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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 5) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

जम्बू नदी क्या है और कैसे बनती है?

जम्बूद्वीप के दिव्य जम्बू वृक्ष के हाथी-आकार के फल गिरकर फटते हैं। उनके रस से जम्बू नदी बनती है जिसे पीने वाले को रोग, बुढ़ापा और शोक नहीं होता।

जम्बू नदीजम्बू वृक्षफल
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प्रियव्रत के रथ के पहियों से सात समुद्र कैसे बने?

प्रियव्रत के रथ की सात परिक्रमाओं से पृथ्वी पर सात वलयाकार खाइयाँ बनीं जो सात महासागर बन गईं और उनके बीच के भू-भाग सप्तद्वीप बन गए।

प्रियव्रतरथ पहिएसात समुद्र
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महाराज प्रियव्रत ने रात्रि का अंधकार मिटाने के लिए क्या किया?

महाराज प्रियव्रत ने सूर्य के रथ का पीछा करते हुए अपने तेजोमय रथ पर सवार होकर पृथ्वी की सात बार परिक्रमा की ताकि रात्रि का अंधकार मिट सके।

प्रियव्रतरात्रिसूर्य
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सुमेरु पर्वत के शिखर पर क्या है?

सुमेरु पर्वत के शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' (शातकौम्भी) है जो 10,000 योजन विस्तृत है। इसे आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हुए हैं।

सुमेरु पर्वतब्रह्मपुरीब्रह्मा
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सुमेरु पर्वत की ऊँचाई और आकार कैसा है?

सुमेरु पर्वत 84,000 योजन ऊँचा और 16,000 योजन गहरा है। शिखर का व्यास 32,000 योजन है जबकि आधार केवल 16,000 योजन — यह उल्टे शंकु जैसा है।

सुमेरु पर्वतऊँचाईआकार
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सुमेरु पर्वत कहाँ है और इसका महत्व क्या है?

सुमेरु पर्वत जम्बूद्वीप के केंद्र में इलावृत वर्ष के मध्य में है। यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड की धुरी है और इसके शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' है।

सुमेरु पर्वतजम्बूद्वीपइलावृत वर्ष
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महाराज प्रियव्रत ने सात द्वीपों का शासन किसे सौंपा?

प्रियव्रत के सात पुत्रों को सात द्वीप मिले — आग्नीध्र (जम्बू), इध्मजिह्व (प्लक्ष), यज्ञबाहु (शाल्मलि), हिरण्यरेता (कुश), घृतपृष्ठ (क्रौंच), मेधातिथि (शाक), वीतिहोत्र (पुष्कर)।

प्रियव्रतसात पुत्रशासन
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सात महासागरों में किस-किस द्रव का वर्णन है?

सात महासागर — लवण (खारा जल), इक्षु (गन्ने का रस), सुरा (मदिरा), सर्पि (घी), दधि (दही), दुग्ध (दूध) और जल (मीठा जल) — से भरे हैं।

सात महासागरद्रवघी
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प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती द्वीप से कितना बड़ा है?

प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती से ठीक दोगुना बड़ा है। जम्बू द्वीप 1 लाख योजन से शुरू होकर पुष्कर द्वीप 64 लाख योजन तक है।

सप्तद्वीपदोगुनाविस्तार
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भूमण्डल की संरचना कमल-पत्र के समान क्यों बताई गई है?

जम्बूद्वीप उत्तर-दक्षिण में दबा और मध्य में उभरा होने से कमल-पत्र जैसा दिखता है। सुमेरु पर्वत कमल की कर्णिका और नव-वर्ष उसकी पंखुड़ियाँ हैं।

भूमण्डलकमल पत्रआकार
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लोकालोक पर्वत क्या है?

लोकालोक पर्वत भूमण्डल की सबसे बाहरी सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। यह 10,000 योजन ऊँचा है और यहाँ स्वयं भगवान विष्णु निवास करते हैं।

लोकालोक पर्वतप्रकाश अंधकारभूलोक सीमा
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भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?

मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।

भूलोकमृत्युपरलोक
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जम्बूद्वीप का नाम जम्बू क्यों पड़ा?

जम्बूद्वीप का नाम एक विशाल दिव्य जम्बू (जामुन) वृक्ष के कारण पड़ा। इसके फलों के रस से जम्बू नदी बनती है और उस रस से जाम्बूनद (दिव्य सोना) उत्पन्न होता है।

जम्बूद्वीपजम्बू वृक्षजाम्बूनद
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गंगा नदी का भूलोक पर अवतरण कैसे हुआ?

भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के चरण के नाखून से ब्रह्मांड का आवरण टूटा और बाहर का कारण-जल भीतर आया। चरण-स्पर्श से वह 'विष्णुपदी गंगा' बनी।

गंगाअवतरणवामन अवतार
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महाराज प्रियव्रत कौन थे?

महाराज प्रियव्रत स्वायम्भुव मनु के पुत्र थे जिन्होंने 11 करोड़ वर्षों तक शासन किया। उनके रथ के पहियों से सप्तद्वीप बने और उन्होंने सात पुत्रों को सात द्वीपों का राजा बनाया।

महाराज प्रियव्रतस्वायम्भुव मनुभूमण्डल
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सप्तद्वीपों की उत्पत्ति कैसे हुई?

महाराज प्रियव्रत के सूर्य-रथ के पीछे सात बार परिक्रमा करने से रथ के पहियों के दबाव से सात खाइयाँ बनीं जो सात महासागर बन गईं और बीच के भू-भाग सप्तद्वीप बन गए।

सप्तद्वीपउत्पत्तिप्रियव्रत
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देवता भारत में जन्म लेने की इच्छा क्यों करते हैं?

देवता स्वर्ग में भी भारत में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि केवल यहाँ मोक्ष संभव है। विष्णु पुराण में 'गायन्ति देवाः' श्लोक में यही कहा गया है।

देवताभारतवर्षजन्म
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भारतवर्ष को सबसे श्रेष्ठ क्यों माना गया है?

भारतवर्ष एकमात्र कर्मभूमि है जहाँ मोक्ष प्राप्त हो सकता है। अन्य वर्ष केवल भोगभूमि हैं। यहाँ चारों युग होते हैं और नए कर्म करने की स्वतंत्रता है।

भारतवर्षकर्मभूमिमोक्ष
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सुमेरु पर्वत क्या है?

सुमेरु पर्वत जम्बूद्वीप के केंद्र में स्थित सम्पूर्ण ब्रह्मांड की धुरी है। यह 84,000 योजन ऊँचा और 16,000 योजन गहरा है। इसके शिखर पर ब्रह्मा जी की पुरी है।

सुमेरु पर्वतमेरुब्रह्मांड धुरी
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जम्बूद्वीप क्या है और कहाँ है?

जम्बूद्वीप सप्तद्वीपों के केंद्र में स्थित है। इसका विस्तार एक लाख योजन है और यह लवण सागर से घिरा है। इसके केंद्र में सुमेरु पर्वत है।

जम्बूद्वीपभूलोकलवण सागर
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सात महासागर कौन-कौन से हैं?

सात महासागर हैं — लवण सागर (खारा जल), इक्षु सागर (गन्ने का रस), सुरा सागर (मदिरा), सर्पि सागर (घी), दधि सागर (दही), दुग्ध सागर (दूध) और जल सागर (मीठा जल)।

सात महासागरलवण सागरइक्षु सागर
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भूलोक में कितने द्वीप हैं और उनके नाम क्या हैं?

भूलोक में सात द्वीप हैं — जम्बू, प्लक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर। प्रत्येक द्वीप अपने पूर्ववर्ती से दोगुना बड़ा है।

सप्तद्वीपजम्बू द्वीपपुष्कर द्वीप
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भूलोक का विस्तार कितना है?

भूलोक का विस्तार पचास करोड़ योजन (लगभग चार अरब मील) है। यह सात द्वीपों और सात महासागरों में विभक्त है जिनमें प्रत्येक द्वीप पूर्ववर्ती से दोगुना बड़ा है।

भूलोकविस्तारपचास करोड़ योजन
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भूलोक को कर्मभूमि क्यों कहते हैं?

भूलोक को कर्मभूमि इसलिए कहते हैं क्योंकि केवल यहाँ नए कर्म करने की स्वतंत्रता है और केवल यहीं मोक्ष प्राप्त हो सकता है। अन्य सभी लोक केवल भोगभूमियाँ हैं।

भूलोककर्मभूमिमोक्ष
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भूलोक के नीचे कौन-कौन से लोक हैं?

भूलोक के नीचे सात अधोलोक हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। यहाँ सर्प-मणियों का प्रकाश है और असुर-नाग-दानव रहते हैं।

भूलोकअधोलोकपाताल
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भूलोक ब्रह्मांड के 14 लोकों में कहाँ है?

भूलोक 14 लोकों में मध्य लोक है — यह ऊर्ध्व लोकों का प्रथम सोपान है। ऊपर 6 लोक और नीचे 7 अधोलोक हैं। भगवान शेषनाग इसे अपने फनों पर धारण करते हैं।

भूलोक14 लोकमध्य लोक
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भूलोक क्या है?

भूलोक परब्रह्म की योगमाया द्वारा रचित कर्म, भोग और मोक्ष का क्षेत्र है। जहाँ तक सूर्य-चन्द्र का प्रकाश पहुँचे और प्राणी विचरण करें वह सब भूलोक है।

भूलोककर्मभूमिवैदिक
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भुवर्लोक में रहने वाले जीव पुनः पृथ्वी पर क्यों जन्म लेते हैं?

त्रिगुणात्मक बंधन, पुण्यों का क्षीण होना और गीता का यह वचन कि सभी लोक पुनरावर्ती हैं — इन कारणों से भुवर्लोक के जीव पुनः पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।

भुवर्लोकपुनर्जन्मत्रिगुण
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उपनिषदों में ॐ रूपी पक्षी में भुवर्लोक को कहाँ बताया गया है?

उपनिषदों में ॐ रूपी पक्षी के रूपक में भुवर्लोक को पक्षी के घुटनों में बताया गया है जो इसकी मध्यवर्ती और पारगमन अवस्था का प्रतीक है।

उपनिषदपक्षी रूपक
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अग्निहोत्र की आहुति देवताओं तक कैसे पहुँचती है?

यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व वायु देव के माध्यम से भुवर्लोक से होकर स्वर्लोक के देवताओं तक पहुँचता है। भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच ब्रह्मांडीय संचार मार्ग है।

अग्निहोत्रआहुतिभुवर्लोक
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देवी भागवत पुराण में भुवर्लोक को देवी के स्वरूप में कहाँ बताया गया है?

देवी भागवत पुराण में भुवर्लोक को देवी के ब्रह्मांडीय स्वरूप की नाभि में स्थित बताया गया है — ठीक उसी प्रकार जैसे भागवत में विराट पुरुष की नाभि में।

देवी भागवतभुवर्लोकनाभि
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प्रलय के बाद भुवर्लोक का पुनर्निर्माण कैसे होता है?

प्रलय में जलमग्न त्रैलोक्य में नारायण शेषनाग पर शयन करते हैं। जब ब्रह्मा का अगला दिन (कल्प) शुरू होता है तब वे अपने रजोगुण से भुवर्लोक सहित तीनों लोकों का पुनर्निर्माण करते हैं।

प्रलयपुनर्निर्माणभुवर्लोक
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राहु से सिद्धलोक कितनी दूरी पर है?

भागवत (५.२४.४) के अनुसार राहु से दस हजार योजन (अस्सी हजार मील) नीचे सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक स्थित हैं जो भुवर्लोक के सर्वोच्च क्षेत्र हैं।

राहुसिद्धलोकदूरी
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भुवर्लोक में रहने वाली आत्माओं की त्रिगुणात्मक स्थिति क्या होती है?

ऊपरी भुवर्लोक के सिद्धादि रजो-सात्त्विक हैं जबकि निचले भुवर्लोक के प्रेतादि तमोगुण प्रधान हैं। दोनों ही पूर्णतः सत्वगुणी न होने से मोक्ष नहीं पाते।

त्रिगुणभुवर्लोकसत्व रज तम
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भुवर्लोक के निचले हिस्से में तमोगुणी सत्ताएं क्यों रहती हैं?

निचले भुवर्लोक का धुंधलापन और अंधकार तमोगुणी सत्ताओं के अनुकूल है। साथ ही तमोगुण उन्हें उच्च लोकों तक जाने से रोकता है इसलिए वे यहीं रहती हैं।

भुवर्लोकतमोगुणनिचला हिस्सा
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ब्रह्मा के रजोगुण से तीन लोकों की रचना कैसे हुई?

भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने तपोबल और रजोगुण से भूः, भुवः और स्वः की रचना की। रजोगुण से उत्पन्न होने के कारण ये तीनों परिवर्तनशील और नश्वर हैं।

ब्रह्मारजोगुणतीन लोक
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सांवर्तक मेघ क्या होते हैं?

सांवर्तक मेघ प्रलयकालीन विशेष बादल हैं जो भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक के भस्म होने के बाद सौ वर्षों तक भयंकर वर्षा करके पूरे त्रैलोक्य को जलमग्न कर देते हैं।

सांवर्तक मेघप्रलयभुवर्लोक
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नैमित्तिक प्रलय में सात सूर्यों का क्या काम है?

प्रलय में सूर्य की सात रश्मियाँ सात प्रलयंकारी सूर्य बन जाती हैं जिनकी प्रचंड अग्नि से पहले भूलोक फिर भुवर्लोक और फिर स्वर्लोक भस्म हो जाते हैं।

सात सूर्यनैमित्तिक प्रलयभुवर्लोक
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महर्लोक प्रलय में नष्ट क्यों नहीं होता जबकि भुवर्लोक नष्ट हो जाता है?

भुवर्लोक कृतक (नश्वर) है इसलिए प्रलय में नष्ट होता है। महर्लोक अकृतक है — अग्नि उसे जला नहीं सकती परंतु ताप से भृगु आदि ऋषि वहाँ से जनलोक चले जाते हैं।

महर्लोकभुवर्लोकप्रलय
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भुवर्लोक को नाभि स्थान क्यों कहा गया है?

भुवर्लोक को नाभि इसलिए कहते हैं क्योंकि जैसे नाभि शरीर में प्राण ऊर्जा का केंद्र है वैसे ही भुवर्लोक ब्रह्मांड की मध्यवर्ती प्राण-ऊर्जा का केंद्र है।

नाभि स्थानभुवर्लोकविराट स्वरूप
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भुवर्लोक में 'विहाराजिरम्' का क्या अर्थ है?

'विहाराजिरम्' का अर्थ है 'विचरण का क्षेत्र या क्रीड़ा-स्थल'। भागवत में यह भुवर्लोक के उस निचले हिस्से को कहते हैं जहाँ यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेत विचरण करते हैं।

विहाराजिरम्भुवर्लोकयक्ष राक्षस
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'यावद्वायु: प्रवाति यावन्मेघा उपलभ्यन्ते' का क्या अर्थ है?

इस श्लोक का अर्थ है — 'जहाँ तक वायु बहती है और जहाँ तक बादल दिखते हैं' — वह क्षेत्र भुवर्लोक (अंतरिक्ष) का निचला और मध्य हिस्सा है।

यावद्वायुश्लोक अर्थभुवर्लोक
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भुवर्लोक और आधुनिक विज्ञान के वायुमंडल में क्या समानता पुराणों में बताई गई है?

भागवत पुराण कहता है कि जहाँ तक वायु बहती है और बादल दिखते हैं वहाँ तक अंतरिक्ष है। यह आधुनिक विज्ञान के वायुमंडल की निश्चित सीमा की अवधारणा से मेल खाता है।

भुवर्लोकआधुनिक विज्ञानवायुमंडल
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कृतक और अकृतक लोकों में क्या मौलिक अंतर है?

कृतक लोक (भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक) प्रलय में पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। अकृतक लोक (महर्लोक आदि) प्रलय से आंशिक रूप से ही प्रभावित होते हैं।

कृतकअकृतकभुवर्लोक
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भुवर्लोक की 'प्राण-मनस' अवधारणा का क्या अर्थ है?

प्राण-मनस अवधारणा का अर्थ है कि भुवर्लोक प्राण (जीवन ऊर्जा) और मन (चेतना) का संगम क्षेत्र है। योग साधक प्राण-नियंत्रण से यहाँ की सिद्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।

प्राण मनसभुवर्लोकवायु पुराण
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मार्कण्डेय पुराण में ॐ और त्रैलोक्य का समन्वय कैसे किया गया है?

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार ॐ के 'अ' = भूलोक, 'उ' = भुवर्लोक और 'म' = स्वर्लोक। भुवर्लोक परब्रह्म का मध्यवर्ती कंपन है, कोई अलग इकाई नहीं।

मार्कण्डेय पुराणत्रैलोक्य
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विष्णु पुराण और भागवत पुराण में भुवर्लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण भुवर्लोक का खगोलीय और गणितीय वर्णन करता है जबकि भागवत पुराण इसके निवासियों, उप-लोकों और भगवान के विराट स्वरूप में इसकी नाभि-स्थिति का विस्तृत वर्णन करता है।

विष्णु पुराणभागवत पुराणभुवर्लोक
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 5 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।