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दिव्यास्त्र शस्त्र

दिव्यास्त्र क्या हैं, ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र, सुदर्शन चक्र — पौराणिक अस्त्र-शस्त्र के प्रश्नोत्तर।

497प्रश्नोत्तर
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यमराज ने कालदण्ड का प्रयोग रावण पर क्यों नहीं किया?

ब्रह्मा जी ने हस्तक्षेप किया क्योंकि रावण को वरदान था कि वह मनुष्य के हाथों मरेगा, देवता के नहीं। साथ ही कालदण्ड से समस्त सृष्टि नष्ट हो सकती थी।

दिव्यास्त्रकालदण्डयमराज
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अर्जुन को गरुडास्त्र कैसे मिला?

अर्जुन को गरुडास्त्र उनके पिता देवराज इंद्र द्वारा देवलोक प्रवास के दौरान दिए गए संपूर्ण दिव्य शस्त्रागार के हिस्से के रूप में मिला था।

दिव्यास्त्रअर्जुनगरुडास्त्र
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दिव्यास्त्र प्राप्त करने के क्या तरीके थे?

दिव्यास्त्र तीन तरीकों से मिलते थे — देवताओं की कठोर तपस्या, देवताओं से सीधा वरदान, या द्रोणाचार्य जैसे गुरु से शिक्षा।

दिव्यास्त्रदिव्यास्त्रप्राप्ति
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गरुडास्त्र का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?

गरुडास्त्र अंधकार पर प्रकाश की, अराजकता पर व्यवस्था की और विषैली शक्तियों पर दैवीय शक्ति की विजय का प्रतीक है।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रप्रतीक
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गरुडास्त्र के प्रयोग से युद्ध में क्या होता है?

गरुडास्त्र के प्रयोग से युद्ध के मैदान पर असंख्य दिव्य गरुड़ प्रकट होते हैं जो आकाश से उतरकर शत्रु पर टूट पड़ते हैं और सर्प-आधारित अस्त्रों को नष्ट करते हैं।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रयुद्ध
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गरुडास्त्र का प्रयोग किस अस्त्र के विरुद्ध होता है?

गरुडास्त्र का प्रयोग मुख्यतः नागास्त्र और नागपाश के विरुद्ध होता है। यह सर्प-आधारित सभी अस्त्रों का अचूक प्रतिकार है।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रनागास्त्र
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इंद्र ने गरुड़ को क्या वरदान दिया?

इंद्र ने गरुड़ को वरदान दिया कि सभी नाग उनका प्राकृतिक भोजन होंगे, जिससे गरुड़ और नागों की शाश्वत शत्रुता पर दैवीय मुहर लग गई।

दिव्यास्त्रइंद्रगरुड़
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भगवान विष्णु ने गरुड़ को क्या वरदान दिया?

भगवान विष्णु ने गरुड़ को अमरता का वरदान दिया और उन्हें अपना दिव्य वाहन बनाया।

दिव्यास्त्रविष्णुगरुड़
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गरुड़ ने अपनी माता को दासता से मुक्त कराने के लिए क्या किया?

गरुड़ ने देवताओं से युद्ध करके, इंद्र को परास्त करके स्वर्ग से अमृत कलश प्राप्त किया और नागों को देकर अपनी माता विनता को दासता से मुक्त कराया।

दिव्यास्त्रगरुड़विनता
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गरुड़ का जन्म कैसे हुआ?

गरुड़ का जन्म विनता के दूसरे अंडे से हुआ। उनका तेज इतना प्रखर था कि देवता भी भयभीत हो गए। वे नाग सौतेले भाइयों के बीच दास के रूप में बड़े हुए।

दिव्यास्त्रगरुड़जन्म
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कद्रू ने शर्त जीतने के लिए क्या चाल चली?

कद्रू ने अपने नाग पुत्रों को दिव्य अश्व उच्चैःश्रवा की पूंछ से लिपटने का आदेश दिया जिससे वह काली दिखे और विनता शर्त हार गईं।

दिव्यास्त्रकद्रूछल
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विनता और कद्रू के बीच क्या शर्त लगी थी?

दोनों बहनों के बीच दिव्य अश्व उच्चैःश्रवा की पूंछ के रंग को लेकर शर्त लगी। हारने वाली को जीवन भर दूसरे की दासी बनना था। कद्रू ने छल से शर्त जीती और विनता उनकी दासी बन गईं।

दिव्यास्त्रविनताकद्रू
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विनता और कद्रू कौन थीं?

विनता और कद्रू महर्षि कश्यप की दो पत्नियाँ और बहनें थीं। विनता पक्षियों की माता थीं और कद्रू एक हजार नागों की माता थीं।

दिव्यास्त्रविनताकद्रू
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गरुडास्त्र की उत्पत्ति कैसे हुई?

गरुडास्त्र की उत्पत्ति गरुड़ और नागों के शाश्वत संघर्ष की पौराणिक कथा से हुई है, जिसमें गरुड़ ने अपनी माता विनता को दासता से मुक्त कराने के लिए नागों पर विजय प्राप्त की।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रउत्पत्ति
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दिव्यास्त्र क्या होते हैं?

दिव्यास्त्र वे शक्तिशाली हथियार थे जिन्हें मंत्रों की शक्ति से जागृत किया जाता था। ये देवताओं की शक्ति के मूर्त रूप थे और ब्रह्मांड की रक्षा के लिए बनाए गए थे।

दिव्यास्त्रदिव्यास्त्रपौराणिक शस्त्र
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गरुडास्त्र क्या है?

गरुडास्त्र एक विशेषज्ञ, सामरिक और रक्षात्मक दिव्य हथियार है जो सर्प-आधारित अस्त्रों का अचूक प्रतिकार है और अराजकता पर दिव्य व्यवस्था की विजय का प्रतीक है।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रदिव्यास्त्र
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गरुडास्त्र और ब्रह्मास्त्र में क्या फर्क है?

ब्रह्मास्त्र सर्वनाशक है जो पूरे लोकों को भस्म कर सकता है, जबकि गरुडास्त्र एक विशेषज्ञ, सामरिक और रक्षात्मक हथियार है जो सर्प-अस्त्रों का प्रतिकार करता है।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रब्रह्मास्त्र
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गरुडास्त्र की स्थायी विरासत क्या है?

गरुडास्त्र की विरासत यह है कि हर विनाशकारी शक्ति का एक दिव्य प्रतिकार होता है और सबसे अंधकारमय संकट में भी दिव्य व्यवस्था संतुलन खोज लेती है।

दिव्यास्त्रगरुडास्त्रविरासत
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कौटिल्य के अर्थशास्त्र में गरुडास्त्र का क्या उल्लेख है?

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में गरुडास्त्र का उल्लेख एक परिष्कृत सैन्य रणनीति के उदाहरण के रूप में किया गया है।

दिव्यास्त्रकौटिल्यअर्थशास्त्र
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महाभारत में गरुडास्त्र का उल्लेख कहाँ मिलता है?

महाभारत में अर्जुन के शस्त्रागार में गरुडास्त्र था। त्रिगर्त राजा सुशर्मा के विरुद्ध युद्ध में नागास्त्र और सौपर्णास्त्र दोनों का उल्लेख मिलता है।

दिव्यास्त्रमहाभारतगरुडास्त्र
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नागपाश से राम और लक्ष्मण को कैसे मुक्ति मिली?

हनुमान की प्रार्थना पर गरुड़ प्रकट हुए। गरुड़ को देखते ही नागपाश के सर्प भयभीत होकर भाग गए और गरुड़ ने राम-लक्ष्मण के घाव ठीक करके उनकी शक्ति पुनर्स्थापित की।

दिव्यास्त्रनागपाशराम
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इंद्रजीत ने राम और लक्ष्मण पर कौन सा अस्त्र चलाया था?

इंद्रजीत ने राम और लक्ष्मण पर नागपाश चलाया, जिसने उन्हें विषैले सर्पों के जीवंत बंधन में जकड़ लिया और वे अचेत हो गए।

दिव्यास्त्रइंद्रजीतमेघनाद
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रामायण में गरुडास्त्र का उपयोग कब हुआ?

रामायण में लंका युद्ध के दौरान इंद्रजीत के नागपाश से राम-लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए गरुडास्त्र का उपयोग हुआ।

दिव्यास्त्ररामायणगरुडास्त्र
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भगवान राम को गरुडास्त्र कैसे प्राप्त था?

भगवान राम विष्णु के अवतार थे और गरुड़ विष्णु के दिव्य वाहन हैं, इसलिए गरुड़ की शक्ति राम के लिए स्वाभाविक रूप से सुलभ थी।

दिव्यास्त्ररामगरुडास्त्र
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विश्वामित्र ने राम को कौन से अस्त्र दिए थे?

विश्वामित्र ने राम को बला-अतिबला विद्या, 5 चक्र, वज्रास्त्र, शिव शूल, ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, 3 पाश, आग्नेय, वायव्य सहित 80+ दिव्यास्त्र दिए। इनमें से अधिकांश लक्ष्मण को भी मिले।

अस्त्र शस्त्रविश्वामित्रराम अस्त्र
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विजय धनुष कर्ण को किसने दिया था?

विजय धनुष परशुराम ने कर्ण को दिया था — शाप के बाद दया में। आशीर्वाद था कि जब तक यह हाथ में रहे, कोई नहीं जीत सकता। इसीलिए कर्ण के हाथ से विजय छूटने पर ही उसका वध संभव हुआ।

अस्त्र शस्त्रविजय धनुषपरशुराम
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तपस्या करने से कौन से अस्त्र मिलते थे?

शिव तपस्या से पाशुपतास्त्र, विष्णु उपासना से नारायणास्त्र, इंद्र की कृपा से वज्रास्त्र-इंद्रास्त्र-सम्मोहनास्त्र। यम-वरुण-कुबेर से भी अस्त्र मिले। तपस्या में परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती थी।

अस्त्र शस्त्रतपस्या अस्त्रअर्जुन तपस्या
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कर्ण के धनुष का नाम क्या था?

कर्ण के धनुष का नाम 'विजय' था जिसे परशुराम ने उसे दिया था। यह अखंड था, पाशुपतास्त्र से भी इसका घेरा नहीं टूटता था। यह धनुष न होने पर ही कर्ण का वध हो सका।

अस्त्र शस्त्रविजय धनुषकर्ण
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पिनाक धनुष राम ने कैसे तोड़ा?

विश्वामित्र की आज्ञा पर राम शांत भाव से पिनाक के पास गए, उसे प्रणाम करके सहजता से उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष खींचते ही वह भयंकर गर्जना के साथ दो टुकड़ों में टूट गया।

अस्त्र शस्त्रपिनाकराम
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ब्रह्मशिरास्त्र किसने चलाया था?

ब्रह्मशिरास्त्र का प्रसिद्ध प्रयोग अश्वत्थामा ने किया था — अंत में उसने इसे उत्तरा के गर्भ पर छोड़ा जिससे परीक्षित की मृत्यु हुई। श्रीकृष्ण ने उन्हें पुनर्जीवित किया।

अस्त्र शस्त्रब्रह्मशिरास्त्रअश्वत्थामा
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क्या ब्रह्मास्त्र ही आधुनिक परमाणु बम है?

ब्रह्मास्त्र और परमाणु बम में कई समानताएं हैं — दोनों के प्रभाव से वर्षों तक पर्यावरण नष्ट होता है। ओपनहाइमर ने महाभारत का गहन अध्ययन किया था। परंतु दोनों की मूल प्रकृति अलग है।

अस्त्र शस्त्रब्रह्मास्त्र परमाणु बमओपनहाइमर
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कर्ण के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे?

कर्ण के पास विजय धनुष (परशुराम से), इंद्रास्त्र/अमोघास्त्र (इंद्र से — घटोत्कच पर चला), ब्रह्मास्त्र (भूल गया), नागास्त्र, भार्गवास्त्र, और जन्मजात अभेद्य कवच-कुंडल थे।

अस्त्र शस्त्रकर्णविजय धनुष
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महाभारत में ब्रह्मास्त्र कितनी बार चला था?

महाभारत में ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कम से कम 2-3 प्रमुख बार हुआ — द्रोण द्वारा, और सबसे प्रसिद्ध: अश्वत्थामा एवं अर्जुन ने एक साथ (सौप्तिकपर्व)। अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर मोड़ा था।

अस्त्र शस्त्रब्रह्मास्त्रमहाभारत प्रयोग
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दिव्यास्त्र कैसे प्राप्त होते थे पुराणों में?

दिव्यास्त्र तीन प्रकार से मिलते थे — (1) देव-तपस्या से वरदान (2) सिद्ध गुरु से शिक्षा (3) युद्ध में पराक्रम पर देव वरदान। पात्रता, पवित्रता और एकाग्रता आवश्यक थी।

अस्त्र शस्त्रदिव्यास्त्र प्राप्तितपस्या
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कर्ण का कवच-कुंडल क्या था?

कर्ण का कवच-कुंडल जन्म से ही शरीर पर था — सूर्यदेव का दिव्य वरदान। यह शरीर का अभिन्न अंग था, अभेद्य था, और कोई भी अस्त्र इसे नहीं भेद सकता था। जब तक था — कर्ण अजेय थे।

अस्त्र शस्त्रकवच कुंडलकर्ण
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रामायण में अग्नेयास्त्र का उपयोग कब हुआ?

रामायण में अग्नेयास्त्र का सबसे प्रसिद्ध प्रयोग बालकांड में हुआ जब राम ने विश्वामित्र के यज्ञ में विध्न डालने वाले सुबाहु राक्षस का इसी अस्त्र से वध किया था।

अस्त्र शस्त्रअग्नेयास्त्ररामायण
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अश्वत्थामा आज भी जीवित है क्या?

हाँ — शिव महापुराण के अनुसार अश्वत्थामा आज भी गंगा किनारे जीवित हैं। परंतु यह वरदान नहीं, कृष्ण का श्राप है — माथे के घाव के साथ अनंत काल भटकना, मृत्यु माँगने पर भी न मिलना।

अस्त्र शस्त्रअश्वत्थामा चिरंजीवीकृष्ण श्राप
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अग्नि पुराण में धनुर्वेद के कितने भाग बताए गए हैं?

अग्नि पुराण में धनुर्वेद के 4 भाग हैं — (1) अमुक्त (हाथ में पकड़े), (2) मुक्त (फेंके जाने वाले), (3) मुक्तामुक्त (दोनों प्रकार), (4) यंत्रमुक्त (यंत्र से फेंके)।

अस्त्र शस्त्रअग्नि पुराणधनुर्वेद
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गुरु द्रोण ने किन-किन को दिव्यास्त्र दिए थे?

द्रोण ने अर्जुन को ब्रह्मास्त्र + ब्रह्मशिरास्त्र (संहार सहित), अश्वत्थामा को ब्रह्मास्त्र + ब्रह्मशिरास्त्र + नारायणास्त्र (संहार विधि बिना), युधिष्ठिर को ब्रह्मास्त्र दिया।

अस्त्र शस्त्रद्रोण शिष्यअर्जुन
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कुरुक्षेत्र युद्ध में कौन-कौन से दिव्यास्त्र चले थे?

कुरुक्षेत्र में ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, पाशुपतास्त्र, वासवी शक्ति, अंजलिकास्त्र, इंद्रास्त्र, वायव्यास्त्र, आग्नेयास्त्र, वरुणास्त्र, वैष्णवास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र चले थे।

अस्त्र शस्त्रकुरुक्षेत्र दिव्यास्त्रब्रह्मास्त्र
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भीष्म की मृत्यु किस अस्त्र से हुई थी?

भीष्म की मृत्यु किसी दिव्यास्त्र से नहीं — अर्जुन के बाणों से हुई। शिखंडी को सामने कर अर्जुन ने बाण चलाए। इच्छामृत्यु के कारण 58 दिन शरशय्या पर रहने के बाद उत्तरायण में प्राण त्यागे।

अस्त्र शस्त्रभीष्म मृत्युशिखंडी
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घटोत्कच को कर्ण ने किस अस्त्र से मारा था?

कर्ण ने घटोत्कच को 'वासवी शक्ति' (अमोघशक्ति) से मारा — यह इंद्र का दिया अमोघ अस्त्र था जो एक बार चलने पर लक्ष्य को नष्ट करके इंद्र के पास लौटता था। कर्ण ने इसे अर्जुन के लिए बचाया था।

अस्त्र शस्त्रघटोत्कच वधवासवी शक्ति
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भीष्म पितामह के पास कौन से दिव्य अस्त्र थे?

भीष्म के पास ब्रह्मास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, समस्त देवास्त्र और 5 अभिमंत्रित स्वर्ण तीर थे। परशुराम से पूरी युद्धकला प्राप्त की थी — प्रस्वापनास्त्र एकमात्र ऐसा था जिसका उत्तर परशुराम के पास नहीं था।

अस्त्र शस्त्रभीष्मदिव्य अस्त्र
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घटोत्कच की माया शक्ति क्या थी?

घटोत्कच की माया शक्ति — रूप परिवर्तन, विशालकाय होना, अदृश्य होना, आकाश से प्रहार, माया-जाल से भ्रम फैलाना। रात्रि में शक्ति कई गुना बढ़ती थी — यह राक्षस कुल की विशेषता थी।

अस्त्र शस्त्रघटोत्कच मायाराक्षसी शक्ति
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वेदों में अस्त्र-शस्त्र का क्या वर्णन है?

वेदों में 18 युद्धकलाओं का मौलिक ज्ञान है। ऋग्वेद में देवताओं के अस्त्र-स्तुति, अथर्ववेद में अस्त्र-प्रयोग मंत्र। धनुर्वेद यजुर्वेद का उपवेद है जिसमें सम्पूर्ण युद्धकला है।

अस्त्र शस्त्रवेद अस्त्र18 युद्धकलाएं
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परशुराम के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?

परशुराम के पास परशु (फरसा), शार्ङ्ग धनुष (विष्णु का), विजय धनुष (इंद्र से), ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र और अनेक दिव्यास्त्र थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण को अस्त्र-शिक्षा दी।

अस्त्र शस्त्रपरशुराम अस्त्रविजय धनुष
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अस्त्र विद्या किससे सीखी जाती थी?

अस्त्र विद्या परशुराम (सर्वश्रेष्ठ गुरु), द्रोणाचार्य, शिव-इंद्र-यम जैसे देवताओं से सीखी जाती थी। गुरु पात्रता देखते थे — शारीरिक बल नहीं, मन-आत्मा की शुद्धि जरूरी थी।

अस्त्र शस्त्रअस्त्र विद्यागुरु परशुराम
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अश्वत्थामा के पास कौन से अस्त्र थे?

अश्वत्थामा के पास ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र (पिता द्रोण से) और जन्म से माथे में 'सिरोन रत्न' मणि थी जो सभी से रक्षा करती थी। यह मणि बाद में अर्जुन ने निकाल ली।

अस्त्र शस्त्रअश्वत्थामाब्रह्मशिरास्त्र
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परशुराम को फरसा शिव जी से कैसे मिला?

परशुराम ने कैलाश पर भगवान शिव की घोर तपस्या की। प्रसन्न शिव ने उन्हें दिव्य परशु (विद्युदभि फरसा) सहित अनेक अस्त्र दिए। इसी परशु के कारण 'राम' का नाम 'परशुराम' हो गया।

अस्त्र शस्त्रपरशुरामशिव तपस्या
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क्या चंद्रहास शिव जी की तलवार थी?

हाँ, चंद्रहास भगवान शिव की अर्धचंद्राकार दिव्य तलवार थी जो उन्होंने रावण को उसकी भक्ति पर दी थी। इसकी शक्ति वज्र के समान थी। जटायु पर प्रयोग के बाद यह शिव के पास वापस लौट गई।

अस्त्र शस्त्रचंद्रहासशिव तलवार
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चंद्रहास रावण को कैसे मिली थी?

रावण ने कैलाश उठाने की कोशिश की, हाथ दबने पर शिव तांडव स्त्रोत गाकर शिव को प्रसन्न किया। शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रहास तलवार दी — साथ में यह भी कहा कि दुरुपयोग करने पर यह वापस आ जाएगी।

अस्त्र शस्त्रचंद्रहासरावण
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अश्वत्थामा के माथे की मणि क्यों निकाली गई?

द्रौपदी के पाँचों पुत्रों और उत्तरा के गर्भ पर हमले की सजा के रूप में अर्जुन ने मणि निकाली और कृष्ण ने श्राप दिया — उस घाव के साथ अनंत काल भटकना। मणि द्रौपदी के सुझाव पर ली गई।

अस्त्र शस्त्रअश्वत्थामा मणिद्रौपदी
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प्रस्वापास्त्र क्या है जो भीष्म के पास था?

प्रस्वापनास्त्र शत्रु को गहरी नींद में डालने वाला दिव्यास्त्र था। भीष्म-परशुराम युद्ध में जब वसुओं ने भीष्म को इसका स्मरण कराया, परशुराम के पास इसका कोई उत्तर नहीं था — इसीलिए युद्ध बंद हुआ।

अस्त्र शस्त्रप्रस्वापनास्त्रभीष्म
प्र

गांडीव धनुष की विशेषता क्या थी?

गांडीव एक लाख धनुषों के बराबर था, 108 अकाट्य प्रत्यंचाएं थीं, एक साथ कई लक्ष्य भेद सकता था, और जो धारण करे उसमें दिव्य शक्ति आती थी। साथ में अक्षय तरकश था जिसमें बाण कभी खत्म नहीं होते।

अस्त्र शस्त्रगांडीव विशेषताअक्षय तरकश
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महाभारत में निरस्त्र योद्धा पर अस्त्र चलाना क्यों वर्जित था?

निरस्त्र पर वार धर्मयुद्ध की मर्यादा के विरुद्ध था — यह वीरता नहीं अधर्म था। कर्ण-अर्जुन प्रसंग में कृष्ण ने कहा — कर्ण ने स्वयं अभिमन्यु वध में यह नियम तोड़ा था, इसीलिए यह उसका परिणाम है।

अस्त्र शस्त्रनिरस्त्र योद्धायुद्ध धर्म
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रामायण में राम के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे?

विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को 50+ दिव्यास्त्र दिए — 5 चक्र, ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, वज्रास्त्र, 3 पाश, आग्नेय, वायव्य सहित। रावण वध के लिए अगस्त्य मुनि ने ब्रह्मास्त्र दिया।

अस्त्र शस्त्रराम अस्त्रविश्वामित्र
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अर्जुन ने स्वर्ग जाकर इंद्र से कौन से अस्त्र सीखे?

अर्जुन ने स्वर्ग में इंद्र से वज्रास्त्र, सम्मोहनास्त्र, इंद्रास्त्र, निवातकवच युद्ध में रुद्रास्त्र (3 करोड़ असुर वध) सीखे। यम-वरुण-कुबेर से भी अस्त्र प्राप्त किए। एक वर्ष अमरावती में रहे।

अस्त्र शस्त्रअर्जुन स्वर्गइंद्र अस्त्र
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नारायणास्त्र महाभारत में किसने चलाया था?

नारायणास्त्र महाभारत में अश्वत्थामा ने चलाया था — पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का बदला लेने के लिए। द्रोण ने यह अस्त्र भगवान नारायण की उपासना से प्राप्त किया और अश्वत्थामा को दिया था।

अस्त्र शस्त्रनारायणास्त्रअश्वत्थामा
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राम को कोदंड धनुष कैसे मिला?

एक मत के अनुसार राम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य वन में स्वयं कोदंड का निर्माण किया था। जनक के स्वयंवर में तोड़ा गया 'पिनाक' और परशुराम का 'शार्ङ्ग' — दोनों कोदंड से अलग थे।

अस्त्र शस्त्रकोदंडदंडकारण्य
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कुरुक्षेत्र युद्ध में 18 दिन कौन-कौन से अस्त्र प्रमुख रहे?

14वाँ दिन सर्वाधिक दिव्यास्त्रों वाला था — पाशुपतास्त्र, नारायणास्त्र, वासवी शक्ति। 17वें दिन अंजलिकास्त्र से कर्ण वध। सौप्तिकपर्व में ब्रह्मास्त्र/ब्रह्मशिरास्त्र का प्रयोग।

अस्त्र शस्त्र18 दिन अस्त्रकुरुक्षेत्र
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दिव्यास्त्र शस्त्र — प्रश्नोत्तर

दिव्यास्त्र शस्त्र से सम्बन्धित 497+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप दिव्यास्त्र शस्त्र के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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