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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 52) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

यमपुरी के रत्नजड़ित द्वार क्या दर्शाते हैं?

यमपुरी के रत्नजड़ित द्वार पुण्य, दान, सत्य, पितृभक्ति, अहिंसा और योग-ज्ञान के आधार पर मिलने वाले सम्मान को दिखाते हैं।

यमपुरी द्वाररत्नजड़ितपश्चिम द्वार
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पुण्यात्माओं का यमपुरी में स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्माओं का धर्मराज स्वयं सम्मान करते हैं; उन्हें रथ-विमानों से लाया जाता है और देव-गंधर्व पुष्पवर्षा करते हैं।

पुण्यात्मायमपुरीस्वागत
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यमपुरी के द्वार कर्मों के आधार पर कैसे मिलते हैं?

यमपुरी में प्रवेश पाप, दान, सत्य, पितृसेवा, अहिंसा और योग-ज्ञान जैसे कर्मों के आधार पर अलग-अलग द्वारों से होता है।

यमपुरी द्वारकर्मपुण्य
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यमपुरी का पूर्व द्वार किन योगियों के लिए है?

पूर्व द्वार सिद्ध योगियों, ऋषियों, ज्ञानियों और संबुद्ध आत्माओं के लिए है, जिनका पुष्पवर्षा से स्वागत होता है।

यमपुरी पूर्व द्वारयोगीऋषि
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यमपुरी का उत्तर द्वार क्यों श्रेष्ठ माना गया है?

उत्तर द्वार सत्यवादियों, पितृभक्तों और अहिंसा पालन करने वालों के लिए है, इसलिए इसे उत्तम माना गया है।

यमपुरी उत्तर द्वारसत्यवादीपितृभक्त
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यमपुरी का पश्चिम द्वार किन आत्माओं के लिए है?

पश्चिम द्वार उन दानवीर आत्माओं के लिए है जिन्होंने दान-पुण्य, धर्म रक्षा, गौदान, भूमि दान या विद्या दान किया हो।

यमपुरी पश्चिम द्वारदानवीरगौदान
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यमपुरी का दक्षिण द्वार किसके लिए है?

दक्षिण द्वार पापियों के लिए है, जहाँ से झूठ, परस्त्रीगमन, भ्रूणहत्या और अन्य पाप करने वालों को यमदूत ले जाते हैं।

यमपुरी दक्षिण द्वारपापी आत्मायमलोक
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वैतरणी नदी इतनी भयानक क्यों है?

वैतरणी भयानक है क्योंकि उसमें जल नहीं, उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं तथा यमदूत पापियों को उसमें धकेलते हैं।

वैतरणी नदीभयानक नदीयमलोक
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यममार्ग में पिंडदान न होने पर आत्मा को क्या कष्ट होता है?

पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है, विलाप करती है और अपने सांसारिक मोह पर पश्चाताप करती है।

पिंडदानयममार्गआत्मा कष्ट
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विचित्रभवन में आत्मा का अनुभव कैसा होता है?

विचित्रभवन यममार्ग का एक नगर है, जहाँ राजा विचित्र है और आत्मा अपनी लंबी कर्म-यात्रा में आगे बढ़ती है।

विचित्रभवनयममार्गगरुड़ पुराण
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सौरिपुर क्या है?

सौरिपुर यममार्ग का दूसरा नगर है, जहाँ यमराज का छोटा भाई सौरि शासन करता है और आत्मा द्वितीय मास का पिंड ग्रहण करती है।

सौरिपुरयममार्गयमराज
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सौम्यपुर में आत्मा को क्या प्राप्त होता है?

सौम्यपुर में आत्मा को परिजनों द्वारा दिया गया प्रथम पिंड प्राप्त होता है और वह परिवार को याद कर रोती है।

सौम्यपुरयममार्गप्रथम पिंड
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यममार्ग के 16 नगर कौन-कौन से हैं?

यममार्ग के 16 नगर हैं: सौम्यपुर, सौरिपुर, नगेन्द्रभवन, गंधर्वपुर, शैलागम, क्रौंचपुर, क्रूरपुर, विचित्रभवन, बह्वापद, दुःखदपुर, नानाक्रन्दपुर, सुतप्तभवन, रौद्रपुर, पयोवर्षणपुर, शीताढ्यपुर और बहुभीतिपुर।

यममार्ग 16 नगरगरुड़ पुराणसौम्यपुर
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यममार्ग में श्राद्ध और पिंडदान का क्या महत्व है?

यममार्ग में पिंडदान आत्मा को नगरों में विश्राम और पोषण देता है; पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है।

श्राद्धपिंडदानयममार्ग
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यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा को तपती रेत, भूख-प्यास, हिंसक जीवों की पीड़ा, यमदूतों के कोड़े और परिवार-वियोग का दुख सहना पड़ता है।

यममार्ग कष्टपापी आत्मागरुड़ पुराण
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यममार्ग पापी आत्मा के लिए इतना कठिन क्यों होता है?

यममार्ग पापी आत्मा के लिए इसलिए कठिन है क्योंकि वहाँ तपती बालू, भूख-प्यास, अंधकार, हिंसक जीव और यमदूतों के कोड़े मिलते हैं।

यममार्गपापी आत्मायमदूत
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यममार्ग की दूरी 86,000 योजन क्यों बताई गई है?

गरुड़ पुराण में मृत्युलोक से यमलोक की दूरी ८६,००० योजन बताई गई है, इसलिए यममार्ग इतना लंबा माना गया है।

यममार्ग दूरी86000 योजनगरुड़ पुराण
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अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर अंगूठे के आकार की वह देह है जिसे यमदूत शरीर से निकालते हैं और जिससे आत्मा यातनाएँ भोगती है।

अंगुष्ठमात्रसूक्ष्म शरीरयातना देह
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मृत्यु के समय पापी को यमदूत कैसे दिखाई देते हैं?

पापी को मृत्यु के समय विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले यमदूत दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वह भय से कांप उठता है।

मृत्यु समययमदूतपापी आत्मा
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श्रवण और श्रवणी कर्म-साक्षी क्यों माने गए हैं?

श्रवण-श्रवणी हर गुप्त कर्म को देखते-सुनते और यमराज के सामने प्रमाण देते हैं, इसलिए वे कर्म-साक्षी हैं।

श्रवण श्रवणीकर्म साक्षीयमलोक
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यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था कैसे काम करती है?

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था श्रवण-श्रवणी देवों से चलती है, जो हर गुप्त कर्म देखकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

यमलोक गुप्तचर व्यवस्थाश्रवणश्रवणी
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श्रवण देवों की पूजा करने से मृत्यु के समय क्या लाभ होता है?

सत्य, दान-पुण्य और श्रवण देवों की पूजा करने वाले पर वे प्रसन्न होते हैं और मृत्यु के समय कष्ट नहीं होने देते।

श्रवण देव पूजामृत्यु समयदान पुण्य
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यमराज के सामने श्रवण देव गवाह कैसे बनते हैं?

यदि आत्मा पाप नकारती है, तो श्रवण-श्रवणी देव यमराज के सामने प्रत्यक्ष गवाह बनकर उसके कर्मों का प्रमाण देते हैं।

श्रवण देवयमराजगवाह
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बंद कमरे में किए गए कर्म भी यमलोक तक कैसे पहुँचते हैं?

श्रवण और श्रवणी देव बंद कमरे, अंधकार और एकांत में किए गए कर्म भी देख-सुनकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

गुप्त कर्मश्रवण देवश्रवणी
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श्रवण और श्रवणी चित्रगुप्त की सहायता कैसे करते हैं?

श्रवण-श्रवणी हर कर्म को देखकर-सुनकर चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुँचाते हैं और यमराज के सामने गवाह बनते हैं।

श्रवण श्रवणीचित्रगुप्तकर्म लेखा
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श्रवण देव गुप्त कर्मों को कैसे जानते हैं?

श्रवण देव ब्रह्मा के कानों और नेत्रों के प्रतीक हैं, इसलिए वे गुप्त से गुप्त कर्म भी देख-सुन लेते हैं।

श्रवण देवगुप्त कर्मकर्म साक्षी
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श्रवण देवों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा जी ने लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखने के लिए अपनी तपस्या से तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देव उत्पन्न किए।

श्रवण देवउत्पत्तिब्रह्मा
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यमलोक में चित्रगुप्त का न्याय अंतिम क्यों माना जाता है?

चित्रगुप्त का कर्म-लेखा अकाट्य साक्ष्य है, इसलिए यमलोक में उनका न्याय अंतिम माना जाता है।

चित्रगुप्त न्याययमलोकअंतिम साक्ष्य
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 52 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।