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त्योहार पर्व

दीपावली, होली, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी — सभी हिन्दू त्योहारों की पूजा विधि और महत्व।

108प्रश्नोत्तर
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चैत्र नवरात्रि में विशेष पूजा कैसे करें?

चैत्र नवरात्रि: कलश स्थापना → 9 दिन नव दुर्गा पूजन (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री) → दुर्गा सप्तशती पाठ → नवार्ण मंत्र → अष्टमी हवन + कन्या पूजन → रामनवमी (नवमी) → विसर्जन। हिन्दू नववर्ष। ऋतु शुद्धि।

त्योहार पूजाचैत्र नवरात्रिवासंतिक नवरात्रि
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नवरात्रि में जागरण की रात कैसे मनाएं?

नवरात्रि जागरण: देवी पूजा-आरती → दुर्गा सप्तशती पाठ (सर्वोत्तम) → भजन-कीर्तन → 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' जप → देवी कथा → मध्यरात्रि ध्यान → प्रातः आरती-प्रसाद। अष्टमी/नवमी रात विशेष। सात्त्विक रहें।

त्योहार पूजानवरात्रि जागरणरात्रि जागरण
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कृष्ण जन्माष्टमी पर दही हांडी का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

दही हांडी अर्थ: सामूहिक शक्ति (अकेले लक्ष्य अप्राप्य), माखन = साधना से प्राप्त आनन्द/प्रेम, ऊँचाई = कठिन आध्यात्मिक लक्ष्य, गिरना-उठना = साधना बाधाएँ, नन्दोत्सव = 'आनन्दं ब्रह्म।' कृष्ण = भक्त के प्रेम का चोर।

त्योहार पूजादही हांडीगोविन्दा
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करवा चौथ पर चंद्रमा देखकर व्रत क्यों खोलते हैं?

चन्द्र दर्शन क्यों: चन्द्र = अमरता प्रतीक (क्षय बाद पुनः पूर्ण), शिव मस्तक (शिव-पार्वती पर्व), चतुर्थी तिथि देवता। कथा: वीरवती ने बिना चन्द्र देखे व्रत खोला → पति मृत्यु → सही चन्द्रोदय पर पारण → पति जीवित। छलनी = शुद्ध दृष्टि।

त्योहार पूजाकरवा चौथ चंद्रमाचन्द्र दर्शन
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दीपावली पर गणेश लक्ष्मी पूजा में सरस्वती क्यों बैठती हैं?

सरस्वती क्यों: धन (लक्ष्मी) + ज्ञान (सरस्वती) = सम्पूर्ण समृद्धि। बहीखाता = सरस्वती, तिजोरी = लक्ष्मी। पंचपूजन: गणेश + लक्ष्मी + काली (दवात) + सरस्वती (बही) + कुबेर (तिजोरी)। केवल धन नहीं, ज्ञानपूर्वक धन = शाश्वत समृद्धि।

त्योहार पूजागणेश लक्ष्मी सरस्वतीदीपावली
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दीपावली पर काली पूजा बंगाल में क्यों करते हैं?

बंगाल काली पूजा: अमावस्या = अंधकार चरम, काली = अंधकार नाशिनी। बंगाल शाक्त-तांत्रिक केन्द्र। रामकृष्ण परमहंस प्रभाव। शाक्त दर्शन: लक्ष्मी-काली = आदिशक्ति के रूप। मध्यरात्रि पूजा। 'ॐ क्रीं काल्यै नमः।' कोजागरी पर लक्ष्मी अलग से।

त्योहार पूजाकाली पूजाबंगाल
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नाग पंचमी पर दूध चढ़ाने की परंपरा का क्या आधार है?

दूध आधार: क्षीरसागर में शेषनाग पर विष्णु शयन, समुद्र मंथन में वासुकि सेवा, शिव-नाग सम्बंध। दूध = सर्वोच्च सम्मान। किन्तु जीवित सर्प दूध नहीं पचाते — उन्हें दूध देना हानिकारक। प्रतिमा/चित्र/शिवलिंग पर अर्पित करें।

त्योहार पूजानाग पंचमी दूधसर्प दूध
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नाग पंचमी पर नाग पूजा कैसे करें?

नाग पंचमी: श्रावण शुक्ल पंचमी। विधि: गेरू/हल्दी से नाग चित्र या प्रतिमा → दूध, दूर्वा, लावा, खीर अर्पण → अष्टनाग स्मरण → नाग स्तोत्र → व्रत कथा। जमीन खोदना वर्जित। जीवित सर्प को दूध देना हानिकारक — प्रतिमा पर अर्पित करें।

त्योहार पूजानाग पंचमीसर्प पूजा
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गुप्त नवरात्रि कब आती है और कौन सी साधना करें?

गुप्त नवरात्रि: माघ शुक्ल 1-9 और आषाढ़ शुक्ल 1-9। साधना: दश महाविद्या (काली, तारा, त्रिपुरसुन्दरी...), मंत्र सिद्धि (सवालक्ष जप)। गुरु दीक्षा अनिवार्य। गोपनीय साधना। सामान्य भक्त: दुर्गा सप्तशती, नवार्ण मंत्र।

त्योहार पूजागुप्त नवरात्रिमाघ नवरात्रि
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नवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?

कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।

त्योहार पूजानवरात्रिकलश स्थापना
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तुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करें

तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।

पर्वतुलसी विवाहप्रबोधिनी एकादशी
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शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा का क्या कारण है

शरद पूर्णिमा खीर: (1) चन्द्रमा सोलह कलाओं में पूर्ण — अमृत वर्षा। (2) आयुर्वेद: शरद में पित्त बढ़ता है, चन्द्र किरण + खीर = शीतल, पित्तशामक। (3) भागवत: कृष्ण रासलीला रात्रि। (4) कोजागरी: लक्ष्मी जागने वालों को धन देती हैं। चाँदनी में रखकर प्रातः प्रसाद।

पर्वशरद पूर्णिमाखीर
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नवरात्रि में ज्वारा बोने की विधि क्या है

नवरात्रि ज्वारा: प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ — मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी + जौ/गेहूँ बीज → जल छिड़कें → 9 दिन अँधेरे में (सुबह-शाम जल) → 5-7 इंच अंकुर → नवमी/दशमी को निकालें → प्रसाद (कान पर लगाएँ) + विसर्जन। ज्वारा = शक्ति जागृति, सौभाग्य प्रतीक।

पर्वनवरात्रिज्वारा
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गोवर्धन पूजा कैसे करें

गोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।

पर्वगोवर्धनअन्नकूट
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भैया दूज पर पूजा कैसे करें

भैया दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया। बहन भाई को तिलक (रोली-चावल) → आरती → मिठाई/फल → भोजन खिलाए। भाई उपहार दे। कथा: यमुना ने यमराज का तिलक किया — वरदान: तिलक करवाने वाले को यमभय नहीं। भाई-बहन स्नेह बन्धन।

पर्वभैया दूजयम द्वितीया
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अन्नकूट पूजा की विधि क्या है

अन्नकूट: 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन = अन्न का पर्वत। कृष्ण/गोवर्धन को अर्पित → भोग → प्रसाद वितरण। 56 = 7 दिन × 8 प्रहर (गोवर्धन उठाने की अवधि)। श्रीनाथजी, जगन्नाथ, वृन्दावन मन्दिरों में भव्य। यथाशक्ति व्यंजन बनाएँ।

पर्वअन्नकूटछप्पन भोग
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दशहरा पर रावण दहन का आध्यात्मिक अर्थ क्या है

रावण दहन = अपने भीतर की 10 बुराइयों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य आदि) का दहन। अध्यात्म: राम = आत्मा, रावण = अहंकार, सीता = बुद्धि — अहंकार पर आत्मा की विजय। 9 दिन शक्ति साधना → 10वें दिन विजय। बाहरी दहन प्रतीकात्मक — वास्तविक विजय आन्तरिक।

पर्वदशहरारावण दहन
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देव दीपावली कब मनाते हैं और कैसे

देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा — देवताओं की दीपावली। शिव का त्रिपुरासुर वध। गंगा स्नान → शिव-विष्णु पूजा → सन्ध्या में लाखों दीये (नदी तट, घाट, मन्दिर)। काशी में 84 घाटों पर दीपदान + भव्य गंगा आरती। सर्वपापनाश, मोक्ष।

पर्वदेव दीपावलीकार्तिक पूर्णिमा
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दशहरा पर शस्त्र पूजा कैसे करें

दशहरा शस्त्र पूजा: शस्त्र/आयुध स्वच्छ करें → लाल कपड़े पर रखें → हल्दी-कुमकुम-अक्षत → पुष्प-धूप-दीप → 'ॐ शस्त्रेभ्यो नमः'। दक्षिण भारत: आयुध पूजा — पुस्तकें, वाद्य, वाहन, औजार। आधुनिक: कार्य उपकरणों की पूजा = कृतज्ञता।

पर्वदशहराशस्त्र पूजा
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दशहरा पर शमी पूजा का क्या महत्व है

शमी पूजा (दशहरा): महाभारत — पाण्डवों ने शमी पर शस्त्र छिपाए, विजयदशमी पर उतारे। शमी पत्ते = 'सोना' — एक-दूसरे को भेंट। 'शमी शमयते पापम्' = पाप शमन। शमी में अग्नि का वास। शनि शान्ति। महाराष्ट्र/दक्षिण भारत में अत्यन्त प्रचलित।

पर्वशमीदशहरा
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गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा कैसे करें

गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा = व्यास जन्मदिन। गुरु/व्यास पादुका पूजा → 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' जप → गुरु गीता पाठ → चरण स्पर्श → दक्षिणा → विद्वान भोजन। गुरु = ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप।

पर्वगुरु पूर्णिमाव्यास पूजा
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अक्षय तृतीया पर पूजा और दान कैसे करें

अक्षय तृतीया: वैशाख शुक्ल तृतीया। पूजा: विष्णु-लक्ष्मी पूजा, गंगा स्नान, सत्यनारायण कथा। दान: जल (सर्वोत्तम), अन्न, वस्त्र, छाता, स्वर्ण खरीद शुभ। सम्पूर्ण दिन स्वयंसिद्ध शुभ — मुहूर्त अनावश्यक। परशुराम जन्म, सुदामा-कृष्ण कथा। अक्षय = कभी क्षीण न हो।

पर्वअक्षय तृतीयादान
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गंगा दशहरा पर गंगा पूजा कैसे करें

गंगा दशहरा: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी — गंगा अवतरण दिवस। गंगा/नदी स्नान → गंगा पूजा (श्वेत पुष्प, चन्दन) → गंगा स्तोत्र → 10 की संख्या में दान → नदी में दीपदान। दशहरा = 10 पापों का नाश (3 कायिक + 4 वाचिक + 3 मानसिक)।

पर्वगंगा दशहरागंगा पूजा
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मकर संक्रांति पर दान करने का शास्त्रीय विधान क्या है?

मकर संक्रांति दान: पुण्यकाल (संक्रांति ±6.5 घण्टे) में। क्रम: तिल स्नान → सूर्य अर्घ्य → दान। सामग्री: तिल (सर्वोत्तम), गुड़, खिचड़ी, गर्म वस्त्र, अन्न, गोदान। पितर तर्पण। गंगा स्नान-दान विशेष। भीष्म = उत्तरायण महत्व। दान अक्षय फल।

त्योहार पूजामकर संक्रांति दानतिल दान
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मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का क्या महत्व है?

तिल-गुड़ महत्व: धार्मिक — तिल = शनि प्रिय (मकर स्वामी), विष्णु वास, 6 प्रकार प्रयोग (स्नान-दान-हवन-भोजन-तर्पण-उबटन)। गुड़ = मिठास-सम्बंधों का प्रतीक। आयुर्वेदिक — तिल उष्ण (सर्दी में गर्मी), गुड़ ऊर्जा-लौह स्रोत। दान सर्वाधिक पुण्यदायी।

त्योहार पूजामकर संक्रांतितिल गुड़
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रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र क्या है?

राखी मंत्र: 'येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।' अर्थ: जिससे बलि बाँधे गए, उसी से बाँधता हूँ — अडिग रहना। विधि: तिलक → मंत्र → दाहिनी कलाई → मिठाई। भद्रा में वर्जित।

त्योहार पूजारक्षाबंधनराखी मंत्र
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होली पर होलिका दहन में परिक्रमा क्यों करते हैं?

होलिका परिक्रमा: प्रह्लाद भक्ति का सम्मान, अग्नि साक्षी रखकर बुराई त्याग संकल्प, पाप दहन, नवीन फसल अर्पण (कृतज्ञता), रक्षा कामना, सामुदायिक एकता। 3/5/7 दक्षिणावर्त परिक्रमा। जल-अक्षत-पुष्प अर्पित।

त्योहार पूजाहोलिका परिक्रमाहोली अग्नि
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होली पर होलिका दहन की विधि क्या है?

होलिका दहन: फाल्गुन पूर्णिमा संध्या → भद्रा रहित मुहूर्त → होलिका पूजन (जल, रोली, अक्षत, नई फसल) → 3-7 परिक्रमा → अग्नि प्रज्वलन → गेहूँ बालियाँ भूनें → प्रसाद। कथा: प्रह्लाद बचे, होलिका जली — बुराई पर अच्छाई की जीत।

त्योहार पूजाहोलिका दहनहोली
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बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा कैसे करें?

बसंत पंचमी: पीले वस्त्र → सरस्वती प्रतिमा स्थापना → षोडशोपचार → 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' → पुस्तक-कलम-वाद्य पूजन → विद्यारम्भ (बच्चों का) → सरस्वती सूक्त → आरती → पीले प्रसाद। बंगाल में प्रतिमा विसर्जन।

त्योहार पूजाबसंत पंचमीसरस्वती पूजा
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हनुमान जयंती पर पूजा की विधि क्या है?

हनुमान जयंती: चैत्र पूर्णिमा → सिन्दूर-चमेली तेल-लाल पुष्प → बूँदी लड्डू-गुड़ चना भोग → हनुमान चालीसा 7+ बार → सुन्दरकाण्ड → बजरंग बाण → 'ॐ हनुमते नमः' → आरती → प्रदक्षिणा → दान। ब्रह्मचारियों हेतु विशेष फलदायी।

त्योहार पूजाहनुमान जयंतीचैत्र पूर्णिमा
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रामनवमी पर राम जन्म की पूजा कैसे करें?

रामनवमी: व्रत → प्रातः राम दरबार अभिषेक → दोपहर 12 बजे विशेष पूजा-जयघोष (जन्म समय) → पालना/झूला → रामचरितमानस बालकाण्ड ('भए प्रगट कृपाला...') → 'ॐ रामाय नमः' जप → आरती → प्रसाद-दान।

त्योहार पूजारामनवमीराम जन्म
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जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में पूजा क्यों करते हैं?

मध्यरात्रि पूजा क्योंकि: कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी) में हुआ (भागवत 10.3)। अभिजित मुहूर्त। जागरण तप। अंधकार (अज्ञान) में प्रकाश (कृष्ण) का उदय — अवतार का मूल सन्देश।

त्योहार पूजाजन्माष्टमी मध्यरात्रिकृष्ण जन्म समय
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जन्माष्टमी पर कृष्ण जन्म की पूजा कैसे करें?

जन्माष्टमी: निर्जला व्रत → झूला सजाएँ → मध्यरात्रि 12 बजे बालकृष्ण पंचामृत अभिषेक → वस्त्र-मुकुट-मोरपंख → माखन-मिश्री भोग → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कृष्ण जन्म कथा → आरती → झूला → प्रसाद से व्रत पारण।

त्योहार पूजाजन्माष्टमीकृष्ण जन्म
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गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना कैसे करें?

गणपति स्थापना: मिट्टी मूर्ति → चौकी सज्जा → प्राण प्रतिष्ठा (पंचामृत स्नान, 'ॐ गं गणपतये नमः') → षोडशोपचार → गणेश अथर्वशीर्ष → 21 मोदक भोग → आरती → प्रतिदिन पूजा → अनंत चतुर्दशी विसर्जन। दूर्वा 21 गाँठ। चन्द्र दर्शन वर्जित।

त्योहार पूजागणेश चतुर्थीगणपति स्थापना
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करवा चौथ व्रत की पूजा विधि क्या है?

करवा चौथ: सरगी (भोर) → निर्जला व्रत → संध्या पूजा (करवा, गौर-पार्वती) → कथा श्रवण → चन्द्रोदय पर छलनी से चाँद देखें → फिर पति मुख → चन्द्र अर्घ्य → पति जल-मिठाई खिलाकर व्रत खोलें → करवा दान।

त्योहार पूजाकरवा चौथव्रत
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छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य क्यों देते हैं?

डूबता सूर्य अर्घ्य: कृतज्ञता (दिनभर का धन्यवाद), षष्ठी तिथि विशेष, कठिन समय में भी श्रद्धा, संहार-विश्राम का सम्मान। उगता सूर्य: नवजीवन, व्रत पूर्णता, वैदिक परम्परा। दोनों मिलकर = जीवनचक्र पूर्णता।

त्योहार पूजाछठ अर्घ्यडूबता सूर्य
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छठ पूजा की विधि क्या है और सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?

छठ पूजा 4 दिन: नहाय-खाय → खरना (निर्जला, शाम खीर-प्रसाद) → षष्ठी संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को, कमर तक जल में) → सप्तमी प्रातः अर्घ्य (उगते सूर्य)। बाँस सूप में ठेकुआ-फल-गन्ना। 'ॐ सूर्याय नमः।' कठोरतम व्रत।

त्योहार पूजाछठ पूजासूर्य अर्घ्य
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नरक चतुर्दशी पर सुबह तेल स्नान क्यों करते हैं?

नरक चतुर्दशी तेल स्नान: कृष्ण ने नरकासुर वध के बाद प्रातः अभ्यंग स्नान किया — उसी स्मृति में। विधि: ब्रह्म मुहूर्त → तिल/सरसों तेल मालिश → हल्दी-बेसन उबटन → गर्म जल स्नान। फल: नरक यातना मुक्ति, पाप शुद्धि।

त्योहार पूजानरक चतुर्दशीछोटी दिवाली
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धनतेरस पर यम के लिए दीपक क्यों जलाते हैं?

धनतेरस यम दीपक: कथा — रानी ने दीपक-आभूषण से यमराज को रोका, पति प्राण बचे। विधि: दक्षिण दिशा, जमीन पर, तिल तेल, चार बत्ती, 'मृत्युना पाशहस्तेन...' मंत्र। उद्देश्य: अकाल मृत्यु रक्षा, दीर्घायु। रात भर जलता रहे।

त्योहार पूजाधनतेरसयम दीपक
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दीपावली पर तेरह दीपक कहाँ कहाँ रखें?

13 दीपक स्थान: पूजा स्थल, मुख्य द्वार, देहली, तुलसी, रसोई, तिजोरी, जल स्रोत, गोशाला, पीपल/बरगद, चौराहा (यमराज — दक्षिण दिशा), छत (पितर हेतु), शौचालय बाहर, अन्न भण्डार। तिल तेल, मिट्टी दीये, रात भर प्रज्वलित।

त्योहार पूजादीपावली दीपकतेरह दीपक
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दीपावली पर लक्ष्मी पूजा किस मुहूर्त में करें?

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल (सूर्यास्त + 2 घण्टे 24 मिनट) सर्वश्रेष्ठ। वृषभ लग्न (स्थिर) में पूजा = लक्ष्मी स्थिर। कार्तिक अमावस्या अनिवार्य। चर लग्न से बचें। हर वर्ष समय भिन्न — पंचांग देखें।

त्योहार पूजालक्ष्मी पूजा मुहूर्तदीपावली समय
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दीपावली पूजा की संपूर्ण विधि क्या है?

दीपावली पूजा: सफाई → चौकी सज्जा → गणेश पूजन → महालक्ष्मी षोडशोपचार → महाकाली (दवात) → सरस्वती (बहीखाता) → कुबेर (तिजोरी) → दीप-मालिका (11/13/21 दीपक) → आरती → श्री सूक्त पाठ। रात भर दीप प्रज्वलित।

त्योहार पूजादीपावलीलक्ष्मी पूजा
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महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें?

महाशिवरात्रि में रात को चार प्रहर की पूजा करें — प्रथम प्रहर दूध, द्वितीय दही, तृतीय घी, चतुर्थ शहद से अभिषेक। प्रत्येक प्रहर बेलपत्र, 'ॐ नमः शिवाय' जप और आरती। पूरी रात जागरण। अगले दिन प्रातः पारण।

पर्व पूजामहाशिवरात्रिचतुर्प्रहर पूजा
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गणेश चतुर्थी पूजा कैसे करें?

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित करें। 10 दिन प्रतिदिन 21 दूर्वा, 21 मोदक, सिंदूर अर्पण, गणपति अथर्वशीर्ष पाठ और आरती करें। चतुर्थी पर चंद्रमा न देखें। अनंत चतुर्दशी को विसर्जन करें।

पर्व पूजागणेश चतुर्थीविनायक चतुर्थी
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दीपावली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें?

दीपावली पर स्थिर लग्न में प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करें। घर साफ करें, रंगोली बनाएं, 16 दीप जलाएं, श्री सूक्त पाठ करें, 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करें और कुबेर पूजन भी करें।

पर्व पूजादीपावलीलक्ष्मी पूजा
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महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें?

महाशिवरात्रि पर रात के चारों पहर में जल, दूध, दही और घी से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा अर्पण और 'ॐ नमः शिवाय' जप के साथ रात भर जागरण करें। अगले दिन स्नान के बाद व्रत का पारण करें।

पर्व पूजामहाशिवरात्रिपूजा विधि
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गीता जयंती कब और क्यों मनाते हैं?

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) को मनाई जाती है। इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है।

पर्व एवं त्योहारगीता जयंतीभगवद्गीता
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नवरात्रि कन्या पूजन क्यों करते — आध्यात्मिक कारण?

कन्या=देवी स्वरूप(शुद्ध/निर्दोष)। 9 कन्या=नवदुर्गा 9 रूप। भोजन=देवी भोग, चरण धोना=चरण स्पर्श। स्त्री सम्मान संस्कार। कन्या पूजन बिना नवरात्रि=अपूर्ण।

त्योहारनवरात्रिकन्या पूजन
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त्योहार पर्व — प्रश्नोत्तर

त्योहार पर्व से सम्बन्धित 108+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप त्योहार पर्व के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

अन्य विषय

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पूजा विधि
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मंत्र जाप विधि
56 विषय
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शिव पूजा
43 विषय
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तंत्र साधना
42 विषय
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वास्तु शास्त्र
12 विषय
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सपनों का मतलब
3 विषय
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व्रत उपवास विधि
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देवी पूजा
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ध्यान साधना
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तीर्थ यात्रा
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हवन यज्ञ विधि
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स्तोत्र पाठ
20 विषय
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गणेश पूजा
8 विषय
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विष्णु भक्ति
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श्राद्ध पितृ कर्म
8 विषय
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त्योहार पर्व: सनातन धर्म प्रश्नोत्तर — Pauranik