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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 50) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद क्या है?

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में सरोवर के यक्ष ने युधिष्ठिर से धर्म-जीवन के गूढ़ प्रश्न पूछे और उत्तरों से संतुष्ट होकर पांडवों को जीवित किया।

यक्ष युधिष्ठिर संवादमहाभारतअरण्य पर्व
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यक्ष कभी परोपकारी और कभी भयंकर क्यों होते हैं?

यक्षों में रक्षक और तामसिक दोनों प्रवृत्तियाँ हैं; इसलिए वे कभी परोपकारी और कभी भयंकर रूप में वर्णित होते हैं।

यक्षपरोपकारीभयंकर
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यक्षों का स्वभाव द्वैतवादी क्यों बताया गया है?

यक्ष कभी प्रकृति के परोपकारी रक्षक होते हैं और कभी भयंकर तामसिक रूप में यात्रियों को छलते या हिंसक होते हैं।

यक्ष स्वभावद्वैतवादीपरोपकारी
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भूत मृत्यु-स्थल पर क्यों रहता है?

भूत अपने मृत्यु-स्थल या मोह-स्थल पर इसलिए रहता है क्योंकि उसका सूक्ष्म शरीर आसक्ति और अपूर्ण इच्छा से वहीं अटक जाता है।

भूतमृत्यु स्थलआसक्ति
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हिंसक मृत्यु के बाद भूत योनि क्यों मिलती है?

हिंसक और अचानक मृत्यु में आत्मा मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पाती, इसलिए सूक्ष्म शरीर पृथ्वी पर अटककर भूत बन सकता है।

हिंसक मृत्युभूत योनिअचानक मृत्यु
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भूत और प्रेत में क्या अंतर है?

प्रेत संस्कार-अभाव से बनी मुक्ति चाहने वाली अवस्था है, जबकि भूत तीव्र आसक्ति या बदले की इच्छा से पृथ्वी पर रुकी आत्मा है।

भूत प्रेत अंतरप्रेतभूत
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पिशाच बाधा दूर करने के लिए क्या उपाय बताए गए हैं?

पिशाच बाधा दूर करने के लिए तंत्र-मंत्र, शिव-उपासना और कुछ अनुष्ठानों में पिशाचों को शांत करने की बलि बताई गई है।

पिशाच बाधा उपायशिव उपासनातंत्र मंत्र
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पिशाच बाधा से उन्माद और मतिभ्रम कैसे होता है?

पिशाच विचारों को दूषित कर देता है, जिससे व्यक्ति उन्माद, मतिभ्रम और मानसिक-शारीरिक रोगों से पीड़ित होता है।

पिशाच बाधाउन्मादमतिभ्रम
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पिशाच मनुष्य को कैसे प्रभावित करता है?

पिशाच मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर विचारों को दूषित करता है और उन्माद, मतिभ्रम तथा रोग उत्पन्न कर सकता है।

पिशाच बाधामनुष्य पर प्रभावउन्माद
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धर्म, वेद और गुरु की निंदा पिशाच योनि का कारण क्यों है?

धर्म, वेद, गुरु और देवताओं की निंदा जीव को तामसिक और पाखंडी बनाती है, इसलिए पिशाच योनि मिलती है।

धर्म निंदावेद निंदागुरु निंदा
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विश्वासघात करने वाला पिशाच योनि क्यों पाता है?

आश्रितों का त्याग, संकल्प-भंग और अन्नदाता से विश्वासघात जीव को बारंबार पिशाच योनि में ले जाते हैं।

विश्वासघातपिशाच योनिअन्नदाता
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झूठी गवाही देने वाले को पिशाच योनि क्यों मिलती है?

झूठी गवाही निर्दोष को दंड दिलाती है और न्याय का नाश करती है, इसलिए ऐसा जीव पिशाच योनि पाता है।

झूठी गवाहीपिशाच योनिविश्वासघात
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असहाय लोगों की संपत्ति छीनने वाला पिशाच क्यों बनता है?

स्त्री, बालक, वृद्ध और रोगी जैसे असहायों की संपत्ति छीनना निर्दय पाप है, जिससे पिशाच योनि मिलती है।

असहाय संपत्तिपिशाच योनिस्त्री बालक वृद्ध
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अत्यधिक अनैतिक जीवन पिशाच योनि का कारण क्यों है?

घोर अनैतिकता, व्यसन, पर-स्त्री गमन और उन्मादपूर्ण मृत्यु सूक्ष्म शरीर को पिशाच योनि में ले जाती है।

अनैतिक जीवनपिशाच योनिव्यसन
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अथर्ववेद में पिशाचों के बारे में क्या प्रार्थना की गई है?

अथर्ववेद में पृथ्वी माता से पिशाचों, राक्षसों और अन्य अमानवीय शक्तियों को मनुष्यों से दूर रखने की प्रार्थना की गई है।

अथर्ववेदपिशाचराक्षस
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पिशाच प्रेत से अधिक तामसिक क्यों माना गया है?

पिशाच मांस-मल भक्षक, श्मशानवासी, हिंसक और मनुष्य को उन्माद में डालने वाला होता है, इसलिए प्रेत से अधिक तामसिक है।

पिशाचप्रेततामसिक
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प्रेत योनि से मुक्ति का उपाय क्या बताया गया है?

प्रेत मुक्ति के उपाय हैं: श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, पिण्डदान, गया-श्राद्ध और श्रीमद्भागवत का श्रवण।

प्रेत मुक्तिश्राद्धपिण्डदान
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सात गांठों वाले बांस का धुन्धुकारी कथा में क्या महत्व है?

धुन्धुकारी का प्रेत सात गांठों वाले बांस में था; भागवत कथा से रोज एक गांठ फटी और सातवें दिन उसे मुक्ति मिली।

सात गांठों वाला बांसधुन्धुकारीभागवत कथा
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भागवत कथा से धुन्धुकारी को मुक्ति कैसे मिली?

गोकर्ण के सात दिन के भागवत पारायण से बांस की सात गांठें फटीं और धुन्धुकारी प्रेत योनि से मुक्त होकर वैकुंठ गया।

भागवत कथाधुन्धुकारीप्रेत मुक्ति
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धुन्धुकारी को गया श्राद्ध से मुक्ति क्यों नहीं मिली?

धुन्धुकारी के पाप अत्यंत भयंकर थे, इसलिए गया श्राद्ध से मुक्ति नहीं मिली; उसे भागवत श्रवण से मुक्ति मिली।

धुन्धुकारीगया श्राद्धप्रेत मुक्ति
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गोकर्ण कौन थे?

गोकर्ण गाय के गर्भ से जन्मे सात्विक दिव्य पुत्र थे, जिन्होंने भागवत पारायण से धुन्धुकारी को प्रेत योनि से मुक्त कराया।

गोकर्णधुन्धुकारीभागवत महापुराण
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 50 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।