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दिव्यास्त्र प्रश्नोत्तर (पेज 6) — 418 प्रश्न

दिव्यास्त्र से जुड़े 418 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 418 प्रश्न

भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया तो क्या हुआ?

भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया था लेकिन परशुराम ने वरुणास्त्र से उसे शांत कर दिया। यह गुरु-शिष्य के बीच दिव्यास्त्र द्वंद्व का उदाहरण है।

भीष्मपरशुरामआग्नेयास्त्र
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अर्जुन ने अंगारपर्ण गंधर्व पर आग्नेयास्त्र क्यों चलाया?

वनवास के प्रारंभ में अर्जुन ने अंगारपर्ण (चित्रांगद) गंधर्व को पराजित करने के लिए आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया था।

अर्जुनआग्नेयास्त्रअंगारपर्ण
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अर्जुन ने खांडव वन दहन में आग्नेयास्त्र का प्रयोग क्यों किया?

अग्नि देव को तृप्त करने के लिए अर्जुन ने श्रीकृष्ण के साथ खांडव वन दहन में आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया था।

अर्जुनआग्नेयास्त्रखांडव वन
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मेघनाद के पास आग्नेयास्त्र कैसे आया?

मेघनाद ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके आग्नेयास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र प्राप्त किए थे जिनका प्रयोग उसने राम-लक्ष्मण के विरुद्ध किया।

मेघनादइंद्रजीतआग्नेयास्त्र
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श्रीराम को आग्नेयास्त्र कैसे मिला?

श्रीराम को आग्नेयास्त्र उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र से मिला था जो उन्हें राक्षसों से यज्ञ की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए दिया गया था।

श्रीरामआग्नेयास्त्रविश्वामित्र
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श्रीराम ने समुद्र के संदर्भ में आग्नेयास्त्र का प्रयोग क्यों नहीं किया?

समुद्र देव के क्षमा मांगकर सहायता का वचन देने पर श्रीराम ने आग्नेयास्त्र नहीं चलाया। यह उनकी विवेकशीलता और अनावश्यक विनाश से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

श्रीरामआग्नेयास्त्रसमुद्र
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ऋषि और्व और राजा सगर का आग्नेयास्त्र से क्या संबंध था?

ऋषि और्व ने राजा सगर को आग्नेयास्त्र दिया था जिससे उन्होंने हैहय और तालजंघ जैसे उपद्रवी वंशों का विनाश किया। यह अस्त्र के प्राचीनतम प्रयोगों में से एक है।

ऋषि और्वराजा सगरआग्नेयास्त्र
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द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र कहाँ से मिला?

द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र की शिक्षा महर्षि अग्निवेश से प्राप्त हुई थी। यह ज्ञान आगे द्रोणाचार्य से अर्जुन और अश्वत्थामा तक पहुंचा।

द्रोणाचार्यआग्नेयास्त्रमहर्षि अग्निवेश
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आग्नेयास्त्र के मंत्र के बारे में क्या कहा गया है?

आग्नेयास्त्र का मंत्र 'उलटी गायत्री' या 'अनुलोप जप' बताया गया है। यह ज्ञान अत्यंत गोपनीय था और केवल योग्य शिष्य को ही गुरु द्वारा दिया जाता था।

आग्नेयास्त्रमंत्रउलटी गायत्री
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क्या आग्नेयास्त्र से आग्नेयास्त्र का प्रतिकार हो सकता था?

हाँ, कुछ प्रसंगों में आग्नेयास्त्र से आग्नेयास्त्र का प्रतिकार हुआ। अर्जुन ने द्रोणाचार्य के आग्नेयास्त्र को अपने आग्नेयास्त्र से ही निष्प्रभावी किया था।

आग्नेयास्त्रसमान अस्त्रप्रतिकार
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आग्नेयास्त्र का प्रतिकार कैसे किया जा सकता था?

आग्नेयास्त्र का प्रतिकार वरुणास्त्र और पर्जन्यास्त्र से होता था। जल तत्व की वर्षा आग्नेयास्त्र की दिव्य अग्नि को शांत कर देती थी।

आग्नेयास्त्रप्रतिकारवरुणास्त्र
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आग्नेयास्त्र की अग्नि को सामान्य जल से क्यों नहीं बुझाया जा सकता था?

आग्नेयास्त्र की अग्नि दिव्य शक्ति से जागृत थी इसलिए सामान्य जल से नहीं बुझती थी। केवल वरुणास्त्र जैसे दिव्य जल-अस्त्रों से ही इसका प्रतिकार संभव था।

आग्नेयास्त्रदिव्य अग्निबुझाना असंभव
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आग्नेयास्त्र की मुख्य शक्ति क्या थी?

आग्नेयास्त्र की मुख्य शक्ति थी दिव्य अग्नि उत्पन्न करके लक्ष्य को पल भर में भस्म कर देना। इसकी लपटें आकाश छूती थीं और उष्णता असहनीय होती थी।

आग्नेयास्त्रमुख्य शक्तिअग्नि वर्षा
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आग्नेयास्त्र को 'अनलास्त्र' या 'अग्निबाण' भी क्यों कहते हैं?

आग्नेयास्त्र एक व्यापक श्रेणी का नाम है जिसके अंतर्गत अनलास्त्र और अग्निबाण जैसे विभिन्न अग्नि-आधारित अस्त्र आते हैं जिनकी क्षमताओं में भिन्नता हो सकती थी।

आग्नेयास्त्रअनलास्त्रअग्निबाण
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आग्नेयास्त्र के अधिपति देवता कौन हैं?

आग्नेयास्त्र के अधिपति देवता अग्नि देव हैं जो वैदिक काल से यज्ञ की पवित्रता और विनाश की प्रचंडता के प्रतीक हैं।

आग्नेयास्त्रअग्नि देवअधिपति देवता
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आग्नेयास्त्र क्या है?

आग्नेयास्त्र अग्नि देव से संबंधित एक दिव्य अस्त्र है जो अग्नि वर्षा करने में सक्षम था। यह मंत्रों और तपस्या से जागृत होता था और शत्रुओं को भस्म कर सकता था।

आग्नेयास्त्रदिव्यास्त्रअग्नि देव
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संवर्त अस्त्र को महाकाव्यों के सबसे भयावह अस्त्रों में क्यों गिना जाता है?

संवर्त अस्त्र को भयावह इसलिए माना जाता है क्योंकि यह अस्तित्व को मिटा देता है, इसके एकमात्र प्रयोग में पलक झपकते तीन करोड़ का संहार हुआ और देवताओं को भी ऐसा संहार याद नहीं था।

संवर्त अस्त्रभयावहवर्जित
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संवर्त अस्त्र का पौराणिक महत्व क्या है?

संवर्त अस्त्र यम और काल की अंतिम शक्ति का प्रतीक है। यह सिखाता है कि धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी पूर्ण विनाश आवश्यक है लेकिन परम शक्ति बड़ी नैतिक जिम्मेदारी माँगती है।

संवर्त अस्त्रमहत्वप्रतीक
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अश्वत्थामा के साथ क्या हुआ जब वह ब्रह्मास्त्र नहीं लौटा सका?

अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र चलाना जानता था पर वापस लेना नहीं, जिससे अनर्थ हुआ। यह सिद्ध करता है कि अस्त्र का संपूर्ण ज्ञान — चलाना और लौटाना दोनों — आवश्यक था।

अश्वत्थामाब्रह्मास्त्रवापस नहीं लौटाया
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दिव्यास्त्र प्राप्त करना केवल शक्ति अर्जन नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी था — कैसे?

दिव्यास्त्र की जिम्मेदारी थी कि योद्धा को चलाने के साथ वापस लेने का मंत्र भी सीखना होता था। अन्यथा अश्वत्थामा की तरह अनर्थ हो सकता था।

दिव्यास्त्रजिम्मेदारीवापस लेने का मंत्र
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दिव्यास्त्र प्राप्त करने के क्या-क्या तरीके थे?

दिव्यास्त्र तीन तरीकों से मिलते थे — तपस्या से देवता को प्रसन्न करके, गुरु-कृपा से ज्ञान प्राप्त करके, और देवता के वरदान के रूप में।

दिव्यास्त्रप्राप्तितपस्या
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संवर्त अस्त्र के प्रयोग से क्या हुआ?

संवर्त अस्त्र के प्रयोग से पलक झपकते ही तीन करोड़ गंधर्वों के शरीर के चिथड़े उड़ गए। यह विनाश इतना भयावह था कि देवताओं को भी ऐसा संहार याद नहीं था।

संवर्त अस्त्रविनाशतीन करोड़ गंधर्व
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भरत ने संवर्त अस्त्र क्यों चलाया?

सात दिनों के अनिर्णायक युद्ध में सभी साधारण साधन विफल होने के बाद क्रोधित भरत ने अंतिम उपाय के रूप में संवर्त अस्त्र का आह्वान किया।

भरतसंवर्त अस्त्रविफलता
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भरत और गंधर्वों के बीच युद्ध क्यों हुआ?

केकय देश के गंधर्वों ने उपद्रव मचाया था। श्री राम ने भरत को उन्हें नियंत्रित करने भेजा। सात दिन के अनिर्णायक युद्ध के बाद भरत ने संवर्त अस्त्र चलाया।

भरतगंधर्वकेकय देश
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संवर्त अस्त्र का प्रयोग किसने और किस पर किया?

संवर्त अस्त्र का प्रयोग भरत ने केकय देश के गंधर्वों पर किया था। यह कथा वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में मिलती है।

संवर्त अस्त्रभरतगंधर्व
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संवर्त अस्त्र का प्रयोग महाकाव्यों में कितनी बार हुआ?

संवर्त अस्त्र का प्रयोग महाकाव्यों में केवल एक बार हुआ। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में भरत द्वारा गंधर्वों के संहार के लिए।

संवर्त अस्त्रएकमात्र प्रयोगदुर्लभ
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संवर्त अस्त्र का यमराज से क्या संबंध है?

संवर्त अस्त्र यमराज का अस्त्र है जो काल और अंतिम न्याय का प्रतीक है। यह काल का शस्त्र है और काल के निर्णय से कोई परे नहीं है।

संवर्त अस्त्रयमराजसंहार
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संवर्त अस्त्र किस चीज़ से बना था?

कुछ ग्रंथों के अनुसार संवर्त अस्त्र 'काले लोहे' से बना था। काला रंग भय, गंभीरता और अटल शक्ति का प्रतीक है जो यमराज के स्वभाव से मेल खाता है।

संवर्त अस्त्रकाला लोहास्वरूप
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संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता कौन हैं?

संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता यमराज हैं जिन्हें 'काल' भी कहते हैं। यह संहार और अंतिम न्याय का अस्त्र है जिससे कोई बच नहीं सकता।

संवर्त अस्त्रयमराजअधिपति देवता
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प्रलय के समय संवर्त मेघ क्या होता है?

प्रलय के समय सात विनाशकारी मेघ प्रकट होते हैं जिनमें से एक का नाम 'संवर्त' है। यह मेघ अत्यधिक जल से भरा होता है और सब कुछ डुबो देता है।

संवर्त मेघप्रलयसात मेघ
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'संवर्त' शब्द का क्या अर्थ है?

संस्कृत में 'संवर्त' का अर्थ है 'प्रलय' या 'कल्पांत' — युग के अंत में होने वाला ब्रह्मांड का संपूर्ण विनाश। इसके अन्य अर्थ 'लपेटना' और 'शत्रु से भिड़ना' भी हैं।

संवर्तशब्द अर्थप्रलय
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अस्त्र और शस्त्र में क्या अंतर है?

शस्त्र शारीरिक बल से चलाए जाते हैं जैसे तलवार-गदा, जबकि अस्त्र मंत्रों से जागृत दिव्य हथियार होते हैं जिनमें देवताओं की शक्ति निवास करती है।

अस्त्रशस्त्रअंतर
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संवर्त अस्त्र क्या है?

संवर्त अस्त्र यमराज का दिव्यास्त्र है जो प्रलय जैसा विनाश करता है। इसका महाकाव्यों में केवल एक बार प्रयोग हुआ जब भरत ने तीन करोड़ गंधर्वों का संहार किया था।

संवर्त अस्त्रदिव्यास्त्रयमराज
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इंद्र का वज्र कितना शक्तिशाली था

वज्र में नारायण-शक्ति, दधीचि-तपस्या और इंद्र-प्रारब्ध तीन शक्तियाँ थीं। श्रीकृष्ण ने कहा — 'अस्त्रों में मैं वज्र हूँ।' जो वृत्रासुर किसी से नहीं हारा, वह वज्र से ही मारा गया।

वज्र शक्तिइंद्रबिजली
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वज्र से वृत्रासुर का वध कैसे हुआ

इंद्र ने दधीचि-अस्थि-निर्मित वज्र से वृत्रासुर पर पूर्ण बल से प्रहार किया। वज्र में नारायण-शक्ति, दधीचि-तपस्या और इंद्र-प्रारब्ध तीनों शक्तियाँ थीं। वृत्रासुर भगवान का भक्त था इसलिए वज्र-वध से उसे मोक्ष मिला।

वृत्रासुर वधइंद्र वज्रदेवासुर संग्राम
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दधीचि ने हड्डियाँ दान क्यों की थीं

वृत्रासुर को केवल दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से ही मारा जा सकता था। ब्रह्मा की सलाह पर इंद्र ने दधीचि से निवेदन किया। महर्षि ने देव-कल्याण के लिए सहर्ष देह-त्याग किया — यह भारत का सर्वोच्च दान-प्रसंग है।

दधीचि त्यागदेव कल्याणवृत्रासुर
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वज्र दधीचि की हड्डियों से कैसे बना

दधीचि ने समाधि से देह त्यागी। कामधेनु ने चाट-चाटकर मांस हटाया। विश्वकर्मा ने दधीचि की तप-शक्ति से भरी अस्थियों से वज्र बनाया। यही ब्रह्म-तेज वज्र की असीम शक्ति का स्रोत था।

दधीचि वज्रअस्थि दानकामधेनु
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वज्र किसने बनाया था

वज्र का निर्माण देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने महर्षि दधीचि की अस्थियों से किया। कामधेनु ने देह का मांस हटाया, विश्वकर्मा ने अस्थि से वज्र बनाया और इंद्र को सौंपा।

वज्र निर्माणविश्वकर्मादधीचि अस्थि
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इंद्र का वज्र क्या है

वज्र देवराज इंद्र का प्रमुख दिव्य अस्त्र है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कहा — 'अस्त्रों में मैं वज्र हूँ।' यह महर्षि दधीचि की अस्थियों से विश्वकर्मा ने बनाया था।

वज्रइंद्रदधीचि
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ब्रह्मदंड क्या है ब्रह्मा का अस्त्र

ब्रह्मदंड ब्रह्मा का दिव्य दंड है जो किसी भी अस्त्र को निष्प्रभावी कर देता है। वशिष्ठ के पास यह था — जब विश्वामित्र ने सेना से आक्रमण किया तब वशिष्ठ ने ब्रह्मदंड से सब कुछ निगल लिया।

ब्रह्मदंडब्रह्मावशिष्ठ
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ब्रह्मांडास्त्र क्या होता है

ब्रह्मांडास्त्र ब्रह्मा के पाँचों मुखों की शक्ति का प्रतीक — सर्वोच्च महास्त्र। केवल महर्षि वशिष्ठ के पास इसका वर्णन है। इसने विश्वामित्र के ब्रह्मास्त्र को पी लिया था। महाभारत में यह किसी के पास नहीं था।

ब्रह्मांडास्त्रब्रह्मा पाँच मुखवशिष्ठ
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ब्रह्मशिरास्त्र और ब्रह्मास्त्र में क्या अंतर है

ब्रह्मास्त्र = ब्रह्मा के 1 मुख की शक्ति; ब्रह्मशिरास्त्र = 4 मुखों की शक्ति (4 गुणा अधिक)। ब्रह्मास्त्र अनेकों के पास था, ब्रह्मशिरास्त्र अत्यंत दुर्लभ। यदि ब्रह्मास्त्र परमाणु बम है तो ब्रह्मशिरास्त्र हाइड्रोजन बम।

ब्रह्मशिरास्त्र बनाम ब्रह्मास्त्रअंतरशक्ति भेद
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ब्रह्मशिरास्त्र क्या है

ब्रह्मशिरास्त्र ब्रह्मा के चारों मुखों की शक्ति का प्रतीक है — ब्रह्मास्त्र से चार गुणा शक्तिशाली। महर्षि अग्निवेश, द्रोण, अर्जुन, अश्वत्थामा के पास इसके होने का उल्लेख मिलता है।

ब्रह्मशिरास्त्रब्रह्मा चार मुखमहाशक्ति
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ब्रह्मास्त्र किन किन लोगों के पास था

रामायण में श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण; महाभारत में द्रोण, अश्वत्थामा, अर्जुन, कर्ण, कृष्ण, युधिष्ठिर के पास ब्रह्मास्त्र था। यह केवल गुरु-शिष्य परंपरा में योग्य लोगों को दिया जाता था।

ब्रह्मास्त्र धारकमहाभारतरामायण
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ब्रह्मास्त्र को परमाणु बम से क्यों जोड़ते हैं

ब्रह्मास्त्र के परिणाम — प्रचंड अग्नि, 12 वर्ष दुर्भिक्ष, सन्तान-हीनता — परमाणु विकिरण के दुष्प्रभावों से मिलते-जुलते हैं। ओपनहाइमर ने भी महाभारत का अध्ययन किया था। यह तुलना दार्शनिक दृष्टिकोण से की जाती है।

ब्रह्मास्त्र परमाणुप्राचीन तकनीकविज्ञान
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अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र क्यों चलाया था

अश्वत्थामा ने पिता द्रोणाचार्य के छलपूर्ण वध का प्रतिशोध लेने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। पांडव-वंश के अंतिम शिशु परीक्षित को लक्ष्य किया। श्रीकृष्ण ने परीक्षित को बचाया और अश्वत्थामा को श्राप दिया।

अश्वत्थामाब्रह्मास्त्रपिता का बदला
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महाभारत में ब्रह्मास्त्र किसने चलाया था

महाभारत में सबसे प्रसिद्ध ब्रह्मास्त्र प्रयोग अश्वत्थामा का था — उसने उत्तरा के गर्भस्थ शिशु परीक्षित को मारने के लिए चलाया। श्रीकृष्ण ने शिशु की रक्षा की। अर्जुन, द्रोण, कर्ण ने भी इसका प्रयोग किया था।

महाभारत ब्रह्मास्त्रअश्वत्थामाअर्जुन
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ब्रह्मास्त्र को रोका जा सकता है क्या

ब्रह्मास्त्र को केवल दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही रोका जा सकता है, या चलाने वाला इसे वापस ले सकता है। अश्वत्थामा वापस नहीं ले सका इसलिए उसे उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ा — जिस शिशु को श्रीकृष्ण ने जीवित किया।

ब्रह्मास्त्र काटब्रह्मास्त्र से रोकनावापस लेना
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ब्रह्मास्त्र चलने से क्या होता है

ब्रह्मास्त्र चलने से भयंकर प्रलयाग्नि उत्पन्न होती है, जीव-जंतु और वनस्पति नष्ट होते हैं, 12 वर्ष दुर्भिक्ष पड़ता है। दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से सम्पूर्ण पृथ्वी के नाश का भय था।

ब्रह्मास्त्र प्रभावप्रलयदुर्भिक्ष
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दिव्यास्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दिव्यास्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दिव्यास्त्र को गहराई से समझने का तरीका

दिव्यास्त्र के पेज 6 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

418 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।