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पंचांग एवं ज्योतिष प्रश्नोत्तर (पेज 2) — 54 प्रश्न

पंचांग एवं ज्योतिष से जुड़े 54 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 54 प्रश्न

सौभाग्य योग क्या होता है?

सौभाग्य 27 नित्ययोगों में चतुर्थ, शुभ योग। 'उत्तम भाग्य' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 40°–53°20'। स्वामी ब्रह्मा। सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ। जन्म में भाग्यशाली, परोपकारी, समाज में मान्य।

सौभाग्य योग27 नित्ययोगपंचांग
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आयुष्मान योग क्या होता है?

आयुष्मान 27 नित्ययोगों में तृतीय, शुभ योग। 'दीर्घायु' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 26°40'–40°। स्वामी रुद्र/शिव। स्वास्थ्य कार्य और विवाह के लिए उत्तम। जन्म में दीर्घायु, स्वस्थ, ऊर्जावान।

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प्रीति योग क्या होता है?

प्रीति 27 नित्ययोगों में द्वितीय, अत्यंत शुभ योग। 'प्रेम और मित्रता' का प्रतीक। सूर्य-चंद्र योगफल 13°20'–26°40'। स्वामी भगवान विष्णु। विवाह-व्यापार-यात्रा शुभ। जन्म में मिलनसार, वाणी-मधुर, समृद्ध।

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विष्कुम्भ योग क्या होता है?

विष्कुम्भ 27 नित्ययोगों में प्रथम और 9 अशुभ योगों में एक है। 'विष + कुम्भ' = जहर का घड़ा। सूर्य-चंद्र योगफल 0°–13°20' पर होता है। स्वामी यक्ष। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में प्रभावशाली किंतु शत्रु-पीड़ित।

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पंचांग एवं ज्योतिष — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पंचांग एवं ज्योतिष श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पंचांग एवं ज्योतिष को गहराई से समझने का तरीका

पंचांग एवं ज्योतिष के पेज 2 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

54 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।