रामचरितमानस — बालकाण्डमाता कौशल्या ने चतुर्भुज रूप देखकर क्या प्रार्थना की?'तजहु तात यह रूपा। कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला' — विष्णु रूप छोड़कर बालक बनो, यह सुख अनुपम है। भगवान ने बालक रूप धरकर रोना शुरू किया।#बालकाण्ड#कौशल्या प्रार्थना#बाललीला
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी ने जन्म लेते समय कौन सा रूप दिखाया?पहले चतुर्भुज विष्णु रूप दिखाया। माता कौशल्या ने कहा — 'यह रूप छोड़कर बाललीला करो।' भगवान बालक रूप होकर रोने लगे। 'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।'#बालकाण्ड#चतुर्भुज रूप#राम प्राकट्य
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी के जन्म के समय कौन सा नक्षत्र/मुहूर्त था?अभिजित् मुहूर्त — भगवान का प्रिय, दिन का सबसे शुभ मुहूर्त, मध्याह्न (दोपहर) के समय। 'सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता' — न सर्दी न गर्मी, सब लोकों को शान्ति देने वाला पवित्र काल।#बालकाण्ड#अभिजित मुहूर्त#राम जन्म
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी का जन्म किस मास, पक्ष और तिथि को हुआ?चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि (रामनवमी), अभिजित् मुहूर्त, मध्य दिवस। योग, लग्न, ग्रह, वार, तिथि सब अनुकूल।#बालकाण्ड#राम जन्म तिथि#चैत्र नवमी
रामचरितमानस — बालकाण्डपुत्रेष्टि यज्ञ कौन से ऋषि ने करवाया?श्रृंगी (ऋष्यशृंग) ऋषि ने — गुरु वसिष्ठजी की सलाह पर। श्रृंगी ऋषि विभाण्डक ऋषि के पुत्र और अत्यन्त तपस्वी थे। उन्होंने विधिपूर्वक यज्ञ किया और अग्नि से दिव्य पायस प्रकट हुआ।#बालकाण्ड#श्रृंगी ऋषि#पुत्रेष्टि
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिये कौन सा यज्ञ करवाया?पुत्रेष्टि यज्ञ — गुरु वसिष्ठजी की सलाह पर श्रृंगी ऋषि से करवाया। यज्ञ अग्नि से दिव्य पायस प्रकट हुआ, तीनों रानियों में बाँटा, तीनों गर्भवती हुईं।#बालकाण्ड#पुत्रेष्टि यज्ञ#दशरथ
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा दशरथ की तीन रानियों के नाम क्या थे?कौशल्या (राम की माता), सुमित्रा (लक्ष्मण-शत्रुघ्न की माता), कैकेयी (भरत की माता)। तीनों पवित्र आचरणवाली, पति अनुकूल और हरि-भक्त थीं।#बालकाण्ड#कौशल्या#सुमित्रा
रामचरितमानस — बालकाण्डअयोध्या में कौन से राजा राज करते थे जब भगवान ने अवतार लिया?रघुकुलशिरोमणि राजा दशरथ — वेदों में विख्यात नाम, धर्मधुरन्धर, गुणनिधि, ज्ञानी, भगवान के भक्त।#बालकाण्ड#दशरथ#अयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान विष्णु ने देवताओं को क्या आश्वासन दिया?भगवान ने आकाशवाणी से कहा — अयोध्या में दशरथ के घर अवतार लूँगा। ब्रह्माजी ने देवताओं को सिखाया — वानर शरीर धरकर पृथ्वी पर भगवान की सेवा करो। देवता वानर रूप में पृथ्वी पर आ गये।#बालकाण्ड#आकाशवाणी#अवतार आश्वासन
रामचरितमानस — बालकाण्डपृथ्वी ने गऊ (गाय) का रूप क्यों धारण किया?रावण के अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी ने गऊ रूप धारण करके देवताओं-मुनियों के सामने दुख प्रकट किया। गाय करुणा और असहायता का प्रतीक है। देवताओं ने ब्रह्माजी के साथ भगवान से अवतार की प्रार्थना की।#बालकाण्ड#पृथ्वी#गऊ रूप
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण के अत्याचार से पीड़ित होकर पृथ्वी ने किसके पास फरियाद की?पृथ्वी ने गऊ (गाय) रूप धारण करके मुनियों-देवताओं के पास फरियाद की। सब ब्रह्माजी के पास गये। शिवजी ने कहा — भगवान प्रेम से प्रकट होते हैं। ब्रह्माजी ने स्तुति की और भगवान ने आकाशवाणी से अयोध्या में अवतार का आश्वासन दिया।#बालकाण्ड#पृथ्वी पुकार#गऊ रूप
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण ने तीनों लोकों में किस प्रकार का अत्याचार किया?रावण ने — (1) देवताओं को पराजित किया, स्वर्ग में भगदड़ मचाई, (2) कुबेर से लंका-पुष्पक विमान छीना, (3) ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी को कष्ट दिया, (4) यज्ञ बन्द करवाये, (5) संतों-मुनियों को सताया। पुत्र मेघनाद (इन्द्रजीत) अजेय योद्धा था।#बालकाण्ड#रावण अत्याचार#देवता
रामचरितमानस — बालकाण्डविभीषण ने ब्रह्माजी से क्या वरदान माँगा?विभीषण ने भगवान के चरणकमलों में निर्मल अनुराग (भक्ति) माँगा — 'तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु।' तीनों भाइयों में सबसे श्रेष्ठ वरदान — इसी कारण विभीषण धर्मात्मा बने और रामजी की शरण पाई।#बालकाण्ड#विभीषण#भगवान भक्ति
रामचरितमानस — बालकाण्डकुम्भकर्ण ने ब्रह्माजी से क्या वरदान माँगा?छः महीनों की नींद — पर यह उसकी अपनी इच्छा नहीं थी। ब्रह्माजी ने सोचा यदि यह रोज़ खायगा तो संसार उजड़ जायगा — इसलिये सरस्वती से प्रेरणा करके बुद्धि फेर दी और कुम्भकर्ण ने नींद माँग ली।#बालकाण्ड#कुम्भकर्ण#नींद
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण ने ब्रह्माजी से क्या वरदान माँगा?रावण ने माँगा — वानर और मनुष्य को छोड़कर किसी के मारे न मरूँ। उसने इन दोनों को तुच्छ समझा। यही भूल उसके अन्त का कारण बनी — भगवान ने मनुष्य रूप में अवतार लिया और वानर सेना से रावण का वध किया।#बालकाण्ड#रावण वरदान#अमरत्व
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण ने किस देवता की तपस्या करके वरदान प्राप्त किया?ब्रह्माजी की तपस्या करके वरदान प्राप्त किया। रावण ने माँगा — 'बानर मनुज जाति दुइ बारें' — वानर और मनुष्य को छोड़कर किसी के मारे न मरूँ। वानर-मनुष्य को तुच्छ समझकर नहीं माँगा — यही उसके अन्त का कारण बना।#बालकाण्ड#रावण तपस्या#ब्रह्मा
रामचरितमानस — बालकाण्डकुम्भकर्ण और विभीषण किसके भाई थे?कुम्भकर्ण और विभीषण रावण के भाई थे — तीनों पुलस्त्य कुल में उत्पन्न। तीनों ने कठोर तपस्या की। रावण ने अमरत्व माँगा, कुम्भकर्ण ने छः माह की नींद (बुद्धि भ्रम से), विभीषण ने भगवान की भक्ति माँगी।#बालकाण्ड#कुम्भकर्ण#विभीषण
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण की माता का क्या नाम था?रामचरितमानस में रावण की माता का नाम सीधे नहीं आता। पुराणों के अनुसार माता का नाम कैकसी (सुमाली राक्षस की पुत्री) था। कैकसी विश्रवा मुनि की पत्नी थीं। रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा कैकसी की सन्तान थे।#बालकाण्ड#रावण माता#कैकसी
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण किसका पुत्र था?रावण पुलस्त्य ऋषि के कुल में उत्पन्न हुआ। मानस में कहा — 'उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप' — पवित्र कुल में जन्मा पर ब्राह्मण शाप से पापरूप हुआ। पुराणों के अनुसार पिता विश्रवा (पुलस्त्य का पौत्र) था।#बालकाण्ड#रावण पिता#विश्रवा
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण का पूर्वजन्म कौन था — रामचरितमानस के अनुसार?रामचरितमानस के अनुसार रावण का पूर्वजन्म राजा प्रतापभानु था। कपटमुनि के छल से ब्राह्मण-भोजन में माँस मिला, क्रोधित ब्राह्मणों ने शाप दिया — 'निशाचर होहु' — परिवारसहित राक्षस बना। शिक्षा — कपट और ब्राह्मण अपमान का भयंकर परिणाम।#बालकाण्ड#रावण पूर्वजन्म#प्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु के मंत्री अरिमर्दन अगले जन्म में कौन बने?प्रतापभानु का भाई/मन्त्री अगले जन्म में कुम्भकर्ण बना — अत्यन्त बलवान, जिसके जोड़ का योद्धा जगत में नहीं था। विभीषण भी भाई बना पर उसने भगवान की भक्ति माँगी इसलिये धर्मात्मा रहा।#बालकाण्ड#अरिमर्दन#कुम्भकर्ण
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु अगले जन्म में कौन बने?प्रतापभानु अगले जन्म में रावण (दशानन) बने। ब्राह्मण शाप से पूरा परिवार राक्षस कुल में जन्मा। यद्यपि पुलस्त्य ऋषि के पवित्र कुल में उत्पन्न हुए, पर शाप से सब पापरूप हुए।#बालकाण्ड#प्रतापभानु#रावण
रामचरितमानस — बालकाण्डब्राह्मणों ने प्रतापभानु को क्या शाप दिया?'जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार' — मूर्ख राजा, परिवारसहित जाकर राक्षस हो जा। ब्राह्मणों ने कहा — तूने हमें मारने का प्रयत्न किया, ईश्वर ने धर्म रक्षा की, अब तू परिवारसहित नष्ट होगा।#बालकाण्ड#ब्राह्मण शाप#निशाचर
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु को ब्राह्मणों का शाप कैसे लगा?कपटमुनि ने भोजन में माँस मिलाया। आकाशवाणी ने ब्राह्मणों को चेतावनी दी। क्रोधित ब्राह्मणों ने बिना विचारे शाप दिया — 'जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार' — मूर्ख राजा, परिवारसहित जाकर राक्षस हो जा।#बालकाण्ड#ब्राह्मण शाप#प्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्डकपटमुनि ने प्रतापभानु से क्या छलकपट किया?कपटमुनि ने कहा — मैं रसोई बनाऊँ, तुम परोसो, जो खायगा वह तुम्हारा दास बनेगा। राजा ने एक लाख ब्राह्मणों को बुलवाया। कपटमुनि ने भोजन में माँस मिला दिया। परोसते समय आकाशवाणी हुई — 'यह अन्न मत खाओ, इसमें माँस है!' ब्राह्मण क्रोधित हुए।#बालकाण्ड#कपटमुनि#छल
रामचरितमानस — बालकाण्डकपटमुनि (कालकेतु) ने प्रतापभानु को क्या लालच दिया?कपटमुनि ने तप की महिमा बताकर लालच दिया — 'तप से कुछ भी दुर्लभ नहीं, मुझे सब सिद्ध है।' अमरत्व और अजेयता का लालच देकर राजा को विश्वास में लिया ताकि अपनी छल-योजना पूरी कर सके।#बालकाण्ड#कपटमुनि#लालच
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु को जंगल में कौन मिला?एक कपटमुनि (कालकेतु/एकतनु) — जो वास्तव में एक पराजित राजा था जिसका देश प्रतापभानु ने छीना था। वह तपस्वी वेष में बदला लेने की ताक में था। उसने राजा का विश्वास जीतकर छलकपट किया।#बालकाण्ड#कपटमुनि#कालकेतु
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु एक बार शिकार करते हुए कहाँ भटक गये?शिकार में सूअर का पीछा करते-करते गहरे वन में भटक गये। भूख-प्यास से व्याकुल, पानी बिना बेहाल। वहाँ एक कपटमुनि (कालकेतु — पराजित राजा) का आश्रम मिला — यहीं से प्रतापभानु के पतन की कथा शुरू होती है।#बालकाण्ड#प्रतापभानु#शिकार
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु का मंत्री कौन था?धर्मरुचि — जो शुक्राचार्य के समान बुद्धिमान् और राजा का हित करने वाला सयाना मन्त्री था। प्रतापभानु का भाई भी बड़ा बलवीर था।#बालकाण्ड#धर्मरुचि#प्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा प्रतापभानु कौन थे और कहाँ राज्य करते थे?प्रतापभानु एक प्रतापी चक्रवर्ती राजा थे जिन्होंने सातों द्वीप जीत लिये। मन्त्री धर्मरुचि शुक्राचार्य समान बुद्धिमान् था। प्रजा सुखी थी। ब्राह्मणों के शाप से वे अगले जन्म में रावण बने।#बालकाण्ड#प्रतापभानु#राजा
रामचरितमानस — बालकाण्डमनु-शतरूपा अगले जन्म में कौन बने?मनु = राजा दशरथ, शतरूपा = माता कौशल्या। भगवान ने 'तुम सम पुत्र' वरदान पूरा करते हुए स्वयं श्रीराम रूप में उनके ज्येष्ठ पुत्र बनकर अयोध्या में जन्म लिया।#बालकाण्ड#मनु शतरूपा#दशरथ कौशल्या
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान ने मनु-शतरूपा को क्या वरदान दिया?भगवान ने कहा — 'जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं' — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की। स्वयं उनके पुत्ररूप में जन्म लेंगे। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में दशरथ-कौशल्या, भगवान = श्रीराम।#बालकाण्ड#भगवान वरदान#मनु शतरूपा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'तुम्ह सम पुत्र' — मनु-शतरूपा ने भगवान से कैसा पुत्र माँगा?'तुम्ह सम पुत्र' = आपके (भगवान के) समान पुत्र। भगवान के समान तो केवल भगवान ही हो सकते हैं — इसलिये भगवान ने स्वयं उनके पुत्ररूप में अवतार लिया। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में राजा दशरथ और माता कौशल्या।#बालकाण्ड#तुम सम पुत्र#मनु
रामचरितमानस — बालकाण्डमनु-शतरूपा ने भगवान से क्या वरदान माँगा?मनु-शतरूपा ने 'तुम सम पुत्र' (आपके समान पुत्र) माँगा। शतरूपा ने सुख, गति, भक्ति, चरण-प्रेम, ज्ञान माँगा। मनु ने कहा — पुत्ररूप से आपके चरणों में प्रीति हो। भगवान ने कहा — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की, सन्देह मत करो।#बालकाण्ड#मनु वरदान#तुम सम पुत्र
रामचरितमानस — बालकाण्डमनु-शतरूपा ने किस स्थान पर तपस्या की?नैमिषारण्य तीर्थ में, फिर गोमती नदी के किनारे। वहाँ मुनियों ने सब तीर्थ करा दिये। वल्कल वस्त्र धारण करके संत-समाज में नित्य पुराण सुनते और द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करते थे।#बालकाण्ड#मनु शतरूपा#नैमिषारण्य
रामचरितमानस — बालकाण्डमनु और शतरूपा कौन थे?मनु और शतरूपा ब्रह्माजी की सृष्टि के प्रथम मानव दम्पति (राजा-रानी) थे। बुढ़ापे में विषय-वैराग्य न होने पर दुखी होकर पुत्र को राज्य देकर वनवास गये। नैमिषारण्य तीर्थ में भगवान की तपस्या की।#बालकाण्ड#मनु#शतरूपा
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवगणों ने नारदजी को कौन सा शाप दिया?नारदजी ने शिवगणों को शाप दिया (उल्टा नहीं)। शिवगणों ने वानर-मुख पर हँसी की, तो नारदजी ने शाप दिया — 'होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ' — तुम दोनों जाकर राक्षस हो जाओ।#बालकाण्ड#शिवगण#नारद शाप
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी के शाप से राम अवतार का क्या सम्बन्ध है?नारदजी के शाप से भगवान को मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ा और स्त्री-विरह सहना पड़ा — रामावतार में ठीक यही हुआ। पर भगवान ने कहा — यह सब मेरी इच्छा से हुआ, शाप तो बहाना मात्र था।#बालकाण्ड#नारद शाप#रामावतार कारण
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान ने नारदजी के शाप को कैसे स्वीकार किया?भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक सिर पर चढ़ाया — यह उनकी लीला-योजना का अंश था। नारदजी के पश्चाताप पर कहा — सब मेरी इच्छा से हुआ, चिन्ता मत करो। शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी। 'कोउ नहीं सिव समान प्रिय मोरें' — शिवजी के समान मुझे कोई प्रिय नहीं।#बालकाण्ड#भगवान#शाप स्वीकार
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने भगवान को दो शाप दिये — वे क्या थे?दो शाप — (1) मनुष्य शरीर धारण करना होगा, (2) स्त्री-विरह (पत्नी वियोग) का दुख सहना होगा। भगवान ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया — यही रामावतार की पृष्ठभूमि बनी। भगवान ने कहा — शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी।#बालकाण्ड#नारद दो शाप#मनुष्य जन्म
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने भगवान विष्णु को क्या शाप दिया?नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप दिया — आपने मेरा उपहास कराया, अतः आपको मनुष्य योनि में जन्म लेना पड़ेगा और स्त्री-विरह सहना पड़ेगा। भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और माया हटा ली।#बालकाण्ड#नारद शाप#विष्णु
रामचरितमानस — बालकाण्ड'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ क्या है जो भगवान ने नारदजी से कहा?'हरि' के दो अर्थ — (1) भगवान विष्णु (सुन्दर), (2) वानर/बन्दर। नारदजी ने विष्णु-रूप माँगा, भगवान ने वानर-रूप दिया। भगवान ने कहा — जैसे वैद्य रोगी को कुपथ्य नहीं देता, वैसे ही मैंने तुम्हारा हित किया।#बालकाण्ड#हरि शब्द#दोहरा अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी को स्वयंवर में किसका मुख मिला?वानर (बन्दर) का मुख मिला। शिवगणों ने मुस्कुराकर कहा — दर्पण में मुँह देखो। नारदजी ने जल में झाँककर बन्दर का मुख देखा तो क्रोध से भर गये और शिवगणों को शाप दिया — 'होहु निसाचर' (राक्षस हो जाओ)।#बालकाण्ड#वानर मुख#नारद
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने भगवान विष्णु से सुन्दर रूप का वरदान माँगा तो भगवान ने क्या किया?नारदजी ने 'हरि रूप' माँगा — भगवान ने 'हरि' = वानर (बन्दर) का मुख दे दिया। 'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ — विष्णु भी, वानर भी। भगवान ने मुनि के कल्याण (अभिमान तोड़ने) के लिये कुरूप बनाया पर माया से किसी को पता नहीं चला।#बालकाण्ड#हरि रूप#वानर मुख
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारदजी ने क्या किया?नारदजी ने भगवान से 'हरि रूप' (सुन्दर रूप) माँगा। भगवान ने उनके हित में वानर (बन्दर) का मुख दे दिया — पर माया से नारदजी को पता नहीं चला। स्वयंवर में राजकुमारी ने नारदजी को छोड़कर भगवान विष्णु को वरा।#बालकाण्ड#नारद स्वयंवर#सुन्दर रूप
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वमोहिनी कौन थी — भगवान की माया से किसकी रचना हुई?विश्वमोहिनी भगवान विष्णु की माया से रची गयी एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी। नारदजी का अभिमान तोड़ने के लिये भगवान ने मायावी नगर, राजा और स्वयंवर रचा। नारदजी उसका रूप देखकर मोहित हो गये।#बालकाण्ड#विश्वमोहिनी#माया
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान विष्णु ने नारदजी को मोहित करने के लिये क्या माया रची?भगवान ने मायावी नगर रचा जिसमें एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी (भगवान की माया)। स्वयंवर हो रहा था। नारदजी राजकुमारी का रूप देखकर वैराग्य भूल गये और मोहित हो गये — 'देखि रूप मुनि बिरति बिसारी।'#बालकाण्ड#विष्णु माया#नारद मोह
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने नारदजी को अभिमान करने से क्यों मना किया?शिवजी जानते थे कि काम-विजय भगवान की कृपा से हुई, नारदजी की अपनी शक्ति नहीं। भगवान की माया प्रचण्ड है — किसी को भी मोहित कर सकती है। अभिमान करने पर माया का शिकार होना निश्चित था, इसलिये शिवजी ने बरज (मना) दिया।#बालकाण्ड#शिव चेतावनी#नारद
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने कामदेव को जीतने के बाद किससे अपनी विजय का वर्णन किया?नारदजी ने पहले शिवजी को (जिन्होंने मना किया था) और फिर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में जाकर काम-विजय का पूरा वृत्तान्त सुनाया। यद्यपि शिवजी ने पहले से बरज रखा था कि यह बात किसी से न कहना।#बालकाण्ड#नारद#काम विजय