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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 72) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

हाटक रस का 'ईश्वरोऽहं' भाव किस दार्शनिक समस्या को दर्शाता है?

ईश्वरोऽहं का भाव हाटक रस से नहीं आत्मज्ञान से आना चाहिए। भौतिक नशे में 'मैं ईश्वर हूँ' कहना सबसे बड़ा अज्ञान है — यही अतल लोक का दार्शनिक संदेश है।

ईश्वरोऽहंदार्शनिक समस्यामिथ्या अहंकार
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बल असुर की 96 मायाओं का दार्शनिक महत्व क्या है?

96 मायाएं उन समस्त भ्रमों का प्रतीक हैं जो जीव को आत्मज्ञान से दूर रखती हैं। इनकी गहराई अथाह है — कोई सभी नहीं जान सकता। पृथ्वी पर भी इनका प्रभाव है।

96 मायादार्शनिकबल असुर
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भागवत (5.24.16) श्लोक का तात्विक अर्थ क्या है?

भागवत (5.24.16) का तात्विक अर्थ — भौतिक भोग (हाटक रस) व्यक्ति में मिथ्या अहंकार जगाता है। वह ईश्वर समझने लगता है जबकि यह आत्मज्ञान का सबसे बड़ा पतन है।

भागवत 5.24.16तात्विक अर्थहाटक रस
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अतल लोक और नरक में मूलभूत अंतर क्या है?

अतल भोग का स्थान है — स्वर्ग से अधिक सुख, रोग-बुढ़ापा नहीं। नरक दंड का स्थान है — यातना और पीड़ा। नरक पातालों से भी नीचे है।

अतल लोकनरकअंतर
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वामन अवतार प्रसंग में अतल-वितल-सुतल की भूमिका क्या है?

वामन अवतार में भगवान ने बलि को सुतल लोक दिया जो अतल-वितल के नीचे है। इंद्र भी यह ऐश्वर्य नहीं पा सके। अतल इन लोकों का सबसे ऊपरी रक्षण-स्थल है।

वामन अवतारअतलवितल
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शेषनाग सातों पातालों के नीचे कहाँ हैं?

सातों पातालों के 30,000 योजन नीचे गर्भोदक सागर में शेषनाग (अनंत देव) विराजमान हैं जो ब्रह्मांड का भार अपने फनों पर धारण करते हैं।

शेषनाग30000 योजनगर्भोदक सागर
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अहिरावण ने राम-लक्ष्मण को पाताल क्यों ले गया था?

अहिरावण ने देवी को बलि देने के लिए राम-लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल ले गया था। हनुमान जी ने अपने पुत्र मकरध्वज को परास्त कर और अहिरावण का वध कर उन्हें मुक्त कराया।

अहिरावणरामलक्ष्मण
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ब्रह्मांड पुराण में अतल लोक को माया का प्रतीक क्यों कहा गया है?

ब्रह्मांड पुराण में अतल लोक को माया का प्रतीक इसलिए कहा गया क्योंकि यहाँ सब कुछ — सुख, स्त्रियाँ, हाटक रस, ईश्वरोऽहं का भाव — सब माया है।

ब्रह्मांड पुराणमायाअतल लोक
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विभिन्न पुराणों में अतल लोक के वर्णन में क्या समानता है?

सभी पुराण एकमत हैं — अतल लोक दैत्य-दानव-नागों का स्थान है, स्वर्ग से समृद्ध है, बल असुर का शासन है, 96 मायाएं हैं और मृत्यु केवल सुदर्शन चक्र से।

विभिन्न पुराणअतल लोकसमानता
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अतल लोक में जाने के लिए क्या कर्म करने पड़ते हैं?

भौतिक संपदा की लालसा से की गई तपस्या और दान, राजसिक-तामसिक अहंकार — इन कर्मों से अतल लोक मिलता है। सकाम पुण्य का यही फल है।

कर्मअतल लोकराजसिक
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अतल के ऊपर पृथ्वी और नीचे वितल का क्या संबंध है?

अतल के ऊपर पृथ्वी (10,000 योजन) और नीचे वितल (10,000 योजन) है। वितल में हाटकेश्वर शिव और भवानी का निवास है। अतल इन दोनों के बीच सेतु है।

अतल लोकपृथ्वीवितल
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विराट पुरुष के शरीर में सातों पातालों का स्थान क्या है?

भागवत (2.5.40-41) के अनुसार — अतल (कमर), वितल (जांघ), सुतल (घुटना), तलातल (पिंडली), महातल (टखना), रसातल (पंजा), पाताल (तलवा)।

विराट पुरुषसात पातालकटि
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असुर वधुओं के गर्भपात का प्रसंग क्या है?

भागवत (5.24.15) के अनुसार सुदर्शन चक्र के प्रवेश का भय इतना प्रबल है कि अतल लोक की असुर स्त्रियों के गर्भपात तक हो जाते हैं। यह भगवान की सर्वोच्च शक्ति का प्रमाण है।

असुर वधूगर्भपातसुदर्शन चक्र
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हाटक रस का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या है?

हाटक रस पीने से मिथ्या अहंकार जाग्रत होता है — व्यक्ति खुद को ईश्वर समझता है, दस हजार हाथियों का बल महसूस करता है और मृत्यु का भय भूल जाता है।

हाटक रसमनोवैज्ञानिकअहंकार
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बल असुर ने 96 मायाएं कैसे बनाईं?

बल असुर ने अपने तपोबल और जादुई शक्तियों से 96 मायाएं बनाईं। आज भी पृथ्वी के मायावी लोग इनमें से एक-दो ही जानते हैं — इतनी जटिल हैं ये।

96 मायाबल असुरतपोबल
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देवर्षि नारद ने अतल लोक के बारे में क्या कहा?

विष्णु पुराण में नारद जी ने देव-सभा में कहा कि पाताल लोक का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है।

नारदस्वर्गअतल लोक
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नाग मणियों का अतल लोक में क्या महत्व है?

नाग मणियाँ अतल लोक का एकमात्र प्रकाश स्रोत हैं। भागवत (5.24.12) के अनुसार ये तीव्र और शीतल प्रकाश से संपूर्ण अंधकार नष्ट करती हैं।

नाग मणिमहत्वअतल लोक
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अतल लोक को बिल-स्वर्ग क्यों कहते हैं?

बिल-स्वर्ग = भूमि के नीचे स्थित स्वर्ग जैसा स्थान। यहाँ इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख है इसीलिए इन्हें भूमिगत स्वर्ग कहते हैं।

बिल स्वर्गअतल लोकभूमिगत
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अतल शब्द का क्या अर्थ है?

अतल = अ (नहीं) + तल (आधार)। अर्थात ऐसा स्थान जहाँ आत्मा का कोई वास्तविक आध्यात्मिक आधार नहीं है। यहाँ सब भौतिक सुख हैं पर आत्मज्ञान नहीं।

अतलशब्द अर्थव्युत्पत्ति
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मार्कंडेय पुराण में अतल लोक को क्या कहा गया है?

मार्कंडेय पुराण में अतल लोक को असुरों का वह सुरक्षित स्थान बताया गया है जो देवताओं की पहुँच से दूर है। युद्ध में हारने पर असुर यहाँ आकर शक्ति संचित करते हैं।

मार्कंडेय पुराणअतल लोकअसुर
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गरुड़ पुराण में अतल लोक का क्या वर्णन है?

गरुड़ पुराण अतल लोक को कामुकता और विलासिता का केंद्र मानता है जहाँ बल असुर का राज है और आध्यात्मिक चेतना का अभाव है।

गरुड़ पुराणअतल लोककामुकता
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शिव पुराण में अतल लोक का क्या वर्णन है?

शिव पुराण के अनुसार अतल लोक के निवासियों को यह भोग-विलास उनके पूर्वजन्म की कठोर तपस्या के कारण मिला है। यहाँ श्रेष्ठ भोजन, संगीत और असीमित विलासिता है।

शिव पुराणअतल लोकतपस्या
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अतल लोक से वापसी कब होती है?

जब पुण्यों की अवधि समाप्त हो जाती है तो अतल लोक के निवासियों को कर्मचक्र के अनुसार पुनः पृथ्वी पर लौटना पड़ता है। यह लोक मोक्ष का मार्ग नहीं है।

अतल लोकवापसीपुण्य
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अतल लोक में कोई क्यों जाता है?

जो लोग भौतिक संपदा की तीव्र लालसा से तपस्या या दान करते हैं (मोक्ष के लिए नहीं) वे मृत्यु के बाद अतल लोक जाते हैं। राजसिक-तामसिक कर्मों का यही फल है।

अतल लोककर्मराजसिक
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वामन अवतार में अतल लोक का क्या उल्लेख है?

वामन अवतार में भगवान ने बलि को सुतल लोक सौंपा जो अतल-वितल के नीचे है। इस प्रसंग से इन अधोलोकों की अपार संपदा की पुष्टि होती है।

वामन अवतारअतल लोकबलि
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राजा सगर के पुत्रों का पाताल से क्या संबंध है?

राजा सगर के 60,000 पुत्र अश्वमेध का घोड़ा खोजते हुए पृथ्वी खोदकर पाताल पहुँचे और कपिल मुनि के तेज से भस्म हो गए। इसी खुदाई से पाताल का मार्ग बना।

राजा सगर60000 पुत्रपाताल
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अहिरावण प्रसंग में पाताल का क्या वर्णन है?

रामायण के अहिरावण प्रसंग में हनुमान जी पाताल गए, अपने पुत्र मकरध्वज को परास्त किया और राम-लक्ष्मण को मुक्त कराया। यह पाताल लोकों के अस्तित्व का प्रमाण है।

अहिरावणपातालहनुमान
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शेषनाग का पाताल लोक से क्या संबंध है?

सातों पातालों के 30,000 योजन नीचे गर्भोदक सागर में भगवान शेषनाग (अनंत) विराजमान हैं जो अपने फनों पर सम्पूर्ण ब्रह्मांड का भार धारण करते हैं।

शेषनागपातालगर्भोदक सागर
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राजा बलि और सुतल लोक का क्या संबंध है?

राजा बलि सुतल लोक के शासक हैं जहाँ भगवान वामन ने उन्हें स्थापित किया और स्वयं उनके द्वारपाल बने। यह भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।

राजा बलिसुतल लोकवामन अवतार
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वितल लोक में कौन रहता है?

वितल लोक में भगवान शिव के हाटकेश्वर स्वरूप का निवास है जो भवानी और भूत-गणों से घिरे रहते हैं। यहाँ हाटकी नदी बहती है और शिव स्वर्ण खदानों के स्वामी हैं।

वितल लोकभगवान शिवहाटकेश्वर
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विराट पुरुष के शरीर में अतल लोक कहाँ है?

विराट पुरुष के शरीर में अतल लोक कटि (कमर) के स्थान पर है। भागवत (2.5.40-41) के अनुसार यह भगवान के विराट स्वरूप का अभिन्न अंग है।

विराट पुरुषअतल लोककटि
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असुर वधुओं के गर्भपात का प्रसंग क्या है?

भागवत (5.24.15) के अनुसार सुदर्शन चक्र के प्रवेश के भय से अतल लोक की असुर स्त्रियों के गर्भपात हो जाते हैं। यह भगवान की सर्वोच्च शक्ति का प्रमाण है।

गर्भपातअसुरसुदर्शन चक्र
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सुदर्शन चक्र का अतल लोक से क्या संबंध है?

सुदर्शन चक्र अतल लोक के निवासियों की मृत्यु का एकमात्र कारण है। इसके प्रवेश के भय से असुर स्त्रियों के गर्भपात तक हो जाते हैं।

सुदर्शन चक्रअतल लोकभगवान विष्णु
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ईश्वरोऽहं सिद्धोऽहम का क्या मतलब है?

ईश्वरोऽहं सिद्धोऽहम = मैं ही ईश्वर हूँ, मैं ही सिद्ध हूँ। हाटक रस पीने के बाद व्यक्ति मिथ्या अहंकार में यही समझने लगता है।

ईश्वरोऽहंसिद्धोऽहमहाटक रस
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हाटक रस पीने से क्या होता है?

हाटक रस पीने से व्यक्ति को लगता है कि वह ईश्वर है, उसमें दस हजार हाथियों का बल है। यह मिथ्या अहंकार उसे मृत्यु का भय भुला देता है।

हाटक रसप्रभावईश्वरोऽहं
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हाटक रस क्या है?

हाटक रस एक मादक और कामोद्दीपक पेय है जो अतल लोक की स्त्रियाँ वहाँ आने वाले पुरुषों को पिलाती हैं। इसे पीने से व्यक्ति मिथ्या अहंकार में डूब जाता है।

हाटक रसअतल लोकमादक
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स्वैरिणी कौन होती हैं?

स्वैरिणी वे स्त्रियाँ हैं जो केवल अपने ही वर्ग के पुरुषों से संबंध रखती हैं। ये स्वतंत्र और स्वेच्छाचारी स्वभाव की होती हैं।

स्वैरिणीअतल लोकस्वतंत्र
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अतल लोक की तीन प्रकार की स्त्रियाँ कौन हैं?

बल असुर की जम्हाई से तीन प्रकार की स्त्रियाँ उत्पन्न हुईं — स्वैरिणी (अपने वर्ग में), कामिनी (किसी भी वर्ग में) और पुंश्चली (अस्थिर स्वभाव)।

तीन स्त्रियाँस्वैरिणीकामिनी
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नमुचि और कालिया का अतल लोक से क्या संबंध है?

वायु पुराण के अनुसार दैत्य नमुचि और नाग कालिया के भव्य नगर अतल लोक में हैं। कालिया वही नाग है जिसे कृष्ण ने यमुना से निकाला था।

नमुचिकालियाअतल लोक
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वायु पुराण में अतल लोक के निवासी कौन हैं?

वायु पुराण के अनुसार अतल लोक में महान दैत्य नमुचि और प्रसिद्ध नाग कालिया के भव्य नगर हैं। देवताओं से निष्कासित दैत्यों ने यहाँ स्वर्ग जैसी बस्तियाँ बसाई हैं।

वायु पुराणअतल लोकनमुचि
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बल असुर की 96 मायाएं क्या हैं?

बल असुर ने 96 प्रकार की जादुई मायाएं बनाई हैं। आज भी पृथ्वी के मायावी लोग इनमें से एक-दो को ही जानते हैं। इन मायाओं से अतल लोक में सभी सुख स्वतः मिलते हैं।

96 मायाबल असुरजादुई
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मय दानव कौन है?

मय दानव दैत्यों-राक्षसों का सबसे बड़ा वास्तुकार और मायावी शिल्पकार है। वह तलातल लोक में रहता है और अतल लोक के राजा बल असुर का पिता है।

मय दानववास्तुकारतलातल
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बल असुर कौन है?

बल असुर मय दानव का पुत्र और अतल लोक का शासक है। उसने 96 प्रकार की मायाएं बनाई हैं जो इतनी जटिल हैं कि कोई भी उन्हें पूरी तरह नहीं जान सकता।

बल असुरअतल लोकमय दानव
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नारद जी ने अतल लोक के बारे में क्या कहा?

नारद जी ने स्वर्ग की सभा में कहा कि पाताल का सौंदर्य और ऐश्वर्य इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है। उन्होंने रंग-बिरंगी भूमि, रत्न-महल और मधुर संगीत का वर्णन किया।

नारदअतल लोकस्वर्ग
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अतल लोक स्वर्ग से बेहतर है क्या?

हाँ, नारद जी ने कहा कि पाताल का सौंदर्य स्वर्ग से भी अधिक आनंददायक है। पर यह केवल भौतिक सुख है — यहाँ आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है।

अतल लोकस्वर्गबेहतर
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 72 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।