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रामचरितमानस(354)

रामचरितमानस पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 354 प्रश्न उपलब्ध हैं।

बालकाण्ड (321)अयोध्याकाण्डअरण्यकाण्डकिष्किन्धाकाण्ड (1)सुन्दरकाण्ड (1)लंकाकाण्डउत्तरकाण्ड
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु-शतरूपा अगले जन्म में कौन बने?

मनु = राजा दशरथ, शतरूपा = माता कौशल्या। भगवान ने 'तुम सम पुत्र' वरदान पूरा करते हुए स्वयं श्रीराम रूप में उनके ज्येष्ठ पुत्र बनकर अयोध्या में जन्म लिया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान ने मनु-शतरूपा को क्या वरदान दिया?

भगवान ने कहा — 'जो कछु रुचि तुम्हरे मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं' — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की। स्वयं उनके पुत्ररूप में जन्म लेंगे। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में दशरथ-कौशल्या, भगवान = श्रीराम।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'तुम्ह सम पुत्र' — मनु-शतरूपा ने भगवान से कैसा पुत्र माँगा?

'तुम्ह सम पुत्र' = आपके (भगवान के) समान पुत्र। भगवान के समान तो केवल भगवान ही हो सकते हैं — इसलिये भगवान ने स्वयं उनके पुत्ररूप में अवतार लिया। मनु-शतरूपा = अगले जन्म में राजा दशरथ और माता कौशल्या।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु-शतरूपा ने भगवान से क्या वरदान माँगा?

मनु-शतरूपा ने 'तुम सम पुत्र' (आपके समान पुत्र) माँगा। शतरूपा ने सुख, गति, भक्ति, चरण-प्रेम, ज्ञान माँगा। मनु ने कहा — पुत्ररूप से आपके चरणों में प्रीति हो। भगवान ने कहा — तुम्हारी सब इच्छा पूरी की, सन्देह मत करो।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु-शतरूपा ने किस स्थान पर तपस्या की?

नैमिषारण्य तीर्थ में, फिर गोमती नदी के किनारे। वहाँ मुनियों ने सब तीर्थ करा दिये। वल्कल वस्त्र धारण करके संत-समाज में नित्य पुराण सुनते और द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करते थे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

मनु और शतरूपा कौन थे?

मनु और शतरूपा ब्रह्माजी की सृष्टि के प्रथम मानव दम्पति (राजा-रानी) थे। बुढ़ापे में विषय-वैराग्य न होने पर दुखी होकर पुत्र को राज्य देकर वनवास गये। नैमिषारण्य तीर्थ में भगवान की तपस्या की।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवगणों ने नारदजी को कौन सा शाप दिया?

नारदजी ने शिवगणों को शाप दिया (उल्टा नहीं)। शिवगणों ने वानर-मुख पर हँसी की, तो नारदजी ने शाप दिया — 'होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ' — तुम दोनों जाकर राक्षस हो जाओ।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी के शाप से राम अवतार का क्या सम्बन्ध है?

नारदजी के शाप से भगवान को मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ा और स्त्री-विरह सहना पड़ा — रामावतार में ठीक यही हुआ। पर भगवान ने कहा — यह सब मेरी इच्छा से हुआ, शाप तो बहाना मात्र था।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान ने नारदजी के शाप को कैसे स्वीकार किया?

भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक सिर पर चढ़ाया — यह उनकी लीला-योजना का अंश था। नारदजी के पश्चाताप पर कहा — सब मेरी इच्छा से हुआ, चिन्ता मत करो। शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी। 'कोउ नहीं सिव समान प्रिय मोरें' — शिवजी के समान मुझे कोई प्रिय नहीं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान को दो शाप दिये — वे क्या थे?

दो शाप — (1) मनुष्य शरीर धारण करना होगा, (2) स्त्री-विरह (पत्नी वियोग) का दुख सहना होगा। भगवान ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया — यही रामावतार की पृष्ठभूमि बनी। भगवान ने कहा — शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान विष्णु को क्या शाप दिया?

नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप दिया — आपने मेरा उपहास कराया, अतः आपको मनुष्य योनि में जन्म लेना पड़ेगा और स्त्री-विरह सहना पड़ेगा। भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और माया हटा ली।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ क्या है जो भगवान ने नारदजी से कहा?

'हरि' के दो अर्थ — (1) भगवान विष्णु (सुन्दर), (2) वानर/बन्दर। नारदजी ने विष्णु-रूप माँगा, भगवान ने वानर-रूप दिया। भगवान ने कहा — जैसे वैद्य रोगी को कुपथ्य नहीं देता, वैसे ही मैंने तुम्हारा हित किया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी को स्वयंवर में किसका मुख मिला?

वानर (बन्दर) का मुख मिला। शिवगणों ने मुस्कुराकर कहा — दर्पण में मुँह देखो। नारदजी ने जल में झाँककर बन्दर का मुख देखा तो क्रोध से भर गये और शिवगणों को शाप दिया — 'होहु निसाचर' (राक्षस हो जाओ)।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान विष्णु से सुन्दर रूप का वरदान माँगा तो भगवान ने क्या किया?

नारदजी ने 'हरि रूप' माँगा — भगवान ने 'हरि' = वानर (बन्दर) का मुख दे दिया। 'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ — विष्णु भी, वानर भी। भगवान ने मुनि के कल्याण (अभिमान तोड़ने) के लिये कुरूप बनाया पर माया से किसी को पता नहीं चला।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारदजी ने क्या किया?

नारदजी ने भगवान से 'हरि रूप' (सुन्दर रूप) माँगा। भगवान ने उनके हित में वानर (बन्दर) का मुख दे दिया — पर माया से नारदजी को पता नहीं चला। स्वयंवर में राजकुमारी ने नारदजी को छोड़कर भगवान विष्णु को वरा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वमोहिनी कौन थी — भगवान की माया से किसकी रचना हुई?

विश्वमोहिनी भगवान विष्णु की माया से रची गयी एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी। नारदजी का अभिमान तोड़ने के लिये भगवान ने मायावी नगर, राजा और स्वयंवर रचा। नारदजी उसका रूप देखकर मोहित हो गये।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान विष्णु ने नारदजी को मोहित करने के लिये क्या माया रची?

भगवान ने मायावी नगर रचा जिसमें एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी (भगवान की माया)। स्वयंवर हो रहा था। नारदजी राजकुमारी का रूप देखकर वैराग्य भूल गये और मोहित हो गये — 'देखि रूप मुनि बिरति बिसारी।'

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने नारदजी को अभिमान करने से क्यों मना किया?

शिवजी जानते थे कि काम-विजय भगवान की कृपा से हुई, नारदजी की अपनी शक्ति नहीं। भगवान की माया प्रचण्ड है — किसी को भी मोहित कर सकती है। अभिमान करने पर माया का शिकार होना निश्चित था, इसलिये शिवजी ने बरज (मना) दिया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने कामदेव को जीतने के बाद किससे अपनी विजय का वर्णन किया?

नारदजी ने पहले शिवजी को (जिन्होंने मना किया था) और फिर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में जाकर काम-विजय का पूरा वृत्तान्त सुनाया। यद्यपि शिवजी ने पहले से बरज रखा था कि यह बात किसी से न कहना।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी को किस बात का अभिमान हो गया था?

नारदजी को अभिमान हुआ कि उन्होंने अपने तपोबल से कामदेव को जीत लिया। कामदेव की कोई कला उन पर नहीं चली। वास्तव में भगवान की माया से रक्षा हुई थी, पर नारदजी समझ बैठे कि यह उनकी अपनी शक्ति है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

जय-विजय कौन थे और उन्हें किसने शाप दिया?

जय-विजय भगवान विष्णु के वैकुण्ठ द्वारपाल थे। सनकादि ऋषियों (ब्रह्माजी के मानसपुत्र) ने शाप दिया — असुर योनि में जन्म लोगे। तीन जन्म — हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु, रावण-कुम्भकर्ण, शिशुपाल-दन्तवक्र। रामावतार में रावण-कुम्भकर्ण जय-विजय ही थे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?

शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु' — इसका अर्थ?

अर्थ — भगवान असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने वेदरूपी सेतु (धर्ममार्ग) की रक्षा करते हैं और जगत में निर्मल यश फैलाते हैं — यही श्रीराम जन्म का कारण है। 'श्रुति सेतु' = वेदमार्ग/धर्ममार्ग।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान अवतार क्यों लेते हैं — रामचरितमानस के अनुसार?

अनेक कारण — (1) धर्म हानि पर रक्षा, (2) सज्जनों की पीड़ा हरना, (3) असुर वध, (4) वेदमार्ग रक्षा, (5) यश फैलाना, (6) भक्तों का प्रेम। पर शिवजी ने कहा — अवतार का कारण 'बस यही है' ऐसा निश्चित नहीं कहा जा सकता, अनेक कारण हो सकते हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। चार कारण — धर्म हानि, असुरों का बढ़ना, अन्याय, और ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी का कष्ट। यह गीता के 'यदा यदा हि धर्मस्य' के समान सिद्धान्त है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने भगवान के अवतार का मूल कारण क्या बताया?

शिवजी ने कहा — 'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — जब धर्म की हानि हो, राक्षस बढ़ें, ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी कष्ट पायें, तब भगवान अवतार लेकर असुरों को मार, देवताओं को स्थापित कर, वेदमार्ग की रक्षा करते हैं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने पार्वतीजी को क्या सुनाने का निर्णय लिया?

शिवजी ने पार्वतीजी को श्रीहरि (राम) के सम्पूर्ण अवतार चरित सुनाने का निर्णय लिया। कहा — 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — वेद-शास्त्रों में गाये गये राम के सुन्दर चरित्र सुनो। राम अतर्क्य हैं — बुद्धि, मन, वाणी से नहीं समझे जा सकते।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

विवाह के बाद पार्वतीजी ने शिवजी से क्या प्रश्न किया?

पार्वतीजी ने कैलास पर शिवजी से रामकथा सुनने की जिज्ञासा प्रकट की। शिवजी ने पहले शम्भु चरित्र (विवाह कथा) संक्षेप में कहा, फिर रामावतार की कथा सुनानी शुरू की। भरद्वाजजी (याज्ञवल्क्यजी के माध्यम से) यह सुनकर अति प्रसन्न हुए।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिव-पार्वती विवाह कहाँ सम्पन्न हुआ?

हिमवान (पर्वतराज) की नगरी में। हिमाचल ने अत्यन्त विचित्र मण्डप बनवाया। नगर की शोभा इतनी सुन्दर थी कि ब्रह्माजी की रचना-चतुरी भी तुच्छ लगती। घर-घर तोरण-पताकाएँ शोभित थीं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिव-पार्वती विवाह के बाद विदाई का वर्णन कैसा है?

हिमाचल ने भव्य दहेज दिया — दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, मणि, सोने के बर्तन। शिवजी पार्वतीजी को लेकर कैलास गये। 'सकल भुवन भरि रहा उछाहू' — सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द भर गया। बाद में कार्तिकेय का जन्म हुआ।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिव-पार्वती विवाह में वेद मंत्रों से किसने विवाह करवाया?

महामुनियों (श्रेष्ठ मुनिगणों) ने वेद मंत्रों की रीति से विवाह करवाया। हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी जानकर शिवजी को समर्पित किया। पहले गणेशजी का पूजन किया गया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी ने विवाह के समय कौन सा रूप धारण किया?

शिवजी ने विवाह मण्डप में अत्यन्त सुन्दर और दिव्य रूप धारण किया। पहले बारात में विचित्र भयानक रूप था, पर विवाह के समय मनोहर रूप देखकर सब प्रसन्न और मोहित हो गये।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने माता मैना को कैसे समझाया?

पहले पार्वतीजी ने माता को समझाया — 'जो विधाता रच दे वह नहीं टलता, दोष किसी को मत दो।' फिर नारदजी ने आकर सबको समझाया कि शिवजी स्वयं भगवान हैं। शिवजी ने सुन्दर रूप धारण किया तो सब प्रसन्न हुए।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

माता मैना ने शिवजी की बारात देखकर क्या कहा?

मैना ने नारदजी को दोषी ठहराया — 'मैंने नारद का क्या बिगाड़ा, जिन्होंने मेरा घर उजाड़ दिया।' शिवजी की निन्दा की — 'न मोह, न माया, न घर, न लाज — बावले वर के लिये मेरी बेटी ने तप किया।' सारी स्त्रियाँ व्याकुल हुईं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी की बारात देखकर जनकपुर (हिमवान की नगरी) की स्त्रियों ने क्या प्रतिक्रिया दी?

नगर के लोग पहले डर गये, फिर समझदार माता-पिता ने बच्चों को समझाया — 'डरो मत, यह शिवजी का समाज है।' पर माता मैना ने बारात देखकर बड़ा दुख प्रकट किया और विलाप किया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी की बारात का स्वरूप कैसा था — क्या विचित्रता थी?

बारात अत्यन्त विचित्र और भयानक — लड़कों ने कहा 'यह बारात है या यमराज की सेना? दूल्हा पागल है, बैल पर सवार, साँप-कपाल-राख के गहने।' जो बारात देखकर जीवित बचे उसके बड़े पुण्य। देवताओं का दल सुन्दर पर शिवजी का दल भयानक।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी की बारात में कौन-कौन शामिल थे?

शिवजी की बारात में भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ, राक्षस, विचित्र गण शामिल थे। दूल्हे के शरीर पर राख, साँप-कपाल के गहने, नग्न, जटाधारी। देवताओं का दल सुन्दर था पर शिवजी का दल देखकर सबके वाहन डरकर भागे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवजी के विवाह का प्रस्ताव देवताओं ने किससे रखा?

देवताओं ने ब्रह्माजी से विनती की, ब्रह्माजी ने शिवजी से प्रार्थना की। शिवजी ने प्रभु रामजी के वचन याद कर प्रसन्नतापूर्वक कहा — 'ऐसेइ होउ' (ऐसा ही हो)। देवताओं ने नगाड़े बजाये और पुष्पवर्षा की।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदहन के बाद जगत में क्या प्रभाव पड़ा?

चार प्रभाव — (1) देवता डर गये (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा), (2) असुर सुखी हुए, (3) भोगी चिन्तित हुए कामसुख याद कर, (4) साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव भस्म होने के बाद किस नाम से जाने गये?

कामदेव 'अनंग' (बिना शरीर/अंग के) नाम से जाने गये। शिवजी ने कहा — 'होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि' — बिना शरीर के ही सबके हृदय में काम-भावना जगाते रहेंगे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रति को शिवजी ने क्या वरदान दिया?

शिवजी ने वरदान दिया — (1) कामदेव का नाम 'अनंग' (बिना शरीर) होगा, (2) बिना शरीर के ही सबके हृदय में व्यापेगा, (3) श्रीकृष्ण अवतार में प्रद्युम्न रूप में जन्म लेगा — तब रति को पति वापस मिलेगा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति ने क्या किया?

रति पति की दशा सुनकर मूर्छित हो गयीं। फिर रोती-चिल्लाती शिवजी के पास गयीं और अत्यन्त प्रेम से विनती की। आशुतोष कृपालु शिवजी ने अबला को देखकर सान्त्वना दी।

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शिवजी ने कामदेव को कैसे भस्म किया?

कामदेव ने आम के पेड़ से पाँच बाण शिवजी पर छोड़े, समाधि टूटी। शिवजी ने तीसरा नेत्र खोला — 'तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा॥' — देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गया। तीनों लोक काँप उठे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सबु भागा' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — ब्रह्मचर्य, संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य — विवेक की यह सारी सेना डरकर भाग गयी। कामदेव के प्रभाव से सृष्टि का सारा विवेक और संयम नष्ट हो गया। केवल शिवजी अप्रभावित रहे।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव के बाण चलाने पर क्या-क्या प्रभाव पड़ा — सारी सृष्टि पर?

सारी सृष्टि काम-वश हो गयी — ब्रह्मचर्य, धीरज, ज्ञान, सदाचार, योग, वैराग्य सब भागे। स्त्री-पुरुष सब मर्यादा छोड़ बैठे। लताएँ वृक्षों पर झुकीं, नदियाँ समुद्र की ओर दौड़ीं। केवल शिवजी की समाधि अचल रही।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये क्या किया?

कामदेव ने — (1) वसन्त ऋतु प्रकट की, (2) सारी सृष्टि को काम-वश किया, (3) करोड़ों उपाय किये पर शिवजी की समाधि न डिगी, (4) अन्त में आम के पेड़ पर चढ़कर पुष्प-धनुष से पाँच बाण शिवजी पर छोड़े।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

देवताओं ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये किसे भेजा?

देवताओं ने कामदेव को भेजा। कामदेव ने पहले कहा कि शिवजी से विरोध में मेरी कुशल नहीं, पर परोपकार धर्म मानकर काम स्वीकार किया — 'श्रुति कह परम धरम उपकारा' — वेद कहते हैं उपकार परम धर्म है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने परीक्षा उत्तीर्ण होने पर पार्वतीजी को क्या आशीर्वाद दिया?

सप्तर्षि बोले — 'जय जय जगदंबिके भवानी!' — आप माया हैं, शिवजी भगवान हैं, आप दोनों जगत के माता-पिता हैं। मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर बार-बार पुलकित होते हुए चले गये।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

पार्वतीजी ने सप्तर्षियों की शिवनिन्दा सुनकर क्या उत्तर दिया?

पार्वतीजी ने कहा — 'जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी' — करोड़ जन्मों तक या तो शिवजी को वरूँगी या कुमारी रहूँगी। स्वयं शिवजी मना करें तब भी नारदजी का उपदेश नहीं छोडूँगी। ऋषि प्रसन्न हुए — 'जय जगदम्बिके भवानी!'

#बालकाण्ड#पार्वती दृढ़ संकल्प#सप्तर्षि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सप्तर्षियों ने शिवजी के बारे में क्या-क्या बुराइयाँ बताईं?

शिवजी को बताया — (1) अवगुणों का भवन, (2) निर्गुण, निलज, (3) कुबेष (भस्म-साँप-खोपड़ी), (4) अकुल (कुलहीन), (5) अगेह (बेघर/श्मशानवासी), (6) दिगम्बर (नग्न), (7) उदासीन। ये सब परीक्षा के लिये कहा — पार्वतीजी का संकल्प जाँचने हेतु।

#बालकाण्ड#सप्तर्षि#शिव दोष
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