ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

अस्त्र शस्त्र प्रश्नोत्तर (पेज 2) — 79 प्रश्न

अस्त्र शस्त्र से जुड़े 79 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 79 प्रश्न

परशुराम को फरसा शिव जी से कैसे मिला?

परशुराम ने कैलाश पर भगवान शिव की घोर तपस्या की। प्रसन्न शिव ने उन्हें दिव्य परशु (विद्युदभि फरसा) सहित अनेक अस्त्र दिए। इसी परशु के कारण 'राम' का नाम 'परशुराम' हो गया।

परशुरामशिव तपस्यापरशु प्राप्ति
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या चंद्रहास शिव जी की तलवार थी?

हाँ, चंद्रहास भगवान शिव की अर्धचंद्राकार दिव्य तलवार थी जो उन्होंने रावण को उसकी भक्ति पर दी थी। इसकी शक्ति वज्र के समान थी। जटायु पर प्रयोग के बाद यह शिव के पास वापस लौट गई।

चंद्रहासशिव तलवाररावण
पूरा उत्तर पढ़ें →

चंद्रहास रावण को कैसे मिली थी?

रावण ने कैलाश उठाने की कोशिश की, हाथ दबने पर शिव तांडव स्त्रोत गाकर शिव को प्रसन्न किया। शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रहास तलवार दी — साथ में यह भी कहा कि दुरुपयोग करने पर यह वापस आ जाएगी।

चंद्रहासरावणशिव
पूरा उत्तर पढ़ें →

अश्वत्थामा के माथे की मणि क्यों निकाली गई?

द्रौपदी के पाँचों पुत्रों और उत्तरा के गर्भ पर हमले की सजा के रूप में अर्जुन ने मणि निकाली और कृष्ण ने श्राप दिया — उस घाव के साथ अनंत काल भटकना। मणि द्रौपदी के सुझाव पर ली गई।

अश्वत्थामा मणिद्रौपदीअर्जुन
पूरा उत्तर पढ़ें →

प्रस्वापास्त्र क्या है जो भीष्म के पास था?

प्रस्वापनास्त्र शत्रु को गहरी नींद में डालने वाला दिव्यास्त्र था। भीष्म-परशुराम युद्ध में जब वसुओं ने भीष्म को इसका स्मरण कराया, परशुराम के पास इसका कोई उत्तर नहीं था — इसीलिए युद्ध बंद हुआ।

प्रस्वापनास्त्रभीष्मनींद लाना
पूरा उत्तर पढ़ें →

गांडीव धनुष की विशेषता क्या थी?

गांडीव एक लाख धनुषों के बराबर था, 108 अकाट्य प्रत्यंचाएं थीं, एक साथ कई लक्ष्य भेद सकता था, और जो धारण करे उसमें दिव्य शक्ति आती थी। साथ में अक्षय तरकश था जिसमें बाण कभी खत्म नहीं होते।

गांडीव विशेषताअक्षय तरकशएक लाख धनुष
पूरा उत्तर पढ़ें →

महाभारत में निरस्त्र योद्धा पर अस्त्र चलाना क्यों वर्जित था?

निरस्त्र पर वार धर्मयुद्ध की मर्यादा के विरुद्ध था — यह वीरता नहीं अधर्म था। कर्ण-अर्जुन प्रसंग में कृष्ण ने कहा — कर्ण ने स्वयं अभिमन्यु वध में यह नियम तोड़ा था, इसीलिए यह उसका परिणाम है।

निरस्त्र योद्धायुद्ध धर्मक्षत्रिय मर्यादा
पूरा उत्तर पढ़ें →

रामायण में राम के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे?

विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को 50+ दिव्यास्त्र दिए — 5 चक्र, ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र, वज्रास्त्र, 3 पाश, आग्नेय, वायव्य सहित। रावण वध के लिए अगस्त्य मुनि ने ब्रह्मास्त्र दिया।

राम अस्त्रविश्वामित्रब्रह्मास्त्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

अर्जुन ने स्वर्ग जाकर इंद्र से कौन से अस्त्र सीखे?

अर्जुन ने स्वर्ग में इंद्र से वज्रास्त्र, सम्मोहनास्त्र, इंद्रास्त्र, निवातकवच युद्ध में रुद्रास्त्र (3 करोड़ असुर वध) सीखे। यम-वरुण-कुबेर से भी अस्त्र प्राप्त किए। एक वर्ष अमरावती में रहे।

अर्जुन स्वर्गइंद्र अस्त्रअमरावती
पूरा उत्तर पढ़ें →

नारायणास्त्र महाभारत में किसने चलाया था?

नारायणास्त्र महाभारत में अश्वत्थामा ने चलाया था — पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का बदला लेने के लिए। द्रोण ने यह अस्त्र भगवान नारायण की उपासना से प्राप्त किया और अश्वत्थामा को दिया था।

नारायणास्त्रअश्वत्थामामहाभारत
पूरा उत्तर पढ़ें →

राम को कोदंड धनुष कैसे मिला?

एक मत के अनुसार राम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य वन में स्वयं कोदंड का निर्माण किया था। जनक के स्वयंवर में तोड़ा गया 'पिनाक' और परशुराम का 'शार्ङ्ग' — दोनों कोदंड से अलग थे।

कोदंडदंडकारण्यराम धनुष
पूरा उत्तर पढ़ें →

कुरुक्षेत्र युद्ध में 18 दिन कौन-कौन से अस्त्र प्रमुख रहे?

14वाँ दिन सर्वाधिक दिव्यास्त्रों वाला था — पाशुपतास्त्र, नारायणास्त्र, वासवी शक्ति। 17वें दिन अंजलिकास्त्र से कर्ण वध। सौप्तिकपर्व में ब्रह्मास्त्र/ब्रह्मशिरास्त्र का प्रयोग।

18 दिन अस्त्रकुरुक्षेत्रदिन-वार
पूरा उत्तर पढ़ें →

भीष्म का धनुष कैसा था?

भीष्म का धनुष परशुराम से प्राप्त और अत्यंत शक्तिशाली था। इसकी प्रत्यंचा की आवाज से शत्रु कांप उठते थे। उनके पास ब्रह्मास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र थे। धनुष का विशेष नाम पुराणों में स्पष्ट नहीं है।

भीष्मभीष्म धनुषमहाभारत
पूरा उत्तर पढ़ें →

राम ने सीता स्वयंवर में कौन सा धनुष तोड़ा था?

श्रीराम ने सीता स्वयंवर में भगवान शिव का 'पिनाक' धनुष तोड़ा था। यह देवताओं द्वारा जनक के पूर्वजों को दिया गया शिव का दिव्य धनुष था जिसे किसी महान राजा ने भी नहीं उठाया।

पिनाकसीता स्वयंवरशिव धनुष
पूरा उत्तर पढ़ें →

कर्ण को ब्रह्मास्त्र चलाने से क्यों रोका गया?

कर्ण को किसी ने नहीं रोका — परशुराम के श्राप के कारण ठीक उस निर्णायक क्षण में जब रथ का पहिया धँसा और अर्जुन सामने था, ब्रह्मास्त्र के मंत्र उनकी स्मृति से लुप्त हो गए।

कर्णब्रह्मास्त्रपरशुराम श्राप
पूरा उत्तर पढ़ें →

राम बाण का अर्थ क्या है?

राम बाण का अर्थ है — श्रीराम का अचूक बाण जो अपना लक्ष्य अवश्य भेदता था। मुहावरे में इसका अर्थ है — ऐसा निश्चित और अचूक उपाय जो हर बार काम आए।

राम बाणअर्थअचूक बाण
पूरा उत्तर पढ़ें →

कर्ण के विजय धनुष की क्या विशेषता थी?

विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।

विजय धनुषकर्णअखंड
पूरा उत्तर पढ़ें →

ब्रह्मास्त्र से ज्यादा शक्तिशाली कौन सा अस्त्र है?

ब्रह्मास्त्र से अधिक शक्तिशाली हैं — ब्रह्मशिरास्त्र (4 गुना), ब्रह्माण्डास्त्र (ब्रह्मांड नाशक), पाशुपतास्त्र (ब्रह्मास्त्र को निगल सकता है) और नारायणास्त्र (अप्रतिरोध्य)।

ब्रह्मशिरास्त्रपाशुपतास्त्रब्रह्माण्डास्त्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

राम ने रावण को किस अस्त्र से मारा था?

राम ने रावण को ब्रह्मास्त्र से नाभि पर प्रहार करके मारा था। यह अस्त्र ब्रह्माजी ने स्वयं रावण को दिया था जो मंदोदरी के कक्ष में छिपा था — हनुमान ने चतुराई से प्राप्त करके राम तक पहुँचाया।

रावण वधब्रह्मास्त्रअगस्त्य
पूरा उत्तर पढ़ें →

पाशुपतास्त्र अर्जुन को कैसे मिला?

पाशुपतास्त्र अर्जुन को शिव ने इंद्रकील पर्वत पर स्वयं प्रकट होकर दिया था। अर्जुन ने घोर तपस्या की, किरात-रूपी शिव से युद्ध किया, और अंत में पूजा करने पर शिव प्रसन्न हुए।

पाशुपतास्त्रअर्जुन शिव तपस्याकिरात
पूरा उत्तर पढ़ें →

इंद्र ने कर्ण का कवच-कुंडल कैसे लिया?

इंद्र ने ब्राह्मण वेश में आकर सूर्योपासना के समय कर्ण से वचन लेकर कवच-कुंडल माँगे। सब जानते हुए भी कर्ण ने दे दिए। इंद्र ने बदले में एकबारी अमोघ इंद्रास्त्र दिया।

इंद्रकर्णकवच कुंडल दान
पूरा उत्तर पढ़ें →

मंत्र से अस्त्र कैसे उत्पन्न किया जाता था?

बाण को धनुष पर चढ़ाकर देव का ध्यान और बीज-मंत्र उच्चारण से अभिमंत्रित किया जाता था। मन की एकाग्रता और शुद्धता अनिवार्य थी। अस्त्र की शक्ति वस्तु में नहीं — मंत्र और भाव में थी।

मंत्र अस्त्रअभिमंत्रितबीज मंत्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

पाशुपतास्त्र और ब्रह्मास्त्र में कौन ज्यादा शक्तिशाली है?

पुराणों के अनुसार पाशुपतास्त्र ब्रह्मास्त्र से अधिक शक्तिशाली है — एक संदर्भ में पाशुपतास्त्र ब्रह्मास्त्र को निगल सकता है। यह मन, वाणी, नेत्र और धनुष — चारों से चलाया जा सकता था।

पाशुपतास्त्रब्रह्मास्त्रतुलना
पूरा उत्तर पढ़ें →

अर्जुन के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे?

अर्जुन के पास पाशुपतास्त्र (शिव से), ब्रह्मास्त्र (द्रोण से), नारायणास्त्र, वज्रास्त्र (इंद्र से), गांडीव+अक्षय तरकश (अग्नि-वरुण से) सहित अनेक दिव्यास्त्र थे।

अर्जुन अस्त्रपाशुपतास्त्रब्रह्मास्त्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या सुदर्शन चक्र को रोका जा सकता है?

नहीं — सुदर्शन चक्र को रोकना किसी अस्त्र से संभव नहीं है। यह अचूक और अजेय है। केवल भगवान विष्णु की शरण लेकर उनसे क्षमा माँगने पर विष्णु स्वयं इसे रोक सकते हैं।

सुदर्शन चक्रअचूकरोकना संभव नहीं
पूरा उत्तर पढ़ें →

घटोत्कच के पास कौन से अस्त्र थे?

घटोत्कच के पास राक्षसी मायावी अस्त्र, नाना प्रकार के दिव्य-मानवीय-राक्षसी अस्त्र थे। माता हिडिम्बा से सीखी मायाविद्या उसकी मुख्य शक्ति थी। रात्रि में उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती थी।

घटोत्कचमायावी अस्त्रराक्षसी शक्ति
पूरा उत्तर पढ़ें →

गांडीव धनुष अर्जुन को कैसे मिला?

खांडव वन दहन प्रसंग में अग्निदेव की सहायता पर, वरुणदेव ने गांडीव धनुष और दो अक्षय तरकश अर्जुन को दिए। अग्निदेव ने यह धनुष अर्जुन के लिए वरुण से लाया था।

गांडीवअग्नि देवखांडव वन
पूरा उत्तर पढ़ें →

नारायणास्त्र से कैसे बचते हैं?

नारायणास्त्र से बचने के लिए सभी शस्त्र त्यागकर, मन से युद्ध-विचार छोड़कर, हाथ जोड़कर आत्मसमर्पण करें। यह अस्त्र केवल प्रतिरोध करने वाले पर वार करता है।

नारायणास्त्र से बचावआत्मसमर्पणनिहत्था
पूरा उत्तर पढ़ें →

ब्रह्मास्त्र का प्रतिकार क्या है?

ब्रह्मास्त्र का एकमात्र प्रतिकार दूसरा ब्रह्मास्त्र है। परंतु दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से प्रलय का खतरा होता है। पाशुपतास्त्र भी इसे निरस्त कर सकता है — कुछ ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है।

ब्रह्मास्त्र प्रतिकारदूसरा ब्रह्मास्त्रपाशुपतास्त्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

अस्त्र शस्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर अस्त्र शस्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

अस्त्र शस्त्र को गहराई से समझने का तरीका

अस्त्र शस्त्र के पेज 2 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

79 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।