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मरणोपरांत आत्मा यात्रा प्रश्नोत्तर (पेज 4) — 240 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा से जुड़े 240 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 240 प्रश्न

पिण्डदान न होने पर आत्मा आकाश में क्यों भटकती है?

पिण्डदान न होने से पिण्डज शरीर नहीं बनता, इसलिए आत्मा भूखी-प्यासी वायव्य रूप में भटकती है।

पिण्डदानआकाश में भटकनावायव्य रूप
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सूतक काल में देव-प्रतिमा की पूजा क्यों वर्जित है?

सूतक काल में पूजा इसलिए वर्जित है क्योंकि यह अवधि प्रेत की सद्गति और देह-निर्माण पर केंद्रित होती है।

सूतक कालदेव प्रतिमापूजा वर्जित
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मृत्यु के बाद आत्मा को भूख-प्यास क्यों लगती है?

वायुजा देह में आत्मा अन्न नहीं खा सकती, पर भूख-प्यास रहती है; पिण्डज शरीर पूर्ण होने पर यह और तीव्र होती है।

मृत्यु के बादभूख प्यासवायुजा देह
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मृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?

प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।

अंगुष्ठमात्र आत्मामृत्युसूक्ष्म शरीर
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मरणोपरांत आत्मा यात्रा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर मरणोपरांत आत्मा यात्रा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा को गहराई से समझने का तरीका

मरणोपरांत आत्मा यात्रा के पेज 4 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

240 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।