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पूजा विधि एवं कर्मकांड प्रश्नोत्तर (पेज 2) — 72 प्रश्न

पूजा विधि एवं कर्मकांड से जुड़े 72 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 72 प्रश्न

साष्टांग नमस्कार और पंचांग नमस्कार में क्या अंतर

साष्टांग नमस्कार में आठ अंग जमीन को स्पर्श करते हैं और व्यक्ति पेट के बल लेटता है — यह पुरुषों के लिए है। पंचांग नमस्कार में पाँच अंग (दोनों हाथ, दोनों घुटने, मस्तक) स्पर्श करते हैं — यह स्त्रियों के लिए शास्त्रसम्मत है।

साष्टांग नमस्कारपंचांग प्रणामदंडवत
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पूजा में कितने प्रकार के नमस्कार होते हैं

पूजा में एकांग, द्विअंग, त्र्यंग, चतुरंग, पंचांग और साष्टांग (अष्टांग) नमस्कार होते हैं। पंचांग प्रणाम स्त्रियों के लिए और साष्टांग प्रणाम पुरुषों के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

नमस्कार के प्रकारपूजा विधिप्रणाम
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गणेश जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा है

गणेश के सर्वप्रभावी मंत्र — नित्य जप 'ॐ गं गणपतये नमः' (बीज मंत्र), हर कार्यारंभ में 'वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ...', और विशेष साधना में गणेश गायत्री 'ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि...'।

गणेश मंत्रॐ गं गणपतये नमःवक्रतुण्ड
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गणेश जी की पूजा में सबसे बड़ी गलती कौन सी है जो भक्त करते हैं

गणेश पूजा की सबसे बड़ी गलती — तुलसी चढ़ाना (तुलसी-गणेश में पौराणिक बैर है)। अन्य — टूटे दाँत वाली मूर्ति, केतकी का फूल, बासी भोग, और गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन।

गणेश पूजा गलतीतुलसी वर्जितटूटी मूर्ति
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गणेश जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका क्या है

गणेश को प्रसन्न करने के उपाय — 21 दूर्वा अर्पण, मोदक का भोग, 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप, बुधवार को पीले फूल-वस्त्र के साथ पूजन, और 'वक्रतुण्ड महाकाय...' श्लोक बोलकर हर कार्य आरंभ करना।

गणेश प्रसन्नमोदक दूर्वागणेश उपाय
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हनुमान जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

हनुमान पूजा के लिए — मंगलवार (प्रमुख दिन) और शनिवार (शनि-पीड़ा निवारण) दोनों श्रेष्ठ हैं। हनुमान जयंती (चैत्र शुक्ल पूर्णिमा) वर्षभर में सर्वोत्तम। कलियुग में वे जाग्रत देव हैं — प्रतिदिन उनकी याद भी फलदायी है।

हनुमान पूजा दिनमंगलवार शनिवारहनुमान जयंती
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हनुमान जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा है

हनुमान के सर्वप्रभावी मंत्र — नित्य जप 'ॐ हं हनुमते नमः' (बीज मंत्र), संकट में 'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्', और सर्व मनोकामना के लिए हनुमान चालीसा। 100 बार हनुमान चालीसा पाठ से सारे बंधन टूटते हैं।

हनुमान मंत्रॐ हं हनुमते नमःहनुमान चालीसा
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हनुमान जी की पूजा में सबसे बड़ी गलती कौन सी है जो भक्त करते हैं

हनुमान पूजा की सबसे बड़ी गलती — ब्रह्मचर्य का उल्लंघन। अन्य — स्त्रियों का सीधे चोला अर्पण, सूतक में पूजा, मंगलवार को नमक-मांस-मदिरा, और हनुमान चालीसा का गलत उच्चारण।

हनुमान पूजा गलतीब्रह्मचर्यसूतक
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हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका क्या है

हनुमान को प्रसन्न करने के उपाय — हनुमान चालीसा पाठ (108 बार राम-नाम जप के बाद), मंगलवार को सिंदूर-चमेली तेल-अर्पण, राम-नाम जप, शनिवार पूजन और सात्विक आचरण। राम-नाम के सहारे हनुमान जी तत्काल जागृत होते हैं।

हनुमान प्रसन्नबजरंगबली उपायहनुमान चालीसा
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राम जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

राम पूजा के लिए — मंगलवार (हनुमान के साथ), रामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी, जन्म-दिवस) सर्वोत्तम। नित्य राम-नाम जप में कोई भी दिन उत्तम है। शनिवार को हनुमान-राम पूजन शनि-पीड़ा निवारण के लिए विशेष।

राम पूजा दिनमंगलवार रामरामनवमी
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राम जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा है

राम के सर्वप्रभावी मंत्र — सर्वोच्च 'राम' (तारक मंत्र), नित्य जप 'श्री राम जय राम जय जय राम', बीज मंत्र 'रां रामाय नमः', और मोक्ष के लिए 'राम रामेति रामेति... सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।'

राम मंत्रतारक मंत्रश्री राम जय राम
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राम जी की पूजा में सबसे बड़ी गलती कौन सी है जो भक्त करते हैं

राम-पूजा की सबसे बड़ी गलती — तुलसीदास के अनुसार — भाव-रहित, आडंबरपूर्ण पूजा। राम प्रसन्न तभी होते हैं जब मन सच्चा हो, आचरण सत्य हो। पूजा करके झूठ बोलना और हनुमान की उपेक्षा भी प्रमुख गलतियाँ हैं।

राम पूजा गलतीआडंबरभाव रहित पूजा
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राम जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका क्या है

राम को प्रसन्न करने के उपाय — 'राम' नाम जप, 'श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र 108 बार, रामचरितमानस-सुंदरकाण्ड पाठ, सत्य-आचरण और हनुमान चालीसा। तुलसीदास कहते हैं — राम सच्चे मन की भक्ति से प्रसन्न होते हैं।

राम प्रसन्नराम नाम जपरामचरितमानस
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कृष्ण जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

कृष्ण पूजा के लिए बुधवार सबसे शुभ दिन है, क्योंकि यह कृष्ण से जुड़ी परंपरा का प्रमुख दिन है। रोहिणी नक्षत्र भी विशेष शुभ है। जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) वर्ष की सर्वोत्तम कृष्ण-पूजा का अवसर है।

कृष्ण पूजा दिनबुधवार कृष्णजन्माष्टमी
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आचमन का मंत्र क्या है?

आचमन में तीन बार जल ग्रहण करते हुए क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः', 'ॐ माधवाय नमः' बोला जाता है। इससे पूर्व 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र से पवित्रीकरण होता है। यह पूजा आरंभ की अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।

आचमन मंत्रपूजा विधिशुद्धि मंत्र
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सूर्य अर्घ्य मंत्र क्या है?

सूर्य अर्घ्य का मुख्य मंत्र है — 'ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपये माम् भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर:॥' बीज मंत्र 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' और सरल मंत्र 'ॐ घृणिं सूर्य आदित्य:' भी प्रचलित हैं। प्रातः उगते सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य देते समय इनका उच्चारण किया जाता है।

सूर्य अर्घ्यसूर्य मंत्रअर्घ्य मंत्र
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दीप प्रज्वलन मंत्र के बोल क्या हैं?

दीप जलाते समय 'दीपज्योतिः परं ज्योतिः दीपज्योतिर्जनार्दनः' और 'शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा' — ये दो मंत्र पढ़े जाते हैं। पहला दीप को परब्रह्म मानकर नमन करता है, दूसरा शुभ, कल्याण और शत्रुनाश की कामना करता है।

दीप मंत्रदीप प्रज्वलनपूजा मंत्र
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क्षमा प्रार्थना मंत्र का हिंदी अर्थ क्या है?

क्षमा प्रार्थना में भक्त स्वीकार करता है कि मुझसे रात-दिन हजारों अपराध होते हैं, मुझे आवाहन-विसर्जन-पूजाविधि ठीक से नहीं आती, और जो मंत्रहीन-भक्तिहीन पूजन हुआ है — उसे आपकी कृपा से पूर्ण करें और मुझे क्षमा करें। पूजा के अंत में यह याचना आवश्यक मानी गई है।

क्षमा प्रार्थनाक्षमा मंत्रपूजा क्षमायाचना
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तिलक मंत्र क्या है?

तिलक का प्रमुख मंत्र है — 'ॐ चन्दनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम्। आपदां हरते नित्यं लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥' वैष्णव परम्परा में 'केशवानन्त गोविन्द वाराह पुरुषोत्तम...' भी पढ़ा जाता है। तिलक आज्ञाचक्र पर लगाया जाता है और पवित्रता, कल्याण व लक्ष्मी-प्राप्ति का प्रतीक है।

तिलक मंत्रचंदन तिलकभाल तिलक
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भोजन शुद्धि का मंत्र कौन सा है?

भोजन शुद्धि का मुख्य मंत्र है — 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (गीता 4.24), जिसका अर्थ है कि भोजन और भोजन-क्रिया सब ब्रह्म-स्वरूप हैं। इसके साथ 'ॐ सह नाववतु...' शांति मंत्र भी पढ़ा जाता है। इस प्रकार अन्न को ईश्वर को समर्पित करके प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परम्परा है।

भोजन मंत्रभोजन शुद्धिअन्न मंत्र
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स्नान का मंत्र क्या है?

स्नान का मुख्य मंत्र है — 'गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥' जिससे सातों पवित्र नदियों का जल में आह्वान होता है और साधारण जल भी तीर्थ-तुल्य हो जाता है। यजुर्वेद का 'ॐ आपो हि ष्ठा मयो भुवः' मंत्र भी जल की शक्ति का वैदिक स्तवन है।

स्नान मंत्रनित्य क्रिया मंत्रप्रातःकाल मंत्र
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पुष्पांजलि मंत्र के बोल क्या हैं?

मंत्र पुष्पांजलि वेदमंत्रों का वह संग्रह है जो आरती के बाद देवता को पुष्प अर्पित करते हुए पढ़ा जाता है। 'ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः...' से आरम्भ होकर चार श्लोकों में यह यज्ञ-महिमा, कुबेर-स्तुति और राज्य-कल्याण की प्रार्थना करता है। इसके बाद 'मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि' कहकर पूजा पूर्ण मानी जाती है।

पुष्पांजलि मंत्रमंत्र पुष्पांजलिपूजा समापन मंत्र
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पूजा विधि एवं कर्मकांड — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पूजा विधि एवं कर्मकांड श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पूजा विधि एवं कर्मकांड को गहराई से समझने का तरीका

पूजा विधि एवं कर्मकांड के पेज 2 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

72 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।