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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 53) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

चित्रगुप्त के लेखे से कोई जीव बच क्यों नहीं सकता?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका और श्रवण-श्रवणी की गवाही के कारण कोई जीव अपने कर्मों से बच नहीं सकता।

चित्रगुप्त लेखाकर्म साक्ष्यअग्रसंधानी
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यमराज के निर्णय में चित्रगुप्त की क्या भूमिका है?

चित्रगुप्त जीव का कर्म-वृत्तांत प्रस्तुत करते हैं, और उसी के आधार पर यमराज निर्णय देते हैं।

यमराज निर्णयचित्रगुप्तकर्म वृत्तांत
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चित्रगुप्त जीवों के कर्मों का लेखा कैसे रखते हैं?

चित्रगुप्त अग्रसंधानी पुस्तिका में कर्म दर्ज रखते हैं और श्रवण-श्रवणी देव हर गुप्त कर्म की सूचना पहुँचाते हैं।

चित्रगुप्तकर्म लेखाअग्रसंधानी
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चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका क्या है?

अग्रसंधानी चित्रगुप्त की दिव्य कर्म-पुस्तिका है, जिसमें हर जीव के जन्म से मृत्यु तक के कर्म दर्ज रहते हैं।

अग्रसंधानीचित्रगुप्तकर्म पुस्तिका
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चित्रगुप्त के हाथ में कलम, दवात और तलवार क्यों हैं?

कलम और दवात चित्रगुप्त के कर्म-अभिलेखक स्वरूप को दिखाते हैं, और तलवार न्याय-व्यवस्था से उनके संबंध को दर्शाती है।

चित्रगुप्तकलमदवात
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यमराज की सभा में कोई कर्म छिप क्यों नहीं सकता?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका और श्रवण-श्रवणी की गुप्तचर व्यवस्था के कारण यमराज की सभा में कोई कर्म छिप नहीं सकता।

कर्म लेखाचित्रगुप्तश्रवण देव
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यमराज की सभा को पारलौकिक न्यायालय क्यों कहा गया है?

यमराज की सभा में हर कर्म का अकाट्य लेखा प्रस्तुत होता है, इसलिए इसे पारलौकिक न्यायालय कहा गया है।

पारलौकिक न्यायालययमराज सभाचित्रगुप्त
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यमराज की सभा में कर्मों का मूल्यांकन कैसे होता है?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका में दर्ज कर्मों के आधार पर यमराज की सभा में जीवात्मा का मूल्यांकन होता है।

कर्म मूल्यांकनयमराज सभाचित्रगुप्त
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पुण्यात्माएँ यमराज की सभा में कितने समय तक रह सकती हैं?

कुछ पुण्यात्माएँ यमराज की सभा में एक महाकल्प तक निवास कर दिव्य भोग और सत्संग प्राप्त करती हैं।

पुण्यात्मायमराज सभामहाकल्प
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यमराज की सभा में पुण्यात्माओं का स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्मा के आने पर धर्मराज स्वयं आसन से उठकर स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक सभा में स्थान देते हैं।

पुण्यात्मायमराज सभाधर्मराज
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यमराज का निर्णय निष्पक्ष क्यों माना गया है?

यमराज का निर्णय चित्रगुप्त के अकाट्य कर्म-लेखे पर आधारित होता है, इसलिए वह पूर्णतः निष्पक्ष माना गया है।

यमराज निर्णयनिष्पक्ष न्यायचित्रगुप्त
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यमराज भगवान विष्णु के प्रतिनिधि कैसे हैं?

यमराज भगवान विष्णु की दण्ड व्यवस्था के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं।

यमराजभगवान विष्णुधर्मराज
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यमराज वैष्णव भक्तों पर अधिकार क्यों नहीं रखते?

वैष्णव भक्त अपने कर्म भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं, इसलिए उन पर यमराज का अधिकार नहीं होता और विष्णुदूत उन्हें वैकुण्ठ ले जाते हैं।

यमराजवैष्णव भक्तविष्णु भक्त
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यमराज पापी और पुण्यात्मा के साथ अलग व्यवहार क्यों करते हैं?

यमराज का व्यवहार जीवात्मा के कर्मों के अनुसार होता है; पापी को भय और पुण्यात्मा को सम्मान प्राप्त होता है।

यमराजपापी आत्मापुण्यात्मा
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पुण्यात्माओं को यमराज का सौम्य रूप क्यों दिखाई देता है?

सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन करने वाली पुण्यात्मा को यमराज शांत, सौम्य और देव रूप में दिखाई देते हैं।

यमराज सौम्य रूपपुण्यात्माधर्म
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यमराज का भयानक स्वरूप पापियों को क्यों दिखाई देता है?

पापी आत्मा अपने ही पाप कर्मों की छाया यमराज के भयानक स्वरूप में देखती है, इसलिए उसे वे डरावने दिखाई देते हैं।

यमराज स्वरूपपापी आत्मागरुड़ पुराण
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यमराज के 14 नाम कौन-कौन से हैं?

यमराज के 14 नाम हैं: यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुम्बर, दध्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त।

यमराज 14 नामधर्मराजवैवस्वत
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यमलोक में जीवात्मा के कर्मों का न्याय कैसे होता है?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका में दर्ज कर्मों के आधार पर यमराज जीवात्मा का निष्पक्ष निर्णय करते हैं।

यमलोक न्यायचित्रगुप्तकर्म लेखा
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यमलोक गर्भोदक सागर के ऊपर क्यों बताया गया है?

यमलोक को पृथ्वी के नीचे और गर्भोदक सागर से थोड़ा ऊपर, त्रिलोकी और गर्भोदक सागर के मध्य स्थित बताया गया है।

यमलोकगर्भोदक सागरभागवत पुराण
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यमलोक को पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में कैसे समझाया गया है?

पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान में यमलोक कर्म-फल, न्याय और यातना-देह द्वारा कर्म-शोधन का निश्चित पारलौकिक आयाम है।

यमलोकपौराणिक ब्रह्मांड विज्ञानकर्म फल
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यमलोक कहाँ स्थित है?

यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में, पृथ्वी के नीचे और गर्भोदक सागर के जल से थोड़ा ऊपर पितृलोक की परिधि में स्थित है।

यमलोक स्थानब्रह्मांड संरचनाभागवत पुराण
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यमलोक क्या है?

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

यमलोकगरुड़ पुराणकर्म न्याय
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अतल लोक में असुर बल की शक्तियाँ क्या हैं?

बल असुर की मायावी शक्ति से स्त्रियां उत्पन्न हुईं, जो पुरुषों को आकर्षित कर हाटक रस पिलाती हैं और उन्हें उन्मत्त बना देती हैं।

अतल लोकबल असुरमायावी शक्ति
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वायु पुराण में पाताल लोकों का वर्णन कैसे है?

वायु पुराण पाताल लोकों के नामों के साथ उनमें स्थित नगरों, दैत्यों और नाग अधिपतियों का विस्तृत वर्णन देता है।

वायु पुराणपाताल लोकअधोलोक
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श्रीमद्भागवत पुराण में सात अधोलोक कैसे बताए गए हैं?

श्रीमद्भागवत पुराण सात अधोलोकों को अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल बताकर उन्हें बिल-स्वर्ग कहता है।

श्रीमद्भागवत पुराणसात अधोलोकपाताल लोक
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 53 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।