नाम महिमा एवं भक्तिअजामिल ने अंतिम क्षण नारायण नाम लेकर कैसे मुक्ति पाईश्रीमद्भागवत के छठे स्कंध में — अजामिल ने मृत्यु के समय पुत्र-बुलाहट में 'नारायण' पुकारा। विष्णुदूतों ने यमदूतों को रोका क्योंकि नारायण नाम — अनजाने में ही — पाप नष्ट करता है। बाद में भक्ति करके वह वैकुण्ठ गया। यह कथा नाम-शक्ति का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।#अजामिल कथा#नारायण नाम#मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।
श्रीमद्भागवतपरीक्षित ने भागवत कथा क्यों सुनी?कारण का पूरा विस्तार आगे की कथा में आता है। शौनकजी पूछते हैं कि शुकदेव और परीक्षित का संवाद कैसे हुआ जिसमें भागवत कही गई।#परीक्षित#भागवत कथा#शुकदेव
श्रीमद्भागवतशुकदेव जी कौन थे?शुकदेवजी व्यासजी के पुत्र, महान योगी, समदर्शी, भेदभावरहित और परमात्मा में स्थित मुनि बताए गए हैं।#शुकदेव#व्यास पुत्र#योगी
श्रीमद्भागवतसूतजी ने भागवत कथा किससे सीखी?सूतजी शुकदेवजी की भागवत कथा के समय वहाँ बैठे थे और उनकी कृपा से उन्होंने इसका अध्ययन किया।#सूतजी#शुकदेव#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतशुकदेव जी ने भागवत किसे सुनाई?शुकदेवजी ने श्रीमद्भागवत राजा परीक्षित को सुनाई, जो गंगातट पर आमरण अनशन का व्रत लेकर बैठे थे।#शुकदेव#राजा परीक्षित#गंगा तट
श्रीमद्भागवतआधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।#आधा क्षण#भागवत कथा#मुक्ति
श्रीमद्भागवतयमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।#यमराज#वैष्णव#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा भवरोग की औषधि क्यों है?कलियुग में भागवत कथा भवरोग की रामबाण औषधि, कृष्णप्रिय, पाप-नाशक, मुक्ति का कारण और भक्ति बढ़ाने वाली कही गई है।#भवरोग#औषधि#मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा दारिद्र्य और दुख में कैसे सहारा देती है?दारिद्र्य-दुख से जलते, माया से दबे और संसार-सागर में डूबते लोगों के कल्याण के लिये भागवत गरजती है।#दारिद्र्य#दुख#माया
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में भगवान कैसे प्रकट होते हैं?शुकदेवजी के वचन के बीच सभा में प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदों सहित श्रीहरि प्रकट हुए।#भगवान प्रकट#भागवत कथा#कीर्तन
श्रीमद्भागवतसंतान सुख के लिए भागवत कथा क्यों सुनते हैं?जिन स्त्रियों को संतान-संबंधी दुख हो, उन्हें प्रयत्नपूर्वक कथा सुनने को कहा गया है; विधिपूर्वक श्रवण से उत्तम फल मिलता है।#संतान सुख#भागवत कथा#स्त्री
श्रीमद्भागवतरोगी लोग भागवत कथा क्यों सुनें?धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष इच्छुक लोगों को कथा सुनने को कहा गया है।#रोगी#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनते समय किनसे बात नहीं करनी चाहिए?नियम से कथा सुनने वाले को रजस्वला, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन, ब्राह्मणद्वेषी और वेदबाह्य लोगों से बातचीत न करने को कहा गया है।#बातचीत#श्रवण नियम#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में निंदा से क्यों बचना चाहिए?कथा सुनने वाले को वेद, वैष्णव, ब्राह्मण, गुरु, गौसेवक, स्त्री, राजा और महापुरुषों की निंदा से बचना चाहिए।#निंदा#भागवत कथा#वाणी संयम
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में क्रोध और लोभ क्यों छोड़ें?कथा सुनने वाले को काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए।#क्रोध#लोभ#मन शुद्धि
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में दोपहर का विराम क्यों होता है?दोपहर में दो घड़ी कथा विराम रखकर उसी प्रसंग के अनुसार वैष्णवों को भगवान के गुणों का कीर्तन करना बताया गया है।#दोपहर विराम#कीर्तन#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा किस समय शुरू करनी चाहिए?कथा सूर्योदय से आरंभ करने और मध्यम स्वर में साढ़े तीन पहर तक सुनाने की बात कही गई है।#कथा समय#सूर्योदय#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा रोज कितनी देर सुननी चाहिए?वक्ता को सूर्योदय से कथा आरंभ कर साढ़े तीन पहर तक मध्यम स्वर में कथा पढ़नी चाहिए, बीच में दो घड़ी विराम है।#कथा समय#श्रवण#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनते समय क्या छोड़ना चाहिए?कथा सुनते समय लोक, धन, घर-पुत्र की चिंता, काम, क्रोध, लोभ, निंदा, अनुचित संग और अशुद्ध आहार छोड़ना चाहिए।#श्रवण नियम#त्याग#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के वक्ता की पूजा क्यों करें?वक्ता को शुकस्वरूप मानकर पूजते हैं और उससे कथा के प्रकाश से अज्ञान नष्ट करने की प्रार्थना करते हैं।#वक्ता पूजा#भागवत कथा#शुक स्वरूप
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में भगवान कृष्ण की पूजा कैसे करें?मंडल में श्रीहरि की स्थापना कर श्रीकृष्ण को लक्ष्य बनाकर मंत्रोच्चार सहित षोडशोपचार पूजा, दक्षिणा और नमस्कार करना बताया गया है।#कृष्ण पूजा#षोडशोपचार#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से पहले पितृ तर्पण क्यों करें?गणेश पूजा के बाद पितरों का तर्पण और पूर्व पापों की शुद्धि के लिये प्रायश्चित्त करने का निर्देश है।#पितृ तर्पण#भागवत कथा#प्रायश्चित्त
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।#श्रोता#दिशा#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में वक्ता किस दिशा में बैठे?वक्ता उत्तरमुख हो तो श्रोता पूर्वमुख बैठें; वक्ता पूर्वमुख हो तो श्रोता उत्तरमुख बैठें, या दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।#वक्ता दिशा#आसन#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में सहायक वक्ता क्यों चाहिए?वक्ता के पास ऐसा विद्वान सहायक रखना चाहिए जो श्रोताओं के संशय दूर कर सके और लोगों को समझाने में कुशल हो।#सहायक वक्ता#संशय#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में कैसे वक्ता से बचना चाहिए?जो अनेक धर्मों के भ्रम में पड़े हों, स्त्री-लोलुप हों या पाखंड का प्रचार करें, ऐसे पंडित भी भागवत वाचन के लिये अयोग्य बताए गए हैं।#वक्ता चयन#पाखंड#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा का वक्ता किसे बनाना चाहिए?भागवत कथा का वक्ता वैष्णव ब्राह्मण, वेद-शास्त्र में पारंगत, दृष्टांत-कुशल, धीर, विवेकी और निःस्पृह होना चाहिए।#वक्ता#भागवत कथा#वैष्णव ब्राह्मण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के वक्ता कैसे होने चाहिए?वक्ता वेद-शास्त्र की व्याख्या में समर्थ, दृष्टांत देने में कुशल, विवेकी, निःस्पृह और वैष्णव ब्राह्मण होना चाहिए।#वक्ता#भागवत कथा#वैष्णव
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनने कौन आ सकता है?कथा सुनने के लिये परिवार सहित सबको बुलाया गया है; धनहीन, रोगी, पापी, संतानहीन और मोक्ष चाहने वाले भी इसे सुनें।#श्रोता#भागवत कथा#सर्वजन
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में किन लोगों को बुलाना चाहिए?कथा में परिवार सहित जनसमुदाय, स्त्रियाँ, शूद्र, हरिकथा से दूर लोग, विरक्त वैष्णव और कीर्तन-प्रेमियों को बुलाने की बात कही गई है।#निमंत्रण#भागवत कथा#वैष्णव
श्रीमद्भागवतभागवत कथा का मंडप कैसे बनाएं?मंडप ऊँचा, केले के खंभों से सुसज्जित, फल-पुष्प-पत्तों और चंदोवे से अलंकृत तथा ध्वजाओं से सजाया हुआ बताया गया है।#मंडप#भागवत कथा#कथा तैयारी
श्रीमद्भागवतभागवत कथा कहाँ करानी चाहिए?भागवत कथा तीर्थ, वन या घर में कराई जा सकती है; मुख्य बात है कि स्थान विस्तृत, शुद्ध और सज्जित हो।#कथा स्थान#भागवत कथा#तीर्थ
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के शुभ महीने कौन से हैं?भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण कथा आरंभ के शुभ महीने बताए गए हैं।#भागवत कथा#शुभ महीने#श्रावण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के नित्य पाठ से क्या मिलता है?इस पवित्र आख्यान के नित्य पाठ से अपुनर्भव, यानी पुनर्जन्म से छूटने का फल बताया गया है।#नित्य पाठ#भागवत कथा#मोक्ष
श्रीमद्भागवतश्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।#श्राद्ध#भागवत कथा#पितृ तृप्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से सबकी मुक्ति कैसे हुई?दूसरी सप्ताह कथा के बाद भगवान प्रकट हुए और गोकर्ण की कृपा से गाँव के सभी जीव विमानों पर चढ़ाकर हरिलोक भेजे गए।#सर्वमुक्ति#भागवत कथा#गोकर्ण
श्रीमद्भागवतश्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।#श्रावण मास#भागवत कथा#सप्ताह
श्रीमद्भागवतभागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।#भगवान कृष्ण#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से वैकुंठ कैसे मिलता है?धुंधुकारी के लिये वैकुंठवासी पार्षद विमान लेकर आए; उन्होंने कहा कि सही श्रवण-मनन से सबको वैकुंठ फल मिल सकता है।#वैकुंठ#भागवत कथा#श्रवण फल
श्रीमद्भागवतजीवन का स्थायी फल कैसे मिले?नश्वर शरीर से स्थायी फल पाने का मार्ग भागवत कथा श्रवण, पाप-क्षय, संशय-नाश और मुक्ति से जोड़ा गया है।#जीवन#स्थायी फल#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा को तीर्थ क्यों कहा गया है?भागवत कथा को तीर्थ कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोती है और हृदय में स्थित होकर मुक्ति देती है।#कथा तीर्थ#भागवत कथा#मुक्ति
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से कर्म कैसे नष्ट होते हैं?सप्ताह श्रवण को पाप जलाने वाली अग्नि और कर्म क्षीण करने वाला साधन कहा गया है।#कर्म#पाप नाश#भागवत कथा
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।#संशय#भागवत कथा#हृदय
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से हृदय की गांठ कैसे खुलती है?कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, संशय कटते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।#हृदय ग्रंथि#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।#श्रद्धा#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।#भागवत कथा#प्रेत मुक्ति#सप्ताह
श्रीमद्भागवतगया श्राद्ध के बाद भी प्रेत बाधा क्यों रहती है?कथा में धुंधुकारी के अपने दोष और असंख्य कुकर्म इतने भारी बताए गए हैं कि गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं हुई।#गया श्राद्ध#प्रेत बाधा#कर्मफल
श्रीमद्भागवतप्रेत आत्मा को शांति कैसे मिले?कथा में प्रेत आत्मा को अंतिम शांति श्रीमद्भागवत सप्ताह के श्रवण और मनन से मिली।#प्रेत आत्मा#शांति#श्राद्ध
श्रीमद्भागवतभागवत कथा से भक्ति कैसे जागती है?कहा गया है कि भागवत कथा के शब्द और कथा-रस से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पुष्ट होकर तरुण हो जाते हैं।#भक्ति#भागवत कथा#ज्ञान वैराग्य