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मरणोपरांत आत्मा यात्रा प्रश्नोत्तर (पेज 5) — 240 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा से जुड़े 240 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 240 प्रश्न

मृत्यु के समय देह की पवित्रता कैसे रखी जाती है?

गोमय-लेपित भूमि, कुशा, तुलसी, शालिग्राम और नौ द्वारों में स्वर्ण से मृत्यु-समय देह की पवित्रता रखी जाती है।

देह पवित्रतामृत्युतुलसी
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मरणासन्न व्यक्ति के पास शालिग्राम शिला क्यों रखी जाती है?

शालिग्राम शिला मृत्यु-समय की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता के विधान में रखी जाती है।

शालिग्राम शिलामरणासन्नमृत्यु संस्कार
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भागवत पुराण में वृद्धावस्था और मृत्यु का क्या वर्णन है?

भागवत पुराण में वृद्ध जीव रोगग्रस्त, निर्भर, कुरूप और मृत्यु के सम्मुख होते हुए भी वैराग्यहीन बताया गया है।

भागवत पुराणवृद्धावस्थामृत्यु
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मृत्यु से पहले जीव की अवस्था कैसी होती है?

मृत्यु से पहले पापी जीव वृद्ध, रोगग्रस्त, वैराग्यहीन और यमदूतों को देखकर भयभीत बताया गया है।

मरणासन्न अवस्थामृत्यु से पहलेभागवत पुराण
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वायुजा देह अग्नि रहित शिखा जैसी क्यों कही गई है?

वायुजा देह वायव्य, अस्थूल और कर्म-अक्षम होती है, इसलिए उसे अग्नि रहित शिखा जैसी कहा गया है।

वायुजा देहअग्नि रहित शिखावायव्य शरीर
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मृत्यु के बाद आत्मा कौन-कौन से शरीर धारण करती है?

मृत्यु के बाद आत्मा लिंग शरीर, वायुजा देह, पिण्डज शरीर और पापी होने पर यातना देह धारण कर सकती है।

आत्मा के शरीरलिंग शरीरवायुजा देह
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मृत्यु के बाद आत्मा किस शरीर में जाती है?

मृत्यु के बाद आत्मा पहले लिंग शरीर में रहती है, फिर वायुजा देह धारण करती है और पिण्डदान से पिण्डज शरीर प्राप्त करती है।

मृत्यु के बादआत्मालिंग शरीर
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मृत्यु को सनातन धर्म में जीवन का अंत क्यों नहीं माना गया है?

मृत्यु स्थूल शरीर का अंत है, लेकिन आत्मा लिंग शरीर और अन्य पारलौकिक देहों के साथ आगे यात्रा करती है।

मृत्युसनातन धर्मआत्मा
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विष्णु पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की गति क्या बताई गई है?

विष्णु पुराण के अनुसार आत्मा मृत्यु के तुरंत बाद यमलोक नहीं जाती, बल्कि घर-परिवार के पास रहती है और आगे कर्म व संस्कारों के अनुसार उसकी गति होती है।

विष्णु पुराणआत्मा की गतिमृत्यु के बाद
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भागवत पुराण में मृत्यु के समय जीव की स्थिति कैसी बताई गई है?

भागवत पुराण में पापी जीव मृत्यु के समय वृद्ध, व्याधिग्रस्त, वैराग्यहीन और यमदूतों को देखकर भयभीत बताया गया है।

भागवत पुराणमृत्युमरणासन्न अवस्था
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गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा वायुजा देह, पिण्डज शरीर, सपिण्डीकरण, यमदूतों के पाश और 348 दिन की यमयात्रा के रूप में बताई गई है।

गरुड़ पुराणआत्मा की यात्राप्रेत खण्ड
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मृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा क्या है?

मृत्यु के बाद 13 दिनों में आत्मा वायुजा देह से पिण्डज शरीर पाती है, सपिण्डीकरण से प्रेतत्व छोड़ती है और तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू करती है।

मृत्यु के बाद आत्मा13 दिन की यात्रागरुड़ पुराण
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मरणोपरांत आत्मा यात्रा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर मरणोपरांत आत्मा यात्रा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा को गहराई से समझने का तरीका

मरणोपरांत आत्मा यात्रा के पेज 5 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

240 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।