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पूजा विधि प्रश्नोत्तर (पेज 2) — 211 प्रश्न

पूजा विधि से जुड़े 211 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 211 प्रश्न

कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के किस स्वरूप (श्रीधर) की पूजा होती है?

इस दिन भगवान विष्णु के 'श्रीधर' (हृदय में लक्ष्मी को धारण करने वाले) स्वरूप की पूजा होती है। इनकी पूजा से अपार सुख, शांति और ऐश्वर्य मिलता है।

श्रीधर स्वरूपभगवान विष्णुऐश्वर्य
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देवशयनी एकादशी पर कौन से खास मंत्र (शयन मंत्र) का जाप करें?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करना चाहिए। साथ ही भगवान को सुलाते समय 'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ...' (शयन मंत्र) का जाप करने से विशेष कृपा मिलती है।

शयन मंत्रमूल मंत्रस्तुति
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देवशयनी एकादशी पर भगवान को किशमिश (दाख) का भोग क्यों लगाते हैं?

शास्त्रों में देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को ऋतु फल और मिठाई के साथ विशेष रूप से किशमिश (दाख) का भोग लगाने का नियम बताया गया है।

किशमिश भोगदाखनैवेद्य
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देवशयनी एकादशी की पूजा विधि और सामग्री क्या है?

शेषनाग पर लेटे हुए भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर पीले कपड़े पहनाएं, पीला चंदन लगाएं और पीले फूल व तुलसी दल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।

षोडशोपचार पूजाशयनी स्वरूपपूजन सामग्री
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एकादशी की सुबह नहाने और संकल्प का क्या नियम है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगाजल मिले पानी से नहाकर पीले कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद हाथ में जल और फूल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

संकल्प मंत्रस्नान विधिब्रह्म मुहूर्त
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योगिनी एकादशी पर कौन से खास मंत्रों का जाप करना चाहिए?

इस दिन भगवान विष्णु के 'अष्टाक्षर मंत्र' (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जाप सबसे प्रभावशाली होता है। साथ ही 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ भी जरूर करना चाहिए।

मंत्र जापअष्टाक्षर मंत्रविष्णु गायत्री
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योगिनी एकादशी पर पीपल के पेड़ की पूजा का क्या महत्व है?

इस एकादशी पर पीपल के पेड़ को जल चढ़ाने और उसकी 7 परिक्रमा करने से सभी बड़े पाप और 'पितृ दोष' खत्म हो जाते हैं।

पीपल पूजापितृ दोषपाप नाश
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योगिनी एकादशी की सुबह की पूजा विधि क्या है?

सुबह जल्दी उठकर पानी में तिल डालकर नहाना चाहिए। पीले कपड़े पहनकर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। फिर विष्णु जी की मूर्ति को पंचामृत से नहलाकर उनकी पूजा करें।

संकल्प मंत्रस्नान विधिपंचामृत अभिषेक
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मोहिनी एकादशी पर कौन से मंत्र और स्तोत्र का पाठ करें?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके अलावा 'विष्णु सहस्रनाम', 'नारायण कवच' और भगवद्गीता के 11वें अध्याय का पाठ करना बहुत शुभ होता है।

मंत्र पाठविष्णु सहस्रनामद्वादशाक्षर मंत्र
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मोहिनी एकादशी की पूजा विधि और सामग्री क्या है?

भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराकर पीले कपड़े पहनाएं और गर्मी दूर करने के लिए चंदन लगाएं। पीले फूल, फल और तुलसी दल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।

षोडशोपचार पूजापूजन सामग्रीमलय चंदन
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एकादशी की सुबह स्नान और संकल्प का क्या नियम है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पानी में गंगाजल या तिल मिलाकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प जरूर लेना चाहिए।

संकल्प मंत्रब्रह्म मुहूर्तस्नान विधि
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वरूथिनी एकादशी की पूजा विधि क्या है?

दशमी के दिन सात्विक भोजन कर ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी की सुबह नहाकर पीले कपड़े पहनें और संकल्प लें। भगवान की पूजा में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं। दिन भर फलाहार कर रात में भजन-कीर्तन करें।

पूजा विधिदशमी नियमतुलसी दल
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वरूथिनी एकादशी पर विष्णु जी के किस अवतार की पूजा होती है?

इस दिन भगवान विष्णु के 'वराह अवतार' की पूजा होती है, जिन्होंने पृथ्वी को प्रलय से बचाया था। पूजा में पंचामृत से स्नान कराकर पीले फूल, पीले फल, चंदन और सफेद तिल चढ़ाने चाहिए।

वराह अवतारविष्णु पूजाषोडशोपचार
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कामदा एकादशी की सुबह की पूजा विधि (षोडशोपचार) क्या है?

सुबह नहाकर भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें पीले कपड़े पहनाएं, चंदन लगाएं और तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएं। अंत में खीर या फल का भोग लगाकर आरती करें।

षोडशोपचार पूजातुलसी दलवासुदेव स्वरूप
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श्राद्ध में कौन सी 10 चीजों का 'महादान' करना चाहिए?

पितरों के मार्ग की रुकावटें दूर करने के लिए श्राद्ध में 10 महादान करने चाहिए: गाय, ज़मीन, काले तिल, सोना, घी, कपड़े, अनाज, गुड़, चांदी और नमक का दान।

महादानदान विधानपितृ मार्ग
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श्राद्ध में तर्पण का सही तरीका और एकाक्षरी मंत्र क्या है?

तर्पण करते समय अंगूठे और पहली उंगली (तर्जनी) के बीच के हिस्से से काले तिल मिला हुआ जल छोड़ना चाहिए। जल देते समय "ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः" मंत्र का जाप करें।

तर्पण विधिएकाक्षरी मंत्रपितृ तीर्थ
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श्राद्ध की 'पंचबलि' क्या है और इसमें किन 5 जीवों को भोजन दिया जाता है?

श्राद्ध में ब्राह्मण को खिलाने से पहले 5 जीवों को भोजन दिया जाता है: गाय (देवताओं के लिए), कुत्ता (यमराज के मार्ग रक्षक), कौआ (पितरों के प्रतिनिधि), देवता (प्रकृति) और चींटी (सूक्ष्म जीवों के लिए)।

पंचबलिकाक बलिगौ बलि
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कालभैरव को क्या भोग (प्रसाद) चढ़ाना चाहिए?

गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव को हमेशा सात्विक भोग जैसे- उड़द की दाल के बड़े, इमरती, गुड़, चना, दही और फलों का प्रसाद ही चढ़ाना चाहिए।

भोगप्रसादसात्विक भोग
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कालभैरव की पूजा में कौन सा दीपक (चौमुखी) जलाना चाहिए?

भगवान कालभैरव की पूजा में हमेशा सरसों के तेल का 'चौमुखी दीपक' (चार बत्तियों वाला दीया) जलाना चाहिए। यह पूजा का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

चौमुखी दीपकसरसों का तेलदीपक
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मासिक कालाष्टमी की पूजा विधि क्या है?

शाम या मध्यरात्रि में भगवान भैरव की प्रतिमा के सामने संकल्प लें। उन्हें स्नान कराकर चंदन या भस्म लगाएं। लाल फूल चढ़ाकर, सरसों के तेल का दीपक जलाएं, भोग लगाएं और अंत में आरती करें।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रषोडशोपचार
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दुर्गाष्टमी की पूजा के बाद हवन (अग्नि कार्य) कैसे करें?

आम की लकड़ी, घी, गूगल, तिल और जौ मिलाकर हवन करें। 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा' बोलते हुए आहुति दें और अंत में नारियल और सुपारी अग्नि में डालकर पूर्णाहूति करें।

हवन विधिअग्नि कार्यपूर्णाहूति
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दुर्गाष्टमी पूजा में माता को कौन सा फूल और भोग (हलवा-चना) चढ़ाएं?

माता को लाल रंग के फूल, विशेषकर लाल 'गुड़हल' या 'कमल' चढ़ाएं। भोग में शुद्ध घी का 'हलवा, पूरी और काले चने' सबसे श्रेष्ठ माने गए हैं। ध्यान रहे, भोग में तुलसी का पत्ता न डालें।

गुड़हलहलवा चनानैवेद्य
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दुर्गाष्टमी की पूजा में कलश और अखंड ज्योति कैसे स्थापित करें?

ईशान कोण में जल भरे कलश में सुपारी, सिक्का और आम के 5 पत्ते डालकर उस पर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। कलश के दाहिनी ओर गाय के घी का या बाईं ओर तिल के तेल का अखंड दीपक जलाएं।

कलश स्थापनाअखंड ज्योतिरुद्रयामल तंत्र
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मासिक दुर्गाष्टमी की सुबह की पूजा विधि क्या है?

सुबह तिल के जल से स्नान कर लाल कपड़े पहनें। "श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं मासिक दुर्गाष्टमी व्रतं अहं करिष्ये" बोलकर संकल्प लें। माता की मूर्ति स्थापित कर गणेश पूजन के बाद माता को पंचामृत से स्नान कराएं और सुहाग सामग्री चढ़ाएं।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रषोडश मातृका
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सत्यनारायण पूजा में केले के खंभे और कलश क्यों लगाए जाते हैं?

केले का पेड़ पवित्रता, हरियाली और घर में वृद्धि (उर्वरता) का प्रतीक होता है। वहीं, आम के पत्तों और नारियल वाला कलश पूरे ब्रह्मांड और वरुण देवता (जल) का प्रतीक माना जाता है।

केले के खंभेकलश स्थापनामंडप
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सत्यनारायण भगवान का प्रसाद (सपाद भक्ष्य) कैसे बनता है?

प्रसाद सवा के अनुपात (1.25 किलो या सवा पाव) में बनता है। इसे बनाने के लिए 5 चीजें लगती हैं: आटा (या सूजी), गाय का दूध, गाय का घी, चीनी (या गुड़) और केला।

सपाद भक्ष्यप्रसादशिन्नी
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सत्यनारायण पूजा का संकल्प कैसे लें? (मंत्र सहित)

हाथ में जल, चावल और फूल लेकर भगवान का ध्यान करें और मंत्र बोलें: "मम सर्व पाप क्षय पूर्वकं... श्री सत्यनारायण देवता प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।" फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।

संकल्प मंत्रपूजा विधिकाम्य कर्म
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शनिवार व्रत की पूजा विधि और संकल्प मंत्र क्या है?

शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पर शनि देव (सुपारी/यंत्र) स्थापित करें। संकल्प लें, सरसों का तेल चढ़ाएं, अपराजिता/शमी के फूल चढ़ाकर उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं और दीपक जलाएं।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रतैलभ्यंग
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काली माता को कौन सा फूल चढ़ाएं?

काली माता को लाल 'गुड़हल' का फूल सबसे ज्यादा पसंद है। चूंकि शनिवार का दिन है, इसलिए शनि शांति के लिए नीले रंग का 'अपराजिता' फूल भी चढ़ाना बहुत शुभ होता है।

पुष्पगुड़हलअपराजिता
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शनिवार काली पूजा की विधि क्या है?

काले कपड़े पहनें, शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं। घर आकर माता के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं (जिसमें काले तिल और लौंग हों), लाल फूल चढ़ाएं और चालीसा पढ़ें।

पूजा विधिदीपकसरसों का तेल
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संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चाँद निकलने पर एक लोटे में पानी, कच्चा दूध, चावल, लाल चंदन और लाल फूल मिलाकर चंद्रमा को देखते हुए मंत्रों के साथ अर्घ्य देना चाहिए।

चंद्र अर्घ्यअर्घ्य मंत्रचंद्र पूजा
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संकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे करें?

शाम को गणेश जी की स्थापना कर पंचामृत से स्नान कराएं। फिर लाल चंदन, लाल फूल, 21 दूर्वा और 21 मोदक चढ़ाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें और आरती करें।

पूजा विधिकलश स्थापना21 दूर्वा
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शिव पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना कैसे करें?

पूजा के बाद हाथ जोड़कर शिव जी से प्रार्थना करें कि अज्ञानवश पूजा में जो भी कमी रह गई हो, उसे अपनी कृपा से क्षमा कर सफल बनाएं।

क्षमा प्रार्थनापूजा मंत्रशिव पुराण
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पार्थिव शिवलिंग की पूजा कैसे करते हैं?

शुद्ध मिट्टी, गोबर और भस्म से अंगूठे के आकार का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करना 'पार्थिव पूजन' कहलाता है। यह कलयुग में सबसे श्रेष्ठ पूजा है।

पार्थिव शिवलिंगमिट्टी का शिवलिंगशिव पुराण
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शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा कैसे करते हैं?

रात के चार हिस्सों में अलग-अलग चीजों (दूध, दही, घी, शहद) से शिव जी का अभिषेक किया जाता है। हर प्रहर की पूजा का अपना विशेष फल है।

चार प्रहरअभिषेकपूजा नियम
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पूर्णिमा के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चांदी या तांबे के लोटे में कच्चा दूध, पानी, सफेद फूल, चंदन और चावल मिलाकर चंद्रमा को चढ़ाएं। इसके बाद ही प्रसाद खाकर व्रत खोलें।

चंद्र अर्घ्यअर्घ्य मंत्रपारण
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पूर्णिमा व्रत की पूजा कैसे करें?

सुबह तिल और आंवले के जल से नहाकर संकल्प लें। शाम को कलश स्थापित कर भगवान सत्यनारायण की 16 तरीकों से पूजा करें, कथा पढ़ें और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

सत्यनारायण पूजासंकल्पषोडशोपचार
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अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण कैसे करें?

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। तांबे या चाँदी के लोटे में जल और काले तिल लेकर, अंगूठे और पहली उंगली के बीच (पितृ तीर्थ) से जल गिराते हुए पितरों को याद करें।

पितृ तर्पणकुश की अंगूठीतर्पण विधि
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शनिवार को छाया दान कैसे करते हैं?

एक लोहे या कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखकर एक सिक्का डालें और उसे मंदिर में दान कर दें। इसे छाया दान कहते हैं।

छाया दानरोग मुक्तितेल का दान
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शनिवार व्रत की पूजा कैसे करें?

पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पहनकर पूजा करें। शनि देव को सरसों का तेल, नीले फूल, काले तिल और उड़द की दाल का भोग लगाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

पूजा विधिसरसों का तेललोहे की कील
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वैभव लक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा क्यों करते हैं?

श्रीयंत्र माता लक्ष्मी की शक्ति का साक्षात प्रतीक है। नियम के अनुसार श्रीयंत्र की पूजा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

श्रीयंत्रअष्टलक्ष्मीतांत्रिक ऊर्जा
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वैभव लक्ष्मी व्रत में क्या प्रसाद चढ़ता है?

इस व्रत में माता को चावल की खीर या शक्कर-दूध का भोग लगाया जाता है। सफेद और मीठा प्रसाद शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी (क्षीरसागर से उत्पन्न) को अति प्रिय है।

खीर का प्रसादसफेद भोजनशुक्र ग्रह
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वैभव लक्ष्मी व्रत की पूजा कैसे करें?

लाल कपड़ा बिछाकर चावल की ढेरी पर कलश रखें। कलश के ऊपर कटोरी में सिक्का और पीछे श्रीयंत्र रखें। कुमकुम, चंदन लगाकर लाल फूल चढ़ाएं और कथा पढ़ें।

पूजा विधिकलश स्थापनालाल कपड़ा
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संतोषी माता व्रत की पूजा कैसे करें?

शुक्रवार को कलश स्थापित कर गुड़ और चने का भोग लगाएं। माता की कथा पढ़ें और आरती करें। यह बहुत सरल पूजा है जिसमें किसी मंत्र या पंडित की आवश्यकता नहीं होती।

पूजा विधिघरेलू धर्मसरल पूजा
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संतोषी माता के व्रत में क्या प्रसाद चढ़ता है?

इस व्रत में केवल गुड़ और भुने हुए चने का प्रसाद चढ़ता है। यह दर्शाता है कि माता छप्पन भोग नहीं, बल्कि भक्तों का सच्चा भाव और 'संतोष' देखती हैं।

गुड़ और चनाप्रसादसवा आना
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गुरुवार व्रत की पूजा कैसे करें?

पीले कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और केले के पेड़ की स्थापना करें। हल्दी-चंदन का तिलक लगाकर पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और जल अर्पित करें। अंत में बेसन का भोग लगाकर कथा और आरती करें।

पूजा विधिकेले की पूजाकलश स्थापना
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गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते हैं?

गणेश पुराण की एक कथा के अनुसार भगवान गणेश ने तुलसी को श्राप दिया था, इसी वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना बिल्कुल मना है।

तुलसी निषेधगणेश पुराणवर्जित सामग्री
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पूजा विधि — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पूजा विधि श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पूजा विधि को गहराई से समझने का तरीका

पूजा विधि के पेज 2 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

211 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।