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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 47) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

गरुड़ पुराण में मृत आत्मा की 12 महीने की यात्रा कैसे बताई गई है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृतात्मा 12 महीने तक यममार्ग में 16 पुरियां पार करती है और पिण्ड-श्राद्ध से बल पाती है।

गरुड़ पुराण12 महीने की यात्रायममार्ग
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मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत पितृलोक क्यों नहीं पहुँचती?

मृत आत्मा पहले प्रेत अवस्था में यममार्ग की यात्रा करती है, फिर सपिण्डीकरण से पितृलोक की अधिकारी बनती है।

मृत्यु के बाद आत्माप्रेत अवस्थापितृलोक
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7 पीढ़ी पितृ तर्पण में पितृकुल और मातृकुल कैसे जुड़े हैं?

पितृकुल में सात और मातृकुल में पाँच पीढ़ी की सपिण्डता मानी जाती है, और दोनों के तत्त्व वंश में जुड़े रहते हैं।

पितृकुलमातृकुल7 पीढ़ी
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7 पीढ़ी की पितृ शृंखला में श्राद्धकर्ता की भूमिका क्या है?

श्राद्धकर्ता सातवीं कड़ी है और वही ऊपर की छह पीढ़ियों को पिण्ड व तर्पण प्रदान करता है।

श्राद्धकर्ता7 पीढ़ीसपिण्ड शृंखला
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श्राद्ध में केवल 3 पीढ़ियों को सीधा पिण्ड क्यों दिया जाता है?

पहली तीन पीढ़ियाँ पिण्डभाज हैं, इसलिए उन्हें श्राद्ध में सीधे पूर्ण पिण्ड दिया जाता है।

3 पीढ़ी श्राद्धपिण्डभाजपिता पितामह प्रपितामह
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बौधायन धर्मसूत्र में सपिण्ड संबंध कैसे बताया गया है?

बौधायन धर्मसूत्र सात निकट संबंधियों को अविभक्तदाय सपिण्ड और पिण्डदान के अधिकारी मानता है।

बौधायन धर्मसूत्रसपिण्ड संबंधपिण्डदान
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मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति में 7 पीढ़ी का क्या प्रमाण है?

मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति पितृकुल में सात और मातृकुल में पाँच पीढ़ी तक सपिण्डता बताती हैं।

मनुस्मृतियाज्ञवल्क्य स्मृति7 पीढ़ी
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शातातप स्मृति में पितरों की कौन-कौन सी कोटियाँ बताई गई हैं?

शातातप स्मृति में पिण्डभाज, लेपभाज, नान्दीमुख और अश्रुमुख सहित 12 पितृ कोटियाँ बताई गई हैं।

शातातप स्मृतिपितृ कोटिपिण्डभाज
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देव पितर और मनुष्य पितर में क्या अंतर है?

देव पितर नित्य ब्रह्मांडीय पितर हैं, जबकि मनुष्य पितर मृत पूर्वज हैं जिन्हें श्राद्ध-तर्पण से तृप्त किया जाता है।

देव पितरमनुष्य पितरपितृ वर्गीकरण
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पितर संध्या समय अधिक शक्तिशाली क्यों माने जाते हैं?

ब्रह्मा के त्यक्त शरीर से संध्या बनने के कारण पितरों का संध्या काल से विशेष संबंध माना गया है।

पितर संध्या समयसंध्यापितृ शक्ति
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विष्णु पुराण में पितरों की उत्पत्ति का क्या वर्णन है?

विष्णु पुराण के अनुसार पितर ब्रह्मा के पृष्ठ भाग से उत्पन्न हुए और उनके त्यक्त शरीर से संध्या बनी।

विष्णु पुराणपितर उत्पत्तिब्रह्मा
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सपिण्डीकरण के बाद मृत आत्मा को पितृ पद कैसे मिलता है?

सपिण्डीकरण में प्रेत-पिण्ड पितृ-पिण्डों से मिलकर मृत आत्मा को पितृ मंडल में प्रवेश दिलाता है।

सपिण्डीकरणपितृ पदप्रेत मुक्ति
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मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत से पितृ कैसे बनती है?

सपिण्डीकरण के द्वारा प्रेत-पिण्ड को पितृ-पिण्डों में मिलाने से आत्मा प्रेत से पितृ बनती है।

प्रेत से पितृसपिण्डीकरणमृत्यु के बाद आत्मा
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श्राद्ध और तर्पण में क्या अंतर है?

तर्पण जल-तिल से पितरों की तृप्ति है, जबकि श्राद्ध में पिण्डदान, ब्राह्मण भोजन, पंचबलि और तर्पण सहित पूर्ण पितृ-कर्म होता है।

श्राद्धतर्पणपितृ कर्म
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वसु-रुद्र-आदित्य पितृ विज्ञान से क्या शिक्षा मिलती है?

यह पितृ विज्ञान सिखाता है कि श्राद्ध जैविक ऋण, कर्मकाण्ड, ब्रह्माण्डीय ऊर्जा और आत्मा की आध्यात्मिक प्रगति का संयोजन है।

वसु रुद्र आदित्यपितृ विज्ञानश्राद्ध शिक्षा
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रुद्र और आदित्य स्वरूप पितर कौन से फल देते हैं?

रुद्र पितर धन, स्वास्थ्य, तेज और रक्षा देते हैं; आदित्य पितर विद्या, ज्ञान-प्रकाश और मोक्ष की दिशा देते हैं।

रुद्र पितरआदित्य पितरश्राद्ध फल
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श्राद्ध से पितर कौन-कौन से आशीर्वाद देते हैं?

श्राद्ध से पितर आयु, संतान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, सुख, राज्य, स्वास्थ्य और रक्षा का आशीर्वाद देते हैं।

श्राद्ध आशीर्वादपितरआयु
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वसु-रुद्र-आदित्य ब्रह्मांडीय कूरियर कैसे हैं?

वसु-रुद्र-आदित्य गोत्र-नाम के आधार पर श्राद्ध की आहुति को पितर की योनि के अनुकूल रूप में पहुँचा देते हैं।

वसु रुद्र आदित्यब्रह्मांडीय कूरियरश्राद्ध
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विश्वेदेव श्राद्ध को राक्षसों और पिशाचों से कैसे बचाते हैं?

विश्वेदेव श्राद्ध के रक्षक हैं; वे सुनिश्चित करते हैं कि पितृभाग राक्षस या पिशाच न ले जाएँ।

विश्वेदेवश्राद्ध रक्षाराक्षस
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 47 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।