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एकादशी तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(202)

एकादशी तिथि से जुड़े 202 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

पूजा विधि

कामिका एकादशी पर किन खास मंत्रों का जाप करना चाहिए?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'विष्णु गायत्री मंत्र' का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही 'शान्ताकारं भुजगशयनं...' स्तुति भी पढ़नी चाहिए।

#मंत्र जाप#द्वादशाक्षर मंत्र#विष्णु गायत्री
पूजा विधि

कामिका एकादशी की सुबह की पूजा विधि और संकल्प क्या है?

सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर नहाना चाहिए। फिर हाथ में जल और चावल (अक्षत) लेकर व्रत का संकल्प लें और भगवान के 'श्रीधर' स्वरूप की पूजा करें।

#संकल्प मंत्र#ब्रह्म मुहूर्त#स्नान
आहार और नियम

एकादशी व्रत के लिए दशमी के दिन क्या नियम हैं?

दशमी के दिन सिर्फ एक बार बिना प्याज-लहसुन और मसूर की दाल वाला सादा खाना खाना चाहिए। कांसे के बर्तन में खाना मना है और रात में जमीन पर सोना चाहिए।

#दशमी के नियम#सात्विक भोजन#ब्रह्मचर्य
पूजा विधि

कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के किस स्वरूप (श्रीधर) की पूजा होती है?

इस दिन भगवान विष्णु के 'श्रीधर' (हृदय में लक्ष्मी को धारण करने वाले) स्वरूप की पूजा होती है। इनकी पूजा से अपार सुख, शांति और ऐश्वर्य मिलता है।

#श्रीधर स्वरूप#भगवान विष्णु#ऐश्वर्य
तिथि निर्णय

शुद्ध और विद्ध एकादशी (तिथि-निर्णय) में क्या अंतर है?

जिस एकादशी में दशमी मिली हो (विद्ध), उसका व्रत नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका पुण्य असुरों को मिलता है। हमेशा बिना दशमी वाली 'शुद्ध एकादशी' का व्रत करना चाहिए।

#विद्ध एकादशी#शुद्ध एकादशी#अरुणोदय
व्रत कथा

कामिका एकादशी की व्रत कथा क्या है (क्षत्रिय और ब्राह्मण की कथा)?

एक क्रोधी क्षत्रिय से गलती से एक ब्राह्मण की हत्या हो गई थी। समाज से निकाले जाने के बाद, उसने एक ऋषि के कहने पर कामिका एकादशी का व्रत किया था।

#व्रत कथा#क्षत्रिय#ब्राह्मण हत्या
दार्शनिक आधार

'कामिका' एकादशी का अर्थ क्या है?

'कामिका' का अर्थ है इच्छा पूरी करने वाली। इस व्रत को करने से इंसान नीच योनियों (कुयोनि) में जन्म लेने से बच जाता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

#कामिका अर्थ#कामना पूर्ति#कुयोनि मुक्ति
पौराणिक कथा

एकादशी माता की उत्पत्ति कैसे हुई (मुर दैत्य की कथा)?

देवताओं को परेशान करने वाले 'मुर' दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के मन (ग्यारहवीं इंद्रिय) से एक शक्ति प्रकट हुई थी, जिसे भगवान ने 'एकादशी' नाम दिया।

#एकादशी उत्पत्ति#मुर दैत्य#भगवान विष्णु
तिथि और माहात्म्य

कामिका एकादशी कब मनाई जाती है?

कामिका एकादशी सावन (श्रावण) महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। यह चातुर्मास का वह समय होता है जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं।

#कामिका एकादशी#श्रावण मास#कृष्ण पक्ष
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन अनाज (गेहूं, चावल) खाना पाप क्यों है?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन दुनिया के सारे पाप अन्न (अनाज) में आकर छुप जाते हैं। इसलिए इस दिन अनाज खाने का मतलब सीधे पाप खाना है।

#अन्न निषेध#पाप पुरुष#भोजन निषेध
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन दातून करना और दिन में सोना क्यों मना है?

पेड़-पौधों को तोड़ना शास्त्रों में मना है, इसलिए दातून नहीं करनी चाहिए। दिन में सोने से आलस्य बढ़ता है और एकादशी के 'रात्रि जागरण' का पुण्य नष्ट हो जाता है।

#दैहिक निषेध#दातून निषेध#दिवा निद्रा
पूजा विधि

देवशयनी एकादशी पर कौन से खास मंत्र (शयन मंत्र) का जाप करें?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करना चाहिए। साथ ही भगवान को सुलाते समय 'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ...' (शयन मंत्र) का जाप करने से विशेष कृपा मिलती है।

#शयन मंत्र#मूल मंत्र#स्तुति
पूजा विधि

देवशयनी एकादशी पर भगवान को किशमिश (दाख) का भोग क्यों लगाते हैं?

शास्त्रों में देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को ऋतु फल और मिठाई के साथ विशेष रूप से किशमिश (दाख) का भोग लगाने का नियम बताया गया है।

#किशमिश भोग#दाख#नैवेद्य
पूजा विधि

देवशयनी एकादशी की पूजा विधि और सामग्री क्या है?

शेषनाग पर लेटे हुए भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर पीले कपड़े पहनाएं, पीला चंदन लगाएं और पीले फूल व तुलसी दल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।

#षोडशोपचार पूजा#शयनी स्वरूप#पूजन सामग्री
पूजा विधि

एकादशी की सुबह नहाने और संकल्प का क्या नियम है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगाजल मिले पानी से नहाकर पीले कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद हाथ में जल और फूल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

#संकल्प मंत्र#स्नान विधि#ब्रह्म मुहूर्त
आहार और नियम

देवशयनी एकादशी व्रत के लिए दशमी के नियम क्या हैं?

दशमी के दिन कांसे के बर्तन में खाना, मसूर, चना और शहद खाना पूरी तरह मना है। रात में ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जमीन पर सोना चाहिए।

#दशमी के नियम#संयम#व्रत तैयारी
व्रत कथा

देवशयनी (पद्मा) एकादशी की व्रत कथा क्या है (राजा मान्धाता)?

राजा मान्धाता के राज्य में 3 साल तक भयंकर अकाल पड़ा था। महर्षि अंगिरा के कहने पर राजा और प्रजा ने पद्मा (देवशयनी) एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से भारी बारिश हुई और अकाल मिट गया।

#राजा मान्धाता#अकाल मुक्ति#व्रत कथा
दार्शनिक आधार

देवशयनी एकादशी से 'चातुर्मास' क्यों शुरू होता है?

इस दिन से देवताओं की रात्रि शुरू होती है और वर्षा ऋतु के कारण साधु-संत यात्रा रोककर एक जगह तपस्या करते हैं। इसलिए इस दिन से 4 महीने का 'चातुर्मास' शुरू होता है।

#चातुर्मास#वर्षा ऋतु#तपस्या
तिथि और माहात्म्य

देवशयनी एकादशी के अन्य नाम क्या हैं (पद्मा, हरिशयनी)?

इस एकादशी को हरिशयनी, शयनी, पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और 'महा-एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है।

#हरिशयनी#पद्मा एकादशी#पुराण
दार्शनिक आधार

एकादशी का असली (आध्यात्मिक) अर्थ क्या है?

'एकादशी' का असली मतलब अपनी 11 इंद्रियों (मन और शरीर) पर काबू पाकर अपना सारा ध्यान भगवान की भक्ति में लगाना है।

#एकादशी अर्थ#आध्यात्मिक ज्ञान#इंद्रिय संयम
तिथि और माहात्म्य

देवशयनी एकादशी कब आती है?

देवशयनी एकादशी आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। इसी पवित्र दिन से 'चातुर्मास' (चार महीने के व्रत और नियम) की शुरुआत होती है।

#देवशयनी एकादशी#आषाढ़ मास#शुक्ल पक्ष
वैज्ञानिक दृष्टिकोण

एकादशी के दिन उपवास करने का वैज्ञानिक कारण क्या है?

विज्ञान के अनुसार, उपवास करने से पेट के पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर की गंदगी बाहर निकलती है। चंद्रमा के प्रभाव से मन को शांत रखने के लिए भी यह उपवास जरूरी है।

#वैज्ञानिक कारण#डिटॉक्सिफिकेशन#चंद्रमा का प्रभाव
व्रत का फल

योगिनी एकादशी का व्रत करने से क्या फल मिलता है (88,000 ब्राह्मणों का पुण्य)?

इस एक व्रत को करने से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यह व्रत कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को ठीक करता है और व्यक्ति को वैकुंठ धाम ले जाता है।

#पुण्य फल#88000 ब्राह्मण#स्वर्ग प्राप्ति
पारण विधि

योगिनी एकादशी व्रत खोलने (पारण) का सही समय क्या है?

व्रत हमेशा अगले दिन (द्वादशी को) 'हरि वासर' (शुरुआती समय) बीतने के बाद सुबह खोलना चाहिए। व्रत खोलने से पहले ब्राह्मण को भोजन कराना और दान देना शुभ होता है।

#पारण का समय#हरि वासर#द्वादशी
पूजा विधि

योगिनी एकादशी पर कौन से खास मंत्रों का जाप करना चाहिए?

इस दिन भगवान विष्णु के 'अष्टाक्षर मंत्र' (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जाप सबसे प्रभावशाली होता है। साथ ही 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ भी जरूर करना चाहिए।

#मंत्र जाप#अष्टाक्षर मंत्र#विष्णु गायत्री
नियम और वर्जनाएं

क्या एकादशी के दिन पूजा के लिए तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं?

नहीं, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना बिल्कुल मना है। भगवान की पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

#तुलसी निषेध#पूजा नियम#तुलसी दल
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन दातून करना (पेड़ से लकड़ी तोड़ना) क्यों मना है?

एकादशी के दिन पेड़-पौधों को तोड़ना शास्त्रों में मना है। इसलिए दांत साफ करने के लिए पेड़ से लकड़ी (दातून) नहीं तोड़नी चाहिए, सिर्फ पानी से कुल्ला करना चाहिए।

#दातून निषेध#शारीरिक शुद्धि#आचरण नियम
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन अनाज (गेहूं, चावल) क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन सारे पाप अनाज (अन्न) में छुप जाते हैं। इसलिए इस दिन अनाज या चावल खाने का मतलब सीधे पाप खाना है।

#अन्न निषेध#पाप पुरुष#व्रत नियम
पूजा विधि

योगिनी एकादशी पर पीपल के पेड़ की पूजा का क्या महत्व है?

इस एकादशी पर पीपल के पेड़ को जल चढ़ाने और उसकी 7 परिक्रमा करने से सभी बड़े पाप और 'पितृ दोष' खत्म हो जाते हैं।

#पीपल पूजा#पितृ दोष#पाप नाश
पूजा विधि

योगिनी एकादशी की सुबह की पूजा विधि क्या है?

सुबह जल्दी उठकर पानी में तिल डालकर नहाना चाहिए। पीले कपड़े पहनकर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। फिर विष्णु जी की मूर्ति को पंचामृत से नहलाकर उनकी पूजा करें।

#संकल्प मंत्र#स्नान विधि#पंचामृत अभिषेक
तिथि निर्णय

स्मार्त और वैष्णव एकादशी (तिथि-निर्णय) में क्या अंतर है?

गृहस्थ लोग (स्मार्त) वह एकादशी करते हैं जो सूर्योदय के समय होती है। जबकि वैष्णव (संन्यासी) लोग वह एकादशी करते हैं जिसमें 'अरुणोदय' (सुबह के समय) दशमी का बिल्कुल भी अंश नहीं मिला होता।

#स्मार्त एकादशी#वैष्णव एकादशी#वेध विचार
व्रत कथा

योगिनी एकादशी की व्रत कथा (हेममाली यक्ष की कथा) क्या है?

अलकापुरी के राजा कुबेर का सेवक हेममाली रोज शिव पूजा के लिए मानसरोवर से फूल लाता था। एक दिन वह अपनी पत्नी के मोह में पड़कर फूल ले जाना भूल गया, जिससे राजा की पूजा रुक गई।

#हेममाली कथा#व्रत कथा#अलकापुरी
दार्शनिक आधार

योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

'योगिनी' का अर्थ है 'ईश्वर से जुड़ना'। यह एकादशी इंसान को दुनिया के मोह-माया से निकालकर एक योगी की तरह भगवान की भक्ति से जोड़ती है।

#योगिनी अर्थ#योग धातु#इंद्रिय संयम
तिथि और माहात्म्य

योगिनी एकादशी कब आती है?

योगिनी एकादशी आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। यह पापों को नष्ट करने और शरीर को स्वस्थ रखने वाली एक बहुत पवित्र तिथि है।

#योगिनी एकादशी#आषाढ़ मास#कृष्ण पक्ष
नियम और वर्जनाएं

क्या एकादशी पर तुलसी को जल देना और छूना मना है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी माता को छूना, उन्हें जल चढ़ाना या उनके पत्ते तोड़ना पूरी तरह मना है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लेने चाहिए।

#तुलसी पूजन#जल निषेध#लोक परंपरा
व्रत का फल

मोहिनी एकादशी का व्रत करने से क्या फल मिलता है?

यह व्रत सुमेरु पर्वत जितने बड़े पापों को भी नष्ट कर देता है। इसे करने से 1000 गायों के दान और अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है और पितरों को शांति मिलती है।

#पुण्य फल#मोह मुक्ति#अश्वमेध यज्ञ
पारण विधि

एकादशी व्रत खोलने (पारण) का सही समय क्या है?

व्रत हमेशा अगले दिन (द्वादशी को) 'हरि वासर' (शुरुआती समय) बीतने के बाद सुबह के समय ही खोलना चाहिए। दोपहर के समय व्रत नहीं खोलना चाहिए।

#पारण का समय#हरि वासर#द्वादशी
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन सोना और झाड़ू लगाना क्यों वर्जित है?

दिन में सोने से आलस्य बढ़ता है और व्रत का फल कम हो जाता है। झाड़ू लगाने से छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों (सूक्ष्म जीवों) की जान जाने का डर रहता है, जो एक पाप है।

#दिवा निद्रा#झाड़ू निषेध#रात्रि जागरण
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन दातून करना क्यों मना है?

एकादशी के दिन पेड़-पौधों से लकड़ी या पत्ते तोड़ना पाप माना जाता है, इसलिए दातून नहीं करनी चाहिए। मुंह साफ करने के लिए सिर्फ पानी से कुल्ला करें।

#दातून निषेध#वृक्ष आघात#लोक परंपरा
नियम और वर्जनाएं

एकादशी के दिन अन्न और चावल खाना क्यों मना है?

पुराणों के अनुसार एकादशी के दिन सारे पाप अनाज (विशेषकर चावल) में आकर छुप जाते हैं। इसलिए इस दिन चावल या अनाज खाने का मतलब सीधे पाप खाना है।

#चावल निषेध#अन्न त्याग#पाप भक्षण
पूजा विधि

मोहिनी एकादशी पर कौन से मंत्र और स्तोत्र का पाठ करें?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके अलावा 'विष्णु सहस्रनाम', 'नारायण कवच' और भगवद्गीता के 11वें अध्याय का पाठ करना बहुत शुभ होता है।

#मंत्र पाठ#विष्णु सहस्रनाम#द्वादशाक्षर मंत्र
पूजा विधि

मोहिनी एकादशी की पूजा विधि और सामग्री क्या है?

भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराकर पीले कपड़े पहनाएं और गर्मी दूर करने के लिए चंदन लगाएं। पीले फूल, फल और तुलसी दल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।

#षोडशोपचार पूजा#पूजन सामग्री#मलय चंदन
पूजा विधि

एकादशी की सुबह स्नान और संकल्प का क्या नियम है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पानी में गंगाजल या तिल मिलाकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प जरूर लेना चाहिए।

#संकल्प मंत्र#ब्रह्म मुहूर्त#स्नान विधि
आहार और नियम

मोहिनी एकादशी व्रत के लिए दशमी के नियम क्या हैं?

दशमी के दिन सिर्फ एक बार सात्विक भोजन करना चाहिए। मसूर, चना, शहद और कांसे के बर्तन का उपयोग मना है। रात में जमीन पर सोना और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

#दशमी के नियम#कांस्य निषेध#व्रत तैयारी
व्रत कथा

मोहिनी एकादशी की व्रत कथा (धृष्टबुद्धि की कथा) क्या है?

भद्रावती नगरी के वैश्य धनपाल का बेटा 'धृष्टबुद्धि' अत्यंत दुष्ट और शराबी था। घर से निकाले जाने के बाद वह जंगल में जाकर चोरी और जानवरों की हत्या जैसे घोर पाप करने लगा था।

#धृष्टबुद्धि कथा#व्रत कथा#धनपाल वैश्य
व्रत कथा

सबसे पहले मोहिनी एकादशी का व्रत किसने किया था?

सबसे पहले त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने माता सीता के वियोग में अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के कहने पर यह व्रत किया था, जिससे उन्हें रावण पर विजय मिली थी।

#प्रथम व्रती#भगवान राम#महर्षि वशिष्ठ
दार्शनिक आधार

मोहिनी एकादशी का नाम 'मोहिनी' कैसे पड़ा?

'मोहिनी' भगवान विष्णु का एकमात्र स्त्री अवतार है। यह एकादशी इंसान के मन से मोह (अज्ञान और भ्रम) का अंधकार दूर करती है, इसलिए इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है।

#मोहिनी नाम#विष्णु अवतार#योगमाया
तिथि और माहात्म्य

मोहिनी एकादशी किस महीने में आती है?

मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आती है। शास्त्रों में वैशाख महीने को सभी महीनों में सबसे पवित्र और श्रेष्ठ माना गया है。

#मोहिनी एकादशी#वैशाख मास#शुक्ल पक्ष
दार्शनिक आधार

एकादशी और 'उपवास' का असली अर्थ क्या है?

'एकादशी' का अर्थ है शरीर की 11 इंद्रियों और मन को संसार से हटाकर भगवान में लगाना। 'उपवास' का असली मतलब है परमात्मा के निकट निवास करना।

#एकादशी अर्थ#उपवास#इंद्रिय निग्रह
पौराणिक कथा

एकादशी के दिन अनाज क्यों नहीं खाते?

पुराणों के अनुसार, एकादशी के दिन 'पाप पुरुष' अनाज में छुपकर बैठता है। इसलिए इस दिन अनाज खाने वाला व्यक्ति असल में पाप खाता है।

#अन्न निषेध#पाप पुरुष#माधव तिथि
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
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होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।

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