ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📖

सनातन दर्शन

सनातन धर्म क्या है, वेद, उपनिषद, भगवद गीता, कर्म सिद्धांत, आत्मा, मोक्ष — दर्शन के प्रश्नोत्तर।

477प्रश्नोत्तर
प्र

दान कर रहे हैं पर दरिद्रता दूर नहीं हो रही — कारण क्या है?

दान का फल तब अधिक होता है जब — बिना दिखावे के सही पात्र को, सात्विक भाव से दिया जाए (गीता 17.20)। प्रारब्ध कर्म का ऋण चुकाने में समय लगता है। दान के साथ परिश्रम और अनुशासन भी जरूरी है।

भक्ति एवं आध्यात्मदानदरिद्रता
प्र

अन्य धर्म के लोग हिंदू मंत्र जप सकते हैं क्या?

हाँ — मंत्र सार्वभौमिक। ऋग्वेद: 'सत्य एक, नाम अनेक।' मंत्र=ध्वनि ऊर्जा, धर्म सीमित नहीं। 'ॐ'=सबसे सार्वभौमिक। शर्त: श्रद्धा+सम्मान। George Harrison=हरे कृष्ण जप।

धर्म मार्गदर्शनअन्य धर्ममंत्र जप
प्र

हिंदू धर्म में ईश्वर एक है या अनेक?

ईश्वर एक है, रूप अनेक। ऋग्वेद (1.164.46): 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति' — सत्य एक, नाम अनेक। श्वेताश्वतर: 'एको देवः सर्वभूतेषु गूढः।' निर्गुण ब्रह्म एक, सगुण रूप (ब्रह्मा/विष्णु/शिव) अनेक — सब उसी की अभिव्यक्ति।

दर्शनएकेश्वरवादबहुदेववाद
प्र

वैतरणी नदी पार करने के लिए गाय दान क्यों जरूरी?

गरुड़ पुराण: वैतरणी = रक्त-पूय भरी भयानक नदी। गो-दान करने वाले की गाय पूँछ पकड़ाकर पार कराती है। बिना गो-दान = अत्यंत कष्ट। गाय न हो = गौशाला दान। उद्देश्य: गो-सेवा/दान प्रेरणा।

पौराणिक ज्ञानवैतरणीगाय दान
प्र

व्यस्त जीवन में आध्यात्मिक साधना कैसे करें?

गीता (9.27): सब कुछ ईश्वर को अर्पित करो — बस! सुबह 5 मिनट (गायत्री+दीपक), दिन भर मानसिक जप, शाम आरती। कर्म = पूजा। ईमानदारी+दया+ईश्वर स्मरण = परम साधना। मंदिर में घंटों बैठना जरूरी नहीं।

धर्म मार्गदर्शनव्यस्त जीवनसाधना
प्र

प्रायश्चित कैसे करें पापों के लिए?

प्रायश्चित: तप (उपवास/व्रत), जप (गायत्री/महामृत्युंजय), दान (अन्न/गो/वस्त्र), तीर्थ यात्रा, हवन, सेवा। सबसे महत्वपूर्ण: सच्चा पश्चाताप + पुनः पाप न करने का संकल्प। गीता: आत्मज्ञान और ईश्वर शरणागति सर्वोच्च प्रायश्चित।

धर्म मार्गदर्शनप्रायश्चितपाप क्षमा
प्र

शाक्त संप्रदाय में देवी की उपासना अन्य संप्रदायों से कैसे भिन्न है?

शाक्त = देवी सर्वोच्च। तंत्र प्रधान (vs भक्ति/योग)। दशमहाविद्या + शक्तिपीठ + श्री चक्र। 'सर्वं शक्तिमयं जगत्'। शिव = शव बिना शक्ति। 5 संप्रदाय: वैष्णव/शैव/शाक्त/सौर/गाणपत्य।

शास्त्र ज्ञानशाक्तसंप्रदाय
प्र

शाकाहार हिंदू धर्म में अनिवार्य है क्या?

अनिवार्य नहीं, पर उत्तम+प्रोत्साहित। अहिंसा=शाकाहार। गीता: सात्विक=शाक/फल। पर बंगाल/कश्मीर ब्राह्मण, शाक्त परंपरा=मांस। परंपरा/क्षेत्र पर निर्भर। धीरे-धीरे कम=श्रेष्ठ।

धर्म मार्गदर्शनशाकाहारमांसाहार
प्र

हिंदू धर्म में समानता का सिद्धांत क्या है?

वेद-उपनिषद का संदेश — 'एकं सत्', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि' — सभी जीवों में एक ही आत्मा। गीता में समदर्शन। वर्ण गुण-कर्म पर आधारित, जन्म पर नहीं। भक्ति परंपरा में शबरी, कबीर, रैदास जैसे उदाहरण।

सनातन दर्शनसमानतासनातन धर्म
प्र

चार मठ कहाँ हैं और किसने स्थापित किए?

शंकराचार्य(8वीं सदी): पूर्व=गोवर्धन(पुरी/ऋग्वेद), दक्षिण=शृंगेरी(कर्नाटक/यजुर्वेद), पश्चिम=द्वारका(गुजरात/सामवेद), उत्तर=ज्योतिर्मठ(बदरीनाथ/अथर्ववेद)। 4 महावाक्य। वैदिक धर्म पुनर्स्थापना।

धर्म ज्ञानचार मठशंकराचार्य
प्र

व्रत रखते हैं पर मनोकामना पूरी नहीं हो रही — क्यों?

व्रत सौदे की तरह नहीं होना चाहिए। कारण — भाव की कमी, नियमों में त्रुटि, माँग का स्वरूप, प्रारब्ध। व्रत का पहला फल मन की साधना और संकल्प-शक्ति है। भाव शुद्ध रखें, फल भगवान पर छोड़ें।

भक्ति एवं आध्यात्मव्रतमनोकामना
प्र

शंकराचार्य ने चार मठ क्यों स्थापित किए?

वैदिक धर्म संकट(बौद्ध/जैन प्रबल), भारत सांस्कृतिक एकता(4 दिशा), 4 वेद संरक्षण, गुरु परंपरा अखंड। 32 वर्ष जीवन — पूरा भारत पैदल शास्त्रार्थ — अद्वैत वेदांत स्थापित।

धर्म ज्ञानशंकराचार्यचार मठ
प्र

व्यासजी ने वैवस्वत मन्वन्तर में कितने श्लोकों में वर्णन किया?

वैवस्वत मन्वन्तर में श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजी ने लिङ्गपुराण का वर्णन ग्यारह हजार श्लोकों में किया।

पुराण परिचयवैवस्वत मन्वन्तरव्यासजी
प्र

एक करोड़ श्लोकों वाला कौन सा पुराण बताया गया है?

सौ करोड़ विस्तारवाले पुराणसमुच्चय में एक करोड़ श्लोकोंवाला पुराण लिङ्गपुराण बताया गया है।

पुराण परिचयएक करोड़ श्लोकलिङ्गपुराण
प्र

सूतजी ने व्यासजी से कौन सा पुराण सुना?

सूतजी ने लिङ्गपुराण को व्यासजी से सुना था।

पुराण परिचयसूतजीव्यासजी
प्र

ग्यारहवाँ पुराण कौन सा है?

अठारह पुराणों में ग्यारहवाँ पुराण लिङ्गपुराण कहा गया है।

पुराण परिचयग्यारहवाँ पुराणअठारह पुराण
प्र

पुराणों को हर द्वापरयुग में कौन विभाजित करता है?

प्रत्येक द्वापरयुग में बृहद् पुराणसंहिता को व्यासजी अठारह पुराणों के रूप में विभक्त करते हैं।

पुराण परिचयपुराणद्वापरयुग
प्र

ईशानकल्प में किस कथा का आधार बताया गया है?

ईशानकल्प में लिङ्ग के प्रादुर्भाव आदि से सम्बद्ध वृत्तान्तों को आधार बताया गया है।

पुराण परिचयईशानकल्पलिङ्ग प्रादुर्भाव
प्र

ब्रह्मा ने सबसे पहले किस पुराण की उद्भावना की?

महात्मा ब्रह्मा ने ईशानकल्प के लिङ्ग-प्रादुर्भाव आदि वृत्तान्तों के आधार पर श्रेष्ठ लिङ्गपुराण की उद्भावना की।

पुराण परिचयब्रह्मालिङ्गपुराण
प्र

कलाप उपवन में पितर क्या बात कर रहे थे?

कलाप उपवन में पितृगण आपस में वार्तालाप कर रहे थे और अपेक्षा कर रहे थे कि उनके वंश में कोई सन्मार्गशील और धर्मपरायण व्यक्ति उत्पन्न हो जो गया तीर्थ में पिण्डदान करे, पितृ पक्ष की त्रयोदशी या प्रतिपदा को मधु-घृत युक्त पायस का दान करे, वृषोत्सर्ग नीला वृषभ छोड़े, और ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित संतुष्ट करे। महाराज पुरुरवा ने ये सब अपेक्षाएँ पूरी कीं।

पौराणिक कथाकलाप उपवनपितृगण वार्तालाप
प्र

महाराज पुरुरवा कौन थे?

महाराज पुरुरवा एक चन्द्रवंशी सम्राट थे, जो अत्यंत धर्मपरायण और विष्णु भक्त थे। विष्णु पुराण के तृतीय अंश में उनका प्रसंग वर्णित है। उन्होंने अपने पितरों की आकांक्षा को पूर्ण कर विधिपूर्वक श्राद्ध संपन्न कर उन्हें परम तृप्ति प्रदान की, और परिणामस्वरूप पितरों के आशीर्वाद से अकूत ऐश्वर्य, धर्म और अंततः मोक्ष प्राप्त किया।

पौराणिक कथामहाराज पुरुरवाचन्द्रवंशी सम्राट
प्र

पितृ देवताओं ने महर्षि निमि से क्या कहा?

पितृ देवताओं ने महर्षि निमि से कहा कि उनका मृत पुत्र की आत्मा को लक्ष्य करके किया गया ब्राह्मण भोजन साक्षात् पितृ यज्ञ के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ है, और उनके इस कृत्य से उनका पुत्र अब पितृ देवों के मध्य उच्च और शांत स्थान प्राप्त कर चुका है। इस आश्वासन से निमि का शोक दूर हुआ।

पौराणिक कथापितृ देवता संदेशपितृ यज्ञ
प्र

महर्षि निमि ने पुत्र की मृत्यु पर क्या किया?

महर्षि निमि ने अशांत मन से श्रेष्ठ ब्राह्मणों को अपने आश्रम में आमंत्रित कर वे सभी सात्त्विक और स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जो उनके मृत पुत्र को अत्यंत प्रिय थे। पितृ देवताओं ने प्रकट होकर बताया कि यह भोजन साक्षात् पितृ यज्ञ के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ है। इसी कार्य से श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ हुआ।

पौराणिक कथानिमि कार्यब्राह्मण भोजन
प्र

महर्षि निमि का पुत्र क्यों मरा?

महर्षि निमि का अत्यंत आज्ञाकारी और तपस्वी पुत्र कठोर तपस्या के दौरान अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ। दुर्भाग्यवश तपस्या के दौरान उसकी असमय मृत्यु हुई। इस अकाल मृत्यु से महर्षि निमि का हृदय विदीर्ण हो गया, और वे गहन शोक में डूब गए। इसी शोक से उन्होंने श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ किया।

पौराणिक कथानिमि पुत्र मृत्युअकाल मृत्यु
प्र

महर्षि निमि कौन थे?

महर्षि निमि एक महान ऋषि थे, जो ब्रह्मा जी के मानस पुत्र महर्षि अत्रि के वंश में हुए थे। उनके पुत्र की अकाल मृत्यु से उत्पन्न शोक के कारण उन्होंने ब्राह्मणों को सात्त्विक भोजन कराया, जिससे श्राद्ध की लौकिक परम्परा का आरंभ हुआ। वराह पुराण में उनकी कथा का वर्णन है।

पौराणिक कथामहर्षि निमिअत्रि वंश
प्र

कुशा घास कैसे उत्पन्न हुई?

कुशा घास भगवान वराह के दिव्य रोमों से उत्पन्न हुई। जब भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, उसके बाद उनके दिव्य रोमों से पवित्र कुशा घास का प्रादुर्भाव हुआ। इसीलिए श्राद्ध में कुशा अत्यंत पवित्र मानी जाती है, क्योंकि यह साक्षात् नारायण के शरीर से उत्पन्न हुई है।

पौराणिक कथाकुशा उत्पत्तिवराह दिव्य रोम
प्र

काले तिल की उत्पत्ति कैसे हुई?

काले तिल की उत्पत्ति भगवान वराह के शरीर से उत्पन्न पसीने की बूंदों से हुई। जब भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, तब उनके पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं, और उनसे काले तिल उत्पन्न हुए। इसीलिए श्राद्ध में काले तिल अत्यंत पवित्र और अनिवार्य माने जाते हैं।

पौराणिक कथाकाले तिल उत्पत्तिवराह पसीना
प्र

पहला पिण्ड किस मिट्टी से बना?

पहला पिण्ड भगवान वराह की दाढ़ से दक्षिण दिशा की ओर गिरे पृथ्वी के मृदा अंश अर्थात् मिट्टी से बना था। यह वह मृदा थी जिसे भगवान ने हिरण्याक्ष का वध करके रसातल से बाहर निकाला था। इससे तीन गोलाकार पिण्ड बने, जो पिता, पितामह और प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक हैं।

पौराणिक कथापहला पिण्डमृदा अंश
प्र

भगवान वराह ने पिण्डदान कब शुरू किया?

भगवान वराह ने पिण्डदान तब शुरू किया जब उन्होंने हिरण्याक्ष नामक महादैत्य का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला। उनकी दाढ़ से दक्षिण दिशा की ओर गिरे मृदा अंश से तीन पिण्ड बनाकर, कुशा के ऊपर स्थापित कर, उन्हें पिता, पितामह और प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक घोषित किया। यह सम्पूर्ण जगत में पिण्डदान की पवित्र परम्परा का आरंभ था।

पौराणिक कथावराह अवतारहिरण्याक्ष वध
प्र

पिण्डदान की शुरुआत किसने की?

पिण्डदान की शुरुआत स्वयं भगवान विष्णु के वराह अवतार ने की थी। जब उन्होंने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, तब उनकी दाढ़ से गिरे मृदा अंश से तीन पिण्डों का निर्माण कर, कुशा पर दक्षिण दिशा में स्थापित किया, और उन्हें पिता, पितामह तथा प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक घोषित किया।

पौराणिक कथापिण्डदान शुरुआतभगवान वराह
प्र

माता पार्वती के श्राप से लंगड़ा बालक कैसे ठीक हुआ?

नाग कन्याओं के बताने पर उस बालक ने लगातार 21 'संकष्टी चतुर्थी' का अत्यंत कठोर व्रत किया, जिससे भगवान गणेश ने खुश होकर उसे पूरी तरह से ठीक कर दिया।

पौराणिक कथाविकट संकष्टीश्राप मुक्ति
प्र

शिव-पार्वती के चौसर (पांसे) की कहानी?

चौसर के खेल में एक बालक ने माता पार्वती के जीतने पर भी पक्षपात करते हुए शिव जी को जीता हुआ बता दिया, जिस पर गुस्सा होकर माता ने उसे लंगड़ा होने का श्राप दे दिया।

पौराणिक कथाचौसरशिव पार्वती
प्र

देवराज इंद्र का विमान क्यों गिर गया था?

गणेश पुराण के अनुसार, एक अत्यंत महापापी मनुष्य की बुरी नज़र (दृष्टि-दोष) पड़ने के कारण इंद्र के विमान का सारा पुण्य नष्ट हो गया और वह ज़मीन पर गिर पड़ा।

पौराणिक कथाइंद्र विमानगणेश पुराण
प्र

हनुमान जी ने संकष्टी व्रत क्यों किया था?

माता सीता की खोज के दौरान सौ योजन के विशाल समुद्र को लांघने के लिए वृद्ध संपाती के कहने पर हनुमान जी ने यह संकटमोचक व्रत किया था।

पौराणिक कथाहनुमान जीरामायण
प्र

भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को इस व्रत से क्या फायदा हुआ था?

भगवान कृष्ण के बेटे साम्ब को एक ऋषि के श्राप के कारण 'कुष्ठ रोग' (कोढ़) हो गया था। रथ सप्तमी के दिन सूर्य की विशेष पूजा करने से उसका यह रोग पूरी तरह ठीक हो गया था।

पौराणिक कथासाम्बकुष्ठ रोग
प्र

इन्दुमती की कथा क्या है और उसने यह व्रत क्यों किया?

भविष्य पुराण के अनुसार, इन्दुमती एक वेश्या थी जिसने जिंदगी में कभी पूजा-पाठ नहीं किया था। बुढ़ापे में मृत्यु के डर से उसने यह व्रत किया, जिसके पुण्य से उसे मोक्ष और 'सूर्य-लोक' मिला।

पौराणिक कथाइन्दुमतीभविष्य पुराण
प्र

महाभारत में पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत क्यों किया था?

वनवास की कठिनाइयां दूर करने और अपना खोया हुआ राज्य वापस पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने 14 साल तक यह व्रत किया था।

पौराणिक कथापांडवश्रीकृष्ण
प्र

कौण्डिन्य ऋषि द्वारा अनंत सूत्र (धागा) जलाने का क्या परिणाम हुआ था?

धागा जलाने से भगवान विष्णु का अपमान हुआ, जिससे ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई और वे एकदम गरीब हो गए। भूल सुधारने के लिए उन्हें 14 साल तक यह व्रत करना पड़ा।

पौराणिक कथाअपमानदरिद्रता
प्र

सुशीला और कौण्डिन्य ऋषि की अनंत चतुर्दशी कथा क्या है?

ब्राह्मण की पुत्री सुशीला ने शादी के बाद यमुना तट पर यह व्रत किया था, जिसके चमत्कार से उसके पति कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम अपार धन-संपत्ति और वैभव से भर गया था।

पौराणिक कथासुशीलाकौण्डिन्य ऋषि
प्र

माता मनसा को भगवान शिव की पुत्री और वासुकि नाग की बहन क्यों कहा जाता है?

चूंकि वे भगवान शिव के तेज से सजीव हुई थीं, इसलिए शिव ने उन्हें अपनी 'मानस पुत्री' माना। साथ ही, नागराज वासुकि के परिवार से जुड़े होने के कारण वे उनकी बहन कहलाईं।

पौराणिक कथाशिव की मानस पुत्रीनागराज वासुकि
प्र

मनसा देवी कौन हैं और उनका जन्म कैसे हुआ?

देवी मनसा महर्षि कश्यप के 'मन' (संकल्प शक्ति) से उत्पन्न हुई थीं। एक अन्य कथा के अनुसार, नागराज वासुकि की माता द्वारा बनाई मूर्ति में भगवान शिव के तेज से उनका जन्म हुआ था।

पौराणिक कथामनसा देवी का जन्ममहर्षि कश्यप
प्र

एकादशी माता की उत्पत्ति कैसे हुई (मुर दैत्य की कथा)?

देवताओं को परेशान करने वाले 'मुर' दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के मन (ग्यारहवीं इंद्रिय) से एक शक्ति प्रकट हुई थी, जिसे भगवान ने 'एकादशी' नाम दिया।

पौराणिक कथाएकादशी उत्पत्तिमुर दैत्य
प्र

भगवान विष्णु 4 महीने पाताल लोक में क्यों रहते हैं (राजा बलि की कथा)?

वामन अवतार के समय राजा बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान दिया था कि वे 4 महीने (चातुर्मास) पाताल लोक में उसके महल के पहरेदार बनकर रहेंगे।

पौराणिक कथाराजा बलिपाताल लोक
प्र

समुद्र मंथन और मोहिनी अवतार की कथा क्या है?

समुद्र मंथन से निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया था। तब भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' नाम की अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण कर असुरों को भ्रमित किया और सारा अमृत देवताओं को पिला दिया।

पौराणिक कथासमुद्र मंथनमोहिनी अवतार
प्र

एकादशी के दिन अनाज क्यों नहीं खाते?

पुराणों के अनुसार, एकादशी के दिन 'पाप पुरुष' अनाज में छुपकर बैठता है। इसलिए इस दिन अनाज खाने वाला व्यक्ति असल में पाप खाता है।

पौराणिक कथाअन्न निषेधपाप पुरुष
प्र

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?

भूख बर्दाश्त न कर पाने के कारण भीमसेन साल भर के व्रत नहीं कर सकते थे। महर्षि व्यास के कहने पर उन्होंने सिर्फ इस एक दिन बिना पानी पिए कठिन व्रत किया था, इसलिए इसे 'भीमसेनी एकादशी' कहते हैं।

पौराणिक कथाभीमसेनी एकादशीपाण्डव एकादशी
प्र

एकादशी के दिन अन्न (अनाज) क्यों नहीं खाते?

पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी के दिन 'पापपुरुष' (पापों का पुतला) अनाज में छुपकर बैठता है। इसलिए जो भी इंसान एकादशी के दिन अनाज खाता है, वह असल में पापों को खाता है।

पौराणिक कथाअन्न निषेधपापपुरुष
प्र

एकादशी माता की उत्पत्ति कैसे हुई और इस दिन अनाज क्यों नहीं खाते (पाप पुरुष की कथा)?

भगवान विष्णु ने नरक में जीवों का कष्ट दूर करने के लिए एकादशी देवी को प्रकट किया था। एकादशी के दिन 'पाप पुरुष' अनाज में छुपकर बैठता है, इसलिए इस दिन अनाज खाना पाप है।

पौराणिक कथाएकादशी उत्पत्तिपाप पुरुष
प्र

कालभैरव पर लगा 'ब्रह्महत्या' का पाप कैसे दूर हुआ?

ब्रह्मा जी का सिर काटने के कारण कालभैरव पर ब्रह्महत्या का पाप लगा था। जब वे भिक्षाटन करते हुए काशी (वाराणसी) पहुंचे, तब वहां की पवित्र भूमि पर पैर रखते ही वे इस पाप से मुक्त हुए।

पौराणिक कथाब्रह्महत्याकपालमोचन
प्र

भगवान कालभैरव की उत्पत्ति कैसे हुई? (ब्रह्मा के अहंकार की कथा)

शिवपुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने अहंकारवश भगवान शिव की निंदा की, तब शिव जी के क्रोध से कालभैरव की उत्पत्ति हुई थी।

पौराणिक कथाकालभैरव उत्पत्तिशिवपुराण
प्र

भगवान राम की 'अकाल बोधन' दुर्गा पूजा क्या है?

भगवान राम ने रावण को मारने के लिए असमय (अकाल) दुर्गा पूजा की थी और 108 कमल चढ़ाए थे। एक कमल कम पड़ने पर जब राम ने अपनी आँख निकालनी चाही, तो माता ने प्रकट होकर विजय का आशीर्वाद दिया था।

पौराणिक कथाअकाल बोधनभगवान राम
प्र

दुर्गाष्टमी पर रक्तबीज और चंड-मुंड वध की कथा क्या है?

दुर्गा सप्तशती के अनुसार, अष्टमी के दिन ही माता ने अपने रौद्र रूप (चामुंडा/कालरात्रि) में चंड-मुंड और 'रक्तबीज' नामक राक्षसों का वध किया था और रक्तबीज का सारा खून पी लिया था।

पौराणिक कथादुर्गा सप्तशतीरक्तबीज
प्र

माता का नाम 'दुर्गा' कैसे पड़ा? (देवी भागवत पुराण की कथा)

देवी भागवत पुराण के अनुसार, आदिशक्ति माता ने 'दुर्गम' (दुर्गमासुर) नामक एक अत्यंत भयंकर असुर का वध किया था। दुर्गम का वध करने के कारण ही उनका नाम 'दुर्गा' पड़ गया।

पौराणिक कथादुर्गा नामकरणदुर्गम वध
प्र

मासिक दुर्गाष्टमी पर दुर्गमासुर वध की कथा क्या है?

'दुर्गमासुर' नामक दैत्य ने वेदों को चुराकर धरती पर 100 साल का सूखा ला दिया था। तब माता ने प्रकट होकर उसका वध किया और धरती को बचाया। यह वध अष्टमी के दिन ही हुआ था।

पौराणिक कथादुर्गमासुरदेवी भागवत
प्र

शांडिल्य ऋषि और राजकुमार धर्मगुप्त की कथा क्या है?

पौराणिक कथाराजकुमार धर्मगुप्तशांडिल्य ऋषि
प्र

भगवान शिव के 'तांडव नृत्य' और देवताओं के वादन का प्रदोष काल से क्या संबंध है?

पौराणिक कथातांडव नृत्यप्रसन्न मुद्रा
प्र

समुद्र मंथन में भगवान शिव के 'नीलकंठ' स्वरूप का प्रदोष व्रत से क्या संबंध है?

पौराणिक कथासमुद्र मंथननीलकंठ
प्र

संतोषी माता किसकी पुत्री हैं?

लोक मान्यताओं और फिल्म 'जय संतोषी मां' के अनुसार माता संतोषी भगवान गणेश और उनकी पत्नियों (रिद्धि-सिद्धि) की पुत्री हैं। वे विघ्नहर्ता और समृद्धि (रिद्धि-सिद्धि) का परिणाम 'संतोष' हैं।

पौराणिक कथाएँगणेश की पुत्रीरिद्धि सिद्धि
प्र

राजा विदुर के पुत्र की कथा कुक्कुटेश्वर लिंग और पशुत्व से मुक्ति से कैसे जुड़ी है?

राजकुमार को मुर्गों के राजा ने पक्षी बनने का शाप दिया था, जिससे मुक्ति उसे कुक्कुटेश्वर लिंग की पूजा से मिली। यह लिंग मनुष्य के भीतर के पशुत्व और तामसिक वृत्तियों को नष्ट कर उसे शिव-चेतना प्रदान करता है।

पौराणिक कथाएँराजा विदुर पुत्रपशुत्व मुक्ति
प्र

भगवान शिव ने अपने गणों को काशी क्यों भेजा था?

राजा दिवोदास के निष्कंटक शासन में दोष निकालने और उन्हें काशी से विस्थापित करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को काशी भेजा था, ताकि शिव पुनः अपनी प्रिय नगरी लौट सकें।

पौराणिक कथाएँराजा दिवोदासशिवगणों का काशी आगमन
← पिछला3 / 8अगला →

सनातन दर्शन — प्रश्नोत्तर

सनातन दर्शन से सम्बन्धित 477+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप सनातन दर्शन के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

अन्य विषय

🙏
पूजा विधि
24 विषय
📿
मंत्र जाप विधि
56 विषय
🔱
शिव पूजा
43 विषय
🔮
तंत्र साधना
42 विषय
🏠
वास्तु शास्त्र
12 विषय
💭
सपनों का मतलब
3 विषय
🪐
ज्योतिष उपाय
23 विषय
🙏
व्रत उपवास विधि
8 विषय
🔥
देवी पूजा
46 विषय
🧘
ध्यान साधना
14 विषय
🛕
तीर्थ यात्रा
25 विषय
🔥
हवन यज्ञ विधि
10 विषय
📜
स्तोत्र पाठ
20 विषय
🐘
गणेश पूजा
8 विषय
🙏
विष्णु भक्ति
13 विषय
🕯️
श्राद्ध पितृ कर्म
8 विषय
📋 सभी प्रश्नोत्तर🌅 आज का पंचांग राशिफल🎊 त्योहार