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दिव्यास्त्र प्रश्नोत्तर (पेज 7) — 418 प्रश्न

दिव्यास्त्र से जुड़े 418 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 418 प्रश्न

ब्रह्मास्त्र कैसे चलाया जाता था

ब्रह्मास्त्र को विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित कर धनुष से चलाया जाता था। गुरु-शिष्य परंपरा में मंत्र-दीक्षा मिलने के बाद ही इसका संधान संभव था। मंत्र जानने वाला इसे वापस भी ले सकता था।

ब्रह्मास्त्र विधिमंत्रधनुष
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ब्रह्मास्त्र किसने बनाया

ब्रह्मास्त्र के निर्माणकर्ता स्वयं परमपिता ब्रह्मा हैं। यह दैत्यनाश के लिए बनाया गया था। महाभारत में द्रोण, अश्वत्थामा, अर्जुन, कर्ण आदि गिने-चुने महायोद्धाओं के पास था।

ब्रह्मास्त्र निर्माणब्रह्मादैत्य नाश
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ब्रह्मास्त्र क्या होता है

ब्रह्मास्त्र ब्रह्मा की शक्ति से संचालित अमोघ दिव्यास्त्र है। जिस पर चले उसका नाश निश्चित। दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से प्रलय का भय था। जहाँ प्रयुक्त हो वहाँ 12 वर्ष दुर्भिक्ष।

ब्रह्मास्त्रब्रह्मादिव्यास्त्र
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नारायणास्त्र क्या है

नारायणास्त्र भगवान विष्णु का अजेय दिव्यास्त्र है जो एक साथ हजारों अस्त्र चलाता है। इसे रोकने का एकमात्र उपाय पूर्ण समर्पण है। महाभारत में अश्वत्थामा ने इसे पांडवों पर चलाया था।

नारायणास्त्रविष्णु अस्त्रमहाभारत
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मनुष्यों में वज्रास्त्र की शक्ति किसने प्राप्त की?

मनुष्यों में वज्रास्त्र की शक्ति प्राप्त करने वाले एकमात्र योद्धा अर्जुन थे, जिन्होंने इससे तीन करोड़ निवातकवचों का संहार किया।

वज्रास्त्रअर्जुनमानव
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वज्रास्त्र कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

वज्रास्त्र को जीता, चुराया या बनाया नहीं जा सकता। यह केवल योग्यता और धर्म के मार्ग पर चलकर प्राप्त होने वाला दिव्य वरदान है।

वज्रास्त्रप्राप्तिवरदान
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क्या इंद्रजीत ने कभी वज्र का प्रयोग किया था?

नहीं, इंद्रजीत ने कभी वज्र का प्रयोग नहीं किया। उसने अपनी विजय ब्रह्मास्त्र और नागपाश से प्राप्त की थी। उसका नाम केवल इंद्र पर विजय का प्रतीक है।

इंद्रजीतमेघनादवज्र
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अर्जुन ने निवातकवच राक्षसों को कैसे मारा?

अर्जुन ने मातलि की सलाह पर वज्रास्त्र का आह्वान किया जिसने बिजली के प्रचंड प्रहारों से तीन करोड़ निवातकवचों का क्षण भर में संहार कर दिया।

अर्जुननिवातकवचवज्रास्त्र
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इंद्र ने हनुमान को क्या वरदान दिया?

इंद्र ने हनुमान को वरदान दिया कि भविष्य में उनका वज्र हनुमान को कभी कोई हानि नहीं पहुँचाएगा और हनुमान सभी देवों से अजेय रहेंगे।

इंद्रहनुमानवरदान
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अर्जुन ने वज्रास्त्र का उपयोग किस काम के लिए किया था?

अर्जुन ने वज्रास्त्र का उपयोग राक्षसों की माया नष्ट करने और तीन करोड़ निवातकवच राक्षसों का संहार करने के लिए किया था।

अर्जुनवज्रास्त्रमाया
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वज्र की क्या-क्या शक्तियाँ हैं?

वज्र की शक्तियाँ हैं — अत्यधिक विनाशकारी बल, बिजली और गरज पर नियंत्रण, अभेद्य किलों और पहाड़ों को तोड़ना, और माया व भ्रम को नष्ट करना।

वज्रशक्तियाँक्षमताएँ
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महर्षि दधीचि ने बलिदान से पहले क्या कहा था?

दधीचि ने कहा — 'यह शरीर तो एक न एक दिन नष्ट हो ही जाएगा। यदि यह किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति कर सके, तो ऐसा ही हो।' यह कहकर उन्होंने योग शक्ति से प्राण त्याग दिए।

दधीचिबलिदानवचन
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महर्षि दधीचि ने अपनी देह त्यागने का निर्णय क्यों लिया?

महर्षि दधीचि ने परोपकार के सर्वोच्च सिद्धांत को अपनाते हुए देह त्यागने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि यदि यह शरीर किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति कर सके तो इसे त्यागना उचित है।

दधीचिबलिदानपरोपकार
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महर्षि दधीचि की अस्थियाँ इतनी शक्तिशाली क्यों थीं?

एक कथा के अनुसार दधीचि ने देवताओं के अस्त्रों को घोलकर पी लिया था, दूसरी कथा के अनुसार उनकी कठोर तपस्या और शिव के वरदान से उनकी अस्थियाँ इतनी शक्तिशाली थीं।

दधीचिअस्थियाँशक्ति
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वृत्रासुर को कौन सा वरदान मिला था?

वृत्रासुर को ब्रह्मा से वरदान था कि उसे किसी भी धातु, लकड़ी या पत्थर के अस्त्र से — न सूखे से, न गीले से, न दिन में, न रात में — नहीं मारा जा सकता।

वृत्रासुरवरदानब्रह्मा
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वृत्रासुर ने ब्रह्मांड में क्या तबाही मचाई?

वृत्रासुर ने देवों को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार किया और संसार का सारा जल निगल लिया, जिससे पूरे ब्रह्मांड में भयंकर सूखा पड़ गया।

वृत्रासुरतबाहीसूखा
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वृत्रासुर का जन्म कैसे हुआ?

इंद्र द्वारा विश्वरूप के वध के बाद उनके पिता त्वष्टा ने प्रतिशोध के लिए महायज्ञ किया। उस यज्ञ की अग्नि से वृत्रासुर का जन्म हुआ।

वृत्रासुरजन्मत्वष्टा
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वृत्रासुर कौन था?

वृत्रासुर त्वष्टा प्रजापति के यज्ञ से उत्पन्न एक भयानक असुर था जिसने देवों को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार किया और संसार का सारा जल निगल लिया।

वृत्रासुरअसुरत्वष्टा
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वज्र कैसा दिखता है?

वज्र को दो सिरों वाली गदा या राजदंड के रूप में चित्रित किया जाता है। यह महर्षि दधीचि की रीढ़ की हड्डी से बना एक अनूठा दिव्य अस्त्र है।

वज्रस्वरूपआकार
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वज्रास्त्र क्या है?

वज्रास्त्र देवों के राजा इंद्र का व्यक्तिगत दिव्य आयुध है जो उनकी अदम्य शक्ति और अधिकार का प्रतीक है। इसका निर्माण महर्षि दधीचि की अस्थियों से हुआ था।

वज्रास्त्रवज्रदिव्यास्त्र
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अश्वत्थामा के नारायणास्त्र के समय वरुणास्त्र का प्रयोग क्यों किया गया?

जब अश्वत्थामा के नारायणास्त्र से भीम घिर गए तब अर्जुन और कृष्ण ने भीम तक पहुँचने के लिए वरुणास्त्र का प्रयोग किया था।

वरुणास्त्रनारायणास्त्रअश्वत्थामा
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द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर वरुणास्त्र चलाया तो क्या हुआ?

द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर वरुणास्त्र चलाया लेकिन युधिष्ठिर ने अपने वरुणास्त्र से ही उसे निष्फल कर दिया, जो उनके अस्त्र ज्ञान का प्रमाण है।

द्रोणाचार्ययुधिष्ठिरवरुणास्त्र
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अर्जुन ने रंगभूमि में वरुणास्त्र का प्रयोग कैसे किया?

रंगभूमि में अर्जुन ने पहले आग्नेयास्त्र से भयंकर अग्नि उत्पन्न की, फिर वरुणास्त्र से जल वर्षा करके उसे शांत किया। यह उनके असाधारण दिव्यास्त्र ज्ञान का प्रदर्शन था।

अर्जुनवरुणास्त्ररंगभूमि
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और कौन-कौन से योद्धाओं के पास वरुणास्त्र था?

वरुणास्त्र के धारकों में द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर, सात्यकि, शिखंडी, रावण और वृषकेतु (कर्ण के पुत्र) शामिल थे।

वरुणास्त्रधारकयुधिष्ठिर
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भीष्म ने वरुणास्त्र का प्रयोग किस पर किया?

भीष्म ने शाल्व के घोड़ों पर वरुणास्त्र का प्रयोग किया था जिससे वे मूर्छित हो गए। यह अस्त्र शत्रु को अक्षम करने के लिए भी प्रयोग किया जाता था।

भीष्मवरुणास्त्रशाल्व
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कर्ण को वरुणास्त्र कैसे मिला?

कर्ण को वरुणास्त्र कुछ मतों के अनुसार परशुराम से मिला था जबकि अन्य मतों के अनुसार विभिन्न यक्षों, राक्षसों और देवों से भी उन्होंने अस्त्र प्राप्त किए थे।

कर्णवरुणास्त्रपरशुराम
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वरुणास्त्र के प्रयोग से आकाश में क्या होता था?

वरुणास्त्र के प्रयोग से चारों ओर भयानक काले बादल छा जाते थे, भीषण जल वृष्टि होती थी और घना अंधकार फैल जाता था जिससे शत्रु का युद्ध करना कठिन हो जाता था।

वरुणास्त्रकाले बादलजल वृष्टि
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वरुणास्त्र से घोड़ों और योद्धाओं पर क्या प्रभाव पड़ता था?

वरुणास्त्र के जल प्रवाह से घोड़े और योद्धा मूर्छित हो सकते थे या बह सकते थे। भीष्म ने शाल्व के घोड़ों को मूर्छित करने के लिए इसका प्रयोग किया था।

वरुणास्त्रघोड़ेमूर्छित
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वरुणास्त्र आग्नेयास्त्र का प्रतिकार कैसे करता था?

वरुणास्त्र की जल वर्षा आग्नेयास्त्र की अग्नि को निष्प्रभावी कर देती थी। अर्जुन ने रंगभूमि में पहले आग्नेयास्त्र से अग्नि उत्पन्न की फिर वरुणास्त्र से शांत की।

वरुणास्त्रआग्नेयास्त्रप्रतिकार
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वरुणास्त्र की मुख्य शक्ति क्या थी?

वरुणास्त्र की मुख्य शक्ति जल प्रलय उत्पन्न करना था। इससे भारी वर्षा, बाढ़ और प्रचंड जल-प्रवाह होता था जो पूरी सेनाओं को प्रभावित कर सकता था।

वरुणास्त्रमुख्य शक्तिजल प्रलय
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वरुणास्त्र किस प्रकार के दिव्यास्त्रों की श्रेणी में आता है?

वरुणास्त्र प्राकृतिक शक्तियों (जल, अग्नि, वायु) का आह्वान करने वाले दिव्यास्त्रों की श्रेणी में आता है। इसका उल्लेख महाभारत के द्रोण पर्व और कर्ण पर्व में मिलता है।

वरुणास्त्रप्राकृतिक शक्तिजल
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वरुण देव कौन हैं?

वरुण देव जल के अधिपति, ऋतु के संरक्षक और सत्य के प्रतीक हैं। वे पश्चिम दिशा के लोकपाल हैं और उनका वाहन मकर (मगरमच्छ) है।

वरुण देवजल अधिपतिपश्चिम दिशा
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वरुणास्त्र क्या है?

वरुणास्त्र जल के देवता वरुण की शक्ति का दिव्यास्त्र है जो जल प्रलय उत्पन्न कर सकता है और आग्नेयास्त्र की अग्नि को शांत करने में सक्षम है।

वरुणास्त्रदिव्यास्त्रवरुण देव
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वरुणास्त्र का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?

वरुणास्त्र जल की दोहरी प्रकृति का प्रतीक है — जल जीवनदायी भी है और विनाशकारी भी। यह ब्रह्मांडीय व्यवस्था को बनाए रखने का भी प्रतीक है।

वरुणास्त्रप्रतीकजल
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ब्रह्मास्त्र और वरुणास्त्र में क्या संबंध था?

ब्रह्मास्त्र जैसे उच्चतर और अधिक शक्तिशाली अस्त्र वरुणास्त्र को निष्फल कर सकते थे। यह दिव्यास्त्रों के पदानुक्रम को दर्शाता है।

ब्रह्मास्त्रवरुणास्त्रपदानुक्रम
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वरुणास्त्र का प्रतिकार कैसे किया जा सकता था?

वरुणास्त्र का सबसे प्रमुख प्रतिकार वायव्यास्त्र था। अर्जुन ने कर्ण के वरुणास्त्र से उत्पन्न बादलों को वायव्यास्त्र से उड़ाकर इसे निष्फल किया था।

वरुणास्त्रप्रतिकारवायव्यास्त्र
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लक्ष्मण का मेघनाद पर वरुणास्त्र प्रयोग क्यों विफल रहा?

लक्ष्मण का वरुणास्त्र मेघनाद पर विफल रहा। इसका कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन यह मेघनाद की मायावी शक्तियों या दैवीय हस्तक्षेप के अधीन होने का संकेत हो सकता है।

लक्ष्मणमेघनादवरुणास्त्र
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दिव्यास्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दिव्यास्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दिव्यास्त्र को गहराई से समझने का तरीका

दिव्यास्त्र के पेज 7 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

418 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।