भोजन नहीं मिलता। भूख-प्यास की यातना होती है। रक्त-वमन पीने, मल खाने और जहर पीने पर विवश किया जाता है। जिसने जीवन में अन्नदान नहीं किया उसे यह कष्ट सर्वाधिक होता है।

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नरक में पापी जीव को क्या-क्या यातनाएँ मिलती हैं?

नरक में गर्म तेल में उबाला जाना, गर्म सलाखों से दंड, काँटों पर लटकाना, चट्टानों से कुचलना, कुत्तों द्वारा नोचना, बार-बार मारकर जीवित करना — प्रत्येक पाप के लिए विशेष यातना निर्धारित है।

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नरक में जीव कितने समय तक रहता है?

गरुड़ पुराण में नरक अस्थायी है — पापकर्मों के दंड भोगने तक। साधारण पापों के लिए कम, घोर पापों के लिए हजारों-लाखों वर्षों का दंड। पाप समाप्त होने पर पुनर्जन्म होता है।

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नरक में कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

नरक में गर्म तेल में उबाला जाना, लोहे की सलाखों से दंड, काँटेदार वृक्षों पर लटकाना, कुत्तों-सर्पों का दंश, चट्टानों से कुचलना, जहरीला द्रव पिलाना — प्रत्येक पाप के लिए अलग यातना निर्धारित है।

#नरक#कष्ट#यातना
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नरक किसे मिलता है?

नरक उन्हें मिलता है जिन्होंने जीवन में झूठ, हिंसा, चोरी, व्यभिचार, माता-पिता का अपमान और धर्म-विमुखता जैसे पापकर्म किए। गरुड़ पुराण के अनुसार नरक दंड का साथ ही आत्मा-शुद्धि का साधन भी है।

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धर्मराज कौन हैं?

धर्मराज यमराज का दूसरा नाम है — धर्म और सत्य के राजा। वे भगवान सूर्य के पुत्र हैं, वाहन भैंसा और हाथ में दंड-पाश हैं। वे समस्त प्राणियों के कर्मों का न्याय करते हैं और स्वर्ग-नरक का निर्णय देते हैं।

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चित्रगुप्त कौन हैं?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी के शरीर से उत्पन्न दिव्य पुरुष हैं जो यमराज के सहायक और समस्त जीवों के कर्मों के लेखाकार हैं। 'चित्र' (दृश्य) + 'गुप्त' (छिपा) — वे प्रत्येक गुप्त कर्म को भी देखते हैं।

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यमलोक में प्रवेश से पहले क्या होता है?

यमलोक प्रवेश से पहले वैतरणी नदी पार करनी होती है। फिर चार द्वारों में से कर्मानुसार द्वार मिलता है — पूर्व-पश्चिम-उत्तर पुण्यात्माओं के लिए, दक्षिण द्वार पापियों के लिए। अंदर चित्रगुप्त के सामने कर्मों का लेखा होता है।

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जीव को यमलोक तक पहुँचने में कितना समय लगता है?

मृत्यु के बाद तत्काल यमलोक जाकर वापस आना होता है। असली यात्रा 13वें दिन शुरू होती है जो 17 से 47 दिन या एक वर्ष तक चल सकती है — यह कर्मों पर निर्भर है। पुण्यात्मा शीघ्र पहुँचती है, पापी देर से।

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यममार्ग में पिंडदान का लाभ किसे मिलता है?

पिंडदान से जीवात्मा का यातना-शरीर बनता है, यममार्ग की भूख-प्यास कम होती है और यमलोक तक यात्रा की शक्ति मिलती है। यह लाभ उसे मिलता है जिसके परिजन विधिपूर्वक 10 दिन तक पिंडदान करते हैं।

#पिंडदान#लाभ#यममार्ग
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यममार्ग में पिंडदान का अभाव होने पर क्या होता है?

पिंडदान के अभाव में जीवात्मा कल्पान्त तक प्रेत बनकर निर्जन वन में भटकती है। यममार्ग पर चलने की शक्ति नहीं मिलती, भूख-प्यास से व्याकुल रहती है। इसीलिए मृत्यु के बाद दस दिन तक पिंडदान का विधान है।

#पिंडदान#यममार्ग#प्रेत योनि
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यममार्ग में पापी जीव की स्थिति कैसी होती है?

यममार्ग पर पापी जीव भूखा-प्यासा, जलती बालू पर, कोड़े खाता, कुत्तों से काटा, बेहोश होता-उठता चलता है। मन में पछतावा, विलाप और भय है। पाश में बंधा होने से वापस नहीं लौट सकता। कोई सहायता नहीं मिलती।

#यममार्ग#पापी#स्थिति
जीवन एवं मृत्यु

वैतरणी नदी में कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

वैतरणी में पापी को रक्त-मवाद में डूबना, सूई-मुख कीड़ों का दंश, वज्र-चोंच गीधों का आक्रमण, भंवरों में डूबना-उतराना, घड़ियालों का भय और भूख-प्यास — ये सभी यातनाएँ 34-47 दिन तक सहनी पड़ती हैं।

#वैतरणी नदी#कष्ट#यातना
जीवन एवं मृत्यु

क्या सभी जीव वैतरणी नदी पार कर सकते हैं?

सभी जीव वैतरणी पार कर सकते हैं परंतु कर्मों के अनुसार भिन्न अनुभव से। गौदान-दानी को गाय/नाव की सहायता मिलती है। पापी को नाक में कांटा फंसाकर खींचा जाता है और लंबे समय तक यातना भोगनी पड़ती है।

#वैतरणी नदी#पार करना#कर्म
जीवन एवं मृत्यु

वैतरणी नदी को कौन पार कराता है?

गौदान करने वाले जीव की गाय वैतरणी पर आती है — जीव उसकी पूंछ पकड़कर पार करता है। दान-पुण्य से नाव मिलती है। जिनके पास कोई पुण्य नहीं उन्हें नाक में कांटा फंसाकर यमदूत खींचकर ले जाते हैं।

#वैतरणी नदी#गौदान#नाव
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