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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 51) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

प्रेत बाधा से वंश का विनाश कैसे होता है?

श्राद्ध न होने पर प्रेत बाधा कुल को निःसंतान, दरिद्र, रोगी और जीविका-रहित बनाकर वंश विनाश तक ले जाती है।

प्रेत बाधावंश विनाशगरुड़ पुराण
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प्रेत बाधा से मति, प्रीति, रीति, लक्ष्मी और बुद्धि क्यों नष्ट होती है?

प्रेत बाधा में पूर्वज की अतृप्त आत्मा कष्ट देती है, जिससे विवेक, प्रेम, आचार, समृद्धि और बुद्धि का नाश होता है।

प्रेत बाधामतिप्रीति
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प्रेत बाधा परिवार को कैसे प्रभावित करती है?

प्रेत बाधा परिवार की मति, प्रीति, रीति, लक्ष्मी और बुद्धि नष्ट कर वंश को दरिद्र, रोगी और निःसंतान बना सकती है।

प्रेत बाधापरिवारवंश विनाश
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स्वप्न में विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना क्या संकेत देता है?

स्वप्न में विकृत मुख वाला व्यक्ति दिखना प्रेत बाधा और भटकते पूर्वज के संकेत के रूप में बताया गया है।

स्वप्न संकेतप्रेत बाधाविकृत मुख
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वैश्य धर्म से च्युत होने पर मैत्राक्षज्योतिक प्रेत क्यों बनता है?

छल-कपट व्यापार और अनुचित धन संचय से धर्मच्युत वैश्य मैत्राक्षज्योतिक प्रेत बनता है।

वैश्य धर्ममैत्राक्षज्योतिकछल कपट
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क्षत्रिय धर्म छोड़ने पर कटपूतन प्रेत क्यों बनता है?

प्रजा-रक्षा छोड़कर कायरता, निर्दयता और अधर्म अपनाने वाला क्षत्रिय कटपूतन प्रेत बनता है।

क्षत्रिय धर्मकटपूतनप्रजा रक्षा
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कटपूतन प्रेत कौन होता है?

कटपूतन धर्म से च्युत क्षत्रिय की प्रेत योनि है, जिसमें वह दुर्गंधयुक्त होकर मृत शरीरों और अशुद्ध पदार्थों का भक्षण करता है।

कटपूतन प्रेतक्षत्रियमनुस्मृति
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ब्राह्मण धर्म से च्युत होने पर उल्कामुख प्रेत क्यों बनता है?

ब्राह्मण का मुख वेद-मंत्रों के लिए है; उसके धर्म-विरोधी दुरुपयोग से वह उल्कामुख प्रेत योनि पाता है।

ब्राह्मण धर्मउल्कामुखप्रेत योनि
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उल्कामुख प्रेत कौन होता है?

उल्कामुख वह प्रेत है जो धर्म से च्युत ब्राह्मण को मिलता है; उसके मुख से अग्नि निकलती है और वह वमनित मल खाने को विवश होता है।

उल्कामुख प्रेतमनुस्मृतिब्राह्मण
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मनुस्मृति में वर्ण-आधारित प्रेत योनियाँ क्या हैं?

मनुस्मृति में ब्राह्मण के लिए उल्कामुख, क्षत्रिय के लिए कटपूतन, वैश्य के लिए मैत्राक्षज्योतिक और शूद्र के लिए चैलाशक प्रेत बताए गए हैं।

मनुस्मृतिवर्ण आधारित प्रेतउल्कामुख
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गर्भपात करवाने वाले को शास्त्रों में क्या दंड बताया गया है?

गर्भपात करवाने वाला घोर यातना के बाद प्रेत योनि प्राप्त कर सकता है और पुनर्जन्म में रोगी या नीच अवस्था पा सकता है।

गर्भपातप्रेत योनिविष्णु पुराण
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माता-पिता का अपमान करने वाले को क्या फल मिलता है?

माता-पिता और गुरुजनों का तिरस्कार करने वाला कालसूत्र नरक की यातना और आगे प्रेत योनि जैसी गति पा सकता है।

माता पिता अपमानकालसूत्र नरकप्रेत योनि
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गुरुपत्नी गमन का फल क्या बताया गया है?

गुरुपत्नी गमन करने वाला शाल्मली नरक में कांटों से भरे जलते वृक्षों का दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।

गुरुपत्नी गमनमहापातकशाल्मली नरक
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हत्या के बाद आत्मा प्रेत रूप में क्यों भटकती है?

हत्या अकाल और हिंसक मृत्यु है; अधूरी आयु, आसक्ति और संस्कार-अभाव से आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

हत्याप्रेत योनिअकाल मृत्यु
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सर्पदंश या विषपान से मृत्यु प्रेत योनि का कारण क्यों है?

सर्पदंश और विषपान अकाल मृत्यु हैं; अधूरी आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत योनि में जा सकती है।

सर्पदंशविषपानअकाल मृत्यु
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जल में डूबने से मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बन सकती है?

जल में डूबना अकाल मृत्यु है; शेष आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।

जल में डूबनाअकाल मृत्युप्रेत योनि
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कौन-कौन सी मृत्यु अकाल मृत्यु मानी गई है?

जल में डूबना, अग्नि में जलना, गिरकर मरना, सर्पदंश, विषपान, आत्महत्या और हत्या अकाल मृत्यु मानी गई हैं।

अकाल मृत्युगरुड़ पुराणप्रेत योनि
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गरुड़ पुराण में प्रेत योनि के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण प्रेत को वायव्य शरीर, तीव्र भूख-प्यास और पिण्डदान के अभाव से उत्पन्न दुखद अवस्था बताता है।

गरुड़ पुराणप्रेत योनिपिण्डदान
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पिण्डदान न होने पर आत्मा प्रेत क्यों बनती है?

पिण्डदान और श्राद्ध न होने से आत्मा को पितृगति नहीं मिलती, इसलिए वह प्रेत बनकर दुखपूर्वक भटकती है।

पिण्डदानप्रेत योनिगरुड़ पुराण
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प्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?

प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।

प्रेत शरीरवायव्य शरीरसूक्ष्म शरीर
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मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बनती है?

आत्मा प्रेत तब बनती है जब श्राद्ध-पिण्डदान न हो, अकाल मृत्यु हो या घोर पापों के कारण उसे ऊर्ध्व गति न मिले।

मृत्यु के बाद आत्माप्रेत योनिश्राद्ध
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प्रेत योनि क्या है?

प्रेत योनि वह अवस्था है जिसमें शरीर छोड़ चुकी आत्मा नई योनि या पितृलोक न पाकर वायव्य सूक्ष्म देह में भूख-प्यास से भटकती रहती है।

प्रेत योनिगरुड़ पुराणसूक्ष्म शरीर
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यमलोक और कर्म-विपाक से जीवन को क्या सीख मिलती है?

यमलोक सिखाता है कि कोई कर्म छिपता नहीं; पाप का फल नरक, योनियों और रोगों में मिलता है, जबकि धर्म और भक्ति श्रेष्ठ गति देते हैं।

यमलोककर्म विपाकजीवन शिक्षा
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असिपत्रवन नरक में क्या यातना होती है?

असिपत्रवन में वेद-विरुद्ध पाखंडियों को तलवार जैसे पत्तों वाले वन में दौड़ाया जाता है, जिससे शरीर कट जाता है।

असिपत्रवन नरकनरक यातनावेद विरुद्ध आचरण
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कालसूत्र नरक इतना भयानक क्यों है?

कालसूत्र नरक में माता-पिता या ब्राह्मणों से द्रोह करने वाले पापी को दहकते तांबे के मैदान में नंगा दौड़ाया जाता है।

कालसूत्र नरकनरकमाता पिता द्रोह
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यमपुरी में प्रवेश के बाद आत्मा का न्याय कैसे होता है?

यमपुरी में चित्रगुप्त कर्म-वृत्तांत पढ़ते हैं और यमराज उसी के आधार पर आत्मा का न्याय करते हैं।

यमपुरीआत्मा न्यायचित्रगुप्त
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 51 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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