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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 54) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

अलग-अलग पुराणों में पाताल लोकों के नाम अलग क्यों हैं?

पुराणों में नामों का अंतर कल्प, मन्वन्तर और वर्णन शैली के भेद से है, पर सात अधोलोकों की संरचना एकमत से स्वीकार है।

पाताल लोकपुराणअधोलोक
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पाताल लोक की दैत्य और दानव कन्याएँ कैसी हैं?

पाताल की दैत्य और दानव कन्याएँ अत्यंत रूपवती और सम्मोहक बताई गई हैं, जो तपस्वियों का मन भी मोहित कर सकती हैं।

पाताल लोकदैत्य कन्यादानव कन्या
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पाताल लोक स्वर्ग से अधिक सुखमय क्यों माना गया है?

पाताल लोक स्वर्ग से अधिक सुखमय इसलिए माना गया है क्योंकि वहाँ भोग, ऐश्वर्य, भवन, उद्यान और कामनाओं की पूर्ति स्वर्ग से भी अधिक बताई गई है।

पाताल लोकस्वर्गबिल स्वर्ग
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सुदर्शन चक्र से असुर स्त्रियाँ क्यों डरती हैं?

सुदर्शन चक्र के तेज से असुर स्त्रियाँ इतनी भयभीत होती हैं कि गर्भवती स्त्रियों के गर्भ गिर जाते हैं।

सुदर्शन चक्रअसुर स्त्रियाँपाताल लोक
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पाताल लोक में दिव्य औषधियों का क्या प्रभाव है?

दिव्य औषधियाँ और रस पाताल निवासियों को रोग, बुढ़ापा, झुर्रियां, सफेद बाल, पसीना, दुर्गंध और थकान से मुक्त रखते हैं।

पाताल लोकदिव्य औषधिजड़ी बूटी
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पाताल लोक में बुढ़ापा और रोग क्यों नहीं होते?

दिव्य औषधियों, जड़ी-बूटियों और रसों के कारण पाताल निवासियों को बुढ़ापा, रोग, झुर्रियां, थकान और दुर्गंध नहीं सताते।

पाताल लोकबुढ़ापारोग
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पाताल लोक में स्वास्थ्य और ऊर्जा कैसी होती है?

पाताल लोक में दिव्य औषधियों और रसों के कारण निवासियों का स्वास्थ्य, ऊर्जा और यौवन असाधारण बताया गया है।

पाताल लोकस्वास्थ्यऊर्जा
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पाताल लोक में दिन और रात क्यों नहीं होते?

पाताल लोक में दिन-रात इसलिए नहीं होते क्योंकि वहाँ सूर्य-चंद्र का प्रत्यक्ष प्रकाश नहीं पहुँचता और समय का सौर विभाजन नहीं होता।

पाताल लोकदिन रातसौर समय
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पाताल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश क्यों नहीं पहुँचता?

पाताल लोक पृथ्वी के नीचे अधोलोकों में स्थित है, इसलिए सूर्य-चंद्र का प्रत्यक्ष प्रकाश वहाँ नहीं पहुँचता; प्रकाश नागमणियों से होता है।

पाताल लोकसूर्यचंद्रमा
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पाताल लोक में अंधेरा क्यों नहीं होता?

पाताल लोक में अंधेरा इसलिए नहीं होता क्योंकि महान नागों के फनों की दिव्य मणियाँ पूरे लोक को प्रकाशित करती रहती हैं।

पाताल लोकनागमणिप्रकाश
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पाताल लोक में कौन-कौन से महानाग रहते हैं?

पाताल में वासुकि, शंख, कुलिक, महाशंख, श्वेत, धनंजय, धृतराष्ट्र, शंखचूड़, कम्बल, अश्वतर और देवदत्त आदि महानाग रहते हैं।

महानागपातालवासुकि
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पाताल लोक को बिल-स्वर्ग क्यों कहा जाता है?

पाताल को बिल-स्वर्ग कहा जाता है क्योंकि वहाँ स्वर्ग से भी अधिक भोग, ऐश्वर्य, आनंद, भवन, उद्यान और विलासिता है।

बिल-स्वर्गपाताल लोकभूमिगत स्वर्ग
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पाताल लोक क्या है?

पाताल लोक पृथ्वी के नीचे स्थित सात अधोलोकों की संरचना है और सबसे निचले नागलोक का भी नाम है। यह नरक नहीं, बल्कि बिल-स्वर्ग है।

पाताल लोकअधोलोकबिल-स्वर्ग
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महातल लोक का पूरा महत्व क्या है?

महातल पांचवां अधोलोक है, जहाँ काद्रवेय नाग रहते हैं; यह बिल-स्वर्ग, विराट रूप, सगर पुत्र कथा, गंगा और गरुड़ भय से जुड़ा है।

महातल महत्वनागलोकबिल-स्वर्ग
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वायु पुराण और शिव पुराण में महातल का क्या वर्णन है?

वायु पुराण में महातल में हिरण्याक्ष और किर्मीर के नगर बताए गए हैं, जबकि शिव पुराण में इसे तल या महातल कहा गया है।

वायु पुराणशिव पुराणमहातल
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श्रीमद्भागवत पुराण में महातल का क्या वर्णन है?

श्रीमद्भागवत में महातल को काद्रवेय नागों का लोक बताया गया है, जहाँ तक्षक, कालिय, कुहक और सुषेण गरुड़ से भयभीत रहते हैं।

श्रीमद्भागवतमहातलकाद्रवेय
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महातल लोक में परिवार-मोह का क्या वर्णन है?

महातल के नाग पत्नी, संतान, मित्र और कुटुंब के मोह में भोग-विलास करते हैं, पर गरुड़ के भय से मुक्त नहीं होते।

महातल परिवार मोहनागकुटुंब
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महातल लोक के निवासी गरुड़ से डरकर भी सुख कैसे भोगते हैं?

महातल के नाग गरुड़ से भयभीत रहते हुए भी परिवार, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों में डूबकर विहार करते हैं।

गरुड़ भयमहातल निवासीभोग
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 54 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।