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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 6) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

योग साधक मृत्यु के बाद सिद्धलोक में क्यों जाते हैं?

जो योग साधक पूर्ण वैराग्य नहीं पा सके वे मृत्यु के बाद अपनी सिद्धियों के फलस्वरूप भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर सिद्धलोक में जन्म लेते हैं।

योग साधकसिद्धलोकभुवर्लोक
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अकाल मृत्यु के बाद आत्मा भुवर्लोक में कैसे फंसती है?

अकाल मृत्यु में आत्मा की सामान्य यात्रा बाधित होती है। वह लिंग शरीर में प्रेत योनि को प्राप्त होकर भुवर्लोक के घने वायुमंडल में तीव्र वायु के बीच बिना आश्रय के फंस जाती है।

अकाल मृत्युभुवर्लोकप्रेत
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वायु पुराण भुवर्लोक को 'प्राण-मनस लोक' क्यों कहता है?

वायु पुराण भुवर्लोक को प्राण-मनस लोक इसलिए कहता है क्योंकि यह वायु (प्राण) तत्व से बना है, यहाँ की सत्ताएं प्राणमय हैं और यह स्थूल तथा आध्यात्मिक जगत के बीच की कड़ी है।

वायु पुराणभुवर्लोकप्राण मनस
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नैमित्तिक प्रलय क्या है और इसमें भुवर्लोक का क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में होती है। इसमें सात प्रलयंकारी सूर्यों की अग्नि से भुवर्लोक का वायुमंडल पूरी तरह भस्म हो जाता है।

नैमित्तिक प्रलयभुवर्लोकब्रह्मा का दिन
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यक्ष का भुवर्लोक में क्या स्थान है?

यक्ष भुवर्लोक के निचले हिस्से में रहने वाले धन और प्रकृति के रक्षक हैं जो कुबेर के अनुचर हैं। इनमें भौतिक आसक्ति प्रबल होती है।

यक्षभुवर्लोककुबेर
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मदालसा के उपदेश में भुवर्लोक की नश्वरता का क्या संदेश है?

मदालसा के अनुसार भुवर्लोक सहित सभी लोक आत्मा के अस्थायी पड़ाव हैं। यहाँ की सिद्धियाँ भी कर्म-बंधन से मुक्त नहीं करतीं। अंतिम लक्ष्य केवल मोक्ष है।

मदालसाभुवर्लोकनश्वरता
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भुवर्लोक का जीव पुनः पृथ्वी पर क्यों लौटता है?

गीता के अनुसार सभी लोक पुनरावर्ती हैं। भुवर्लोक में पुण्य और सिद्धियाँ क्षीण होने पर त्रिगुणात्मक बंधन के कारण जीव को पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है।

भुवर्लोकपुनर्जन्मपृथ्वी
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भुवर्लोक में बादलों और वर्षा का संचालन कैसे होता है?

भुवर्लोक में बादलों का निर्माण और वर्षा का संचालन वायु देव और उनके उनंचास मरुत गणों द्वारा किया जाता है जो इस लोक के अधिपति हैं।

भुवर्लोकबादलवर्षा
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महाराज पृथु के यज्ञ में भुवर्लोक के निवासी क्यों आए?

महाराज पृथु के यज्ञ में भगवान विष्णु प्रकट हुए तो सिद्धलोक और विद्याधरलोक के निवासी भी वहाँ उपस्थित हुए क्योंकि भुवर्लोक की सत्ताएं भगवान के महान आयोजनों में सम्मिलित होती हैं।

महाराज पृथुयज्ञभुवर्लोक
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भगवान के विराट स्वरूप में भुवर्लोक कहाँ स्थित है?

भगवान के विराट स्वरूप में भुवर्लोक नाभि-स्थान पर है। पाताल से भूलोक चरणों में है, भुवर्लोक नाभि में है और स्वर्लोक वक्षस्थल-सिर में।

विराट स्वरूपभुवर्लोकनाभि
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मरुत गण कौन होते हैं और भुवर्लोक में उनका क्या काम है?

मरुत गण वायु देव के उनंचास सहायक देवता हैं जो भुवर्लोक में बादलों का निर्माण, उनका संचलन और पृथ्वी पर वर्षा कराने का कार्य करते हैं।

मरुत गणभुवर्लोकवायु देव
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भुवर्लोक के राक्षस पाताल के असुरों से कैसे अलग हैं?

भुवर्लोक के राक्षस वायुमंडलीय और सूक्ष्म होते हैं जो अंतरिक्ष में विचरण करते हैं जबकि पाताल के असुर भूमि के नीचे रहने वाली स्थूल सत्ताएं हैं।

भुवर्लोकराक्षसपाताल
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चारण कौन होते हैं और भुवर्लोक में उनकी क्या भूमिका है?

चारण अर्ध-दैवीय गायक और स्तुति-पाठक हैं जो भुवर्लोक में अंतरिक्ष में विचरण करते हुए देवताओं और भगवान के अवतारों की कीर्ति का गान करते हैं।

चारणभुवर्लोकगायक
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सिद्धगण की अष्ट-सिद्धियाँ क्या हैं?

अष्ट-सिद्धियाँ हैं — अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व और कामावसायिता। इनसे सिद्धगण बिना विमान के अंतरिक्ष में विचरण करते हैं।

सिद्धगणअष्ट सिद्धियाँअणिमा
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भुवर्लोक के ऊपरी और निचले हिस्से में क्या अंतर है?

ऊपरी भुवर्लोक में सिद्ध, चारण और विद्याधर जैसी सात्त्विक सत्ताएं रहती हैं जबकि निचले हिस्से में यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेत जैसी तामसिक सत्ताएं विचरण करती हैं।

भुवर्लोकऊपरी हिस्सानिचला हिस्सा
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पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी कितनी बताई गई है?

विष्णु पुराण के अनुसार पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी एक लाख योजन (लगभग आठ लाख मील) है और इसी बीच के आकाश में भुवर्लोक फैला हुआ है।

पृथ्वीसूर्यमंडलएक लाख योजन
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विष्णु पुराण में भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार कितना बताया गया है?

विष्णु पुराण के अनुसार भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार बिल्कुल भूलोक (पृथ्वी) के ही समान है। दोनों का घेरा एक जैसा है।

विष्णु पुराणभुवर्लोकक्षैतिज विस्तार
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राहु ग्रह का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

राहु ग्रह सूर्य से दस हजार योजन नीचे है और राहु के नीचे से भुवर्लोक की सर्वोच्च सीमा शुरू होती है जहाँ सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक हैं।

राहुभुवर्लोकसूर्यमंडल
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भुवर्लोक की ऊपरी सीमा कहाँ है और निचली सीमा कहाँ से शुरू होती है?

भुवर्लोक की निचली सीमा पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर से और ऊपरी सीमा राहु ग्रह के नीचे तक है। इसके बीच सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक हैं।

भुवर्लोकसीमाराहु
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सिद्धगण बिना विमान के कैसे यात्रा करते हैं?

सिद्धगण अपनी जन्मजात योग-शक्ति और अंतर्धान विद्या से बिना विमान के अंतरिक्ष में विचरण करते हैं। उनकी अष्ट-सिद्धियाँ उन्हें यह शक्ति देती हैं।

सिद्धगणभुवर्लोकविमान
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भीष्म पितामह की मृत्यु के समय भुवर्लोक के निवासियों ने क्या किया?

भीष्म पितामह के देह त्याग के समय भुवर्लोक के सिद्ध, चारण और विद्याधर वहाँ एकत्रित हुए और अंतरिक्ष से पुष्पों की भारी वर्षा की।

भीष्म पितामहभुवर्लोकसिद्ध
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भगवद्गीता में भुवर्लोक के बारे में क्या कहा गया है?

गीता (८.१६) में कृष्ण कहते हैं कि ब्रह्मलोक से भूलोक तक सभी लोक पुनरावर्ती हैं। भुवर्लोक में भी पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है।

भगवद्गीताभुवर्लोकपुनरावर्ती
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प्रलय में भुवर्लोक का क्या होता है?

प्रलय में सात प्रलयंकारी सूर्यों की अग्नि से भुवर्लोक का वायुमंडल पूरी तरह भस्म हो जाता है और फिर सांवर्तक मेघों की वर्षा से यह जलमग्न हो जाता है।

प्रलयभुवर्लोकनैमित्तिक प्रलय
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यज्ञ का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व भुवर्लोक से होकर देवताओं तक स्वर्लोक में पहुँचता है। भुवर्लोक यज्ञीय ऊर्जाओं और मन्त्रों का ब्रह्मांडीय संवाहक है।

यज्ञभुवर्लोकआहुति
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श्राद्ध और पिंडदान का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

भुवर्लोक में भटक रही प्रेत-आत्माओं को श्राद्ध और पिंडदान से सूक्ष्म ऊर्जा मिलती है जिससे वे इस कष्टदायी लोक को पार करके पितृलोक तक पहुँच सकती हैं।

श्राद्धपिंडदानभुवर्लोक
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अकाल मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ जाती है?

अकाल मृत्यु (आत्महत्या, दुर्घटना) के बाद आत्मा प्रेत योनि को प्राप्त होकर भुवर्लोक के निचले वायुमंडल में फंस जाती है और तीव्र वायु के बीच बिना आश्रय के भटकती है।

अकाल मृत्युभुवर्लोकप्रेत योनि
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पुण्यात्मा के लिए भुवर्लोक कैसा होता है?

पुण्यात्माओं के लिए भुवर्लोक एक पारदर्शी सुगम मार्ग है। वे इससे होकर आसानी से स्वर्लोक या पितृलोक पहुँच जाते हैं बिना यहाँ फंसे।

भुवर्लोकपुण्यात्मास्वर्लोक
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पापी आत्मा मृत्यु के बाद भुवर्लोक में क्यों फंस जाती है?

अत्यधिक पाप कर्म, भौतिक आसक्ति या अकाल मृत्यु के कारण आत्मा सीधे स्वर्ग-नरक नहीं जा पाती और प्रेत योनि में निचले भुवर्लोक में फंस जाती है।

भुवर्लोकपापी आत्मामृत्यु
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भुवर्लोक में भूत-प्रेत क्यों भटकते हैं?

कर्म-बंधन, अकाल मृत्यु या भौतिक आसक्ति के कारण जो आत्माएं पृथ्वी के मोह से मुक्त नहीं हो पातीं वे सूक्ष्म शरीर में भुवर्लोक में भटकती रहती हैं।

भुवर्लोकभूत प्रेतकर्म बंधन
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भुवर्लोक के अधिपति देवता कौन हैं?

भुवर्लोक के अधिपति देवता वायु देव (पवन देव) हैं। वे यहाँ वायु संचालन, बादलों का निर्माण और यज्ञ की आहुति को देवताओं तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।

भुवर्लोकवायु देवअधिपति
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भुवर्लोक में कौन-कौन सी सत्ताएं रहती हैं?

भुवर्लोक में ऊपरी भाग में सिद्ध, चारण और विद्याधर रहते हैं जबकि निचले भाग में यक्ष, राक्षस, भूत, प्रेत और पिशाच विचरण करते हैं।

भुवर्लोकनिवासीसिद्ध
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भुवर्लोक किस तत्व से बना है?

भुवर्लोक मुख्य रूप से वायु-तत्व और आकाश-तत्व से बना है। यहाँ पृथ्वी-तत्व और जल-तत्व का अभाव है, केवल वायु और मेघ (जल वाष्प) हैं।

भुवर्लोकवायु तत्वआकाश तत्व
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कृतक त्रैलोक्य क्या होता है?

भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक — ये तीनों मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। 'कृतक' अर्थात विनाशी — ये तीनों प्रलय के समय नष्ट हो जाते हैं।

कृतक त्रैलोक्यभूलोकभुवर्लोक
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भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच क्यों है?

भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच इसलिए है क्योंकि यह स्थूल भौतिक और दैवीय जगत के बीच पारगमन क्षेत्र है। यहाँ सूक्ष्म सत्ताएं निवास करती हैं जो न पूर्णतः भौतिक हैं न दैवीय।

भुवर्लोकभूलोकस्वर्लोक
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भुवर्लोक को 'अंतरिक्ष' क्यों कहते हैं?

भुवर्लोक को अंतरिक्ष इसलिए कहते हैं क्योंकि यह वहाँ तक फैला है जहाँ तक वायु बहती है और बादल दिखते हैं। यह भौतिक और दैवीय जगत के बीच का मध्यवर्ती आकाशीय क्षेत्र है।

भुवर्लोकअंतरिक्षनाम
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भुवर्लोक कहाँ स्थित है?

भुवर्लोक पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर से लेकर सूर्यमंडल के नीचे तक फैला है। पृथ्वी से सूर्यमंडल की दूरी एक लाख योजन है और इसी के बीच भुवर्लोक है।

भुवर्लोकस्थानभूलोक
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भुवर्लोक क्या है?

भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच स्थित दूसरा ऊर्ध्व लोक है जिसे 'अंतरिक्ष' भी कहते हैं। यह पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर से सूर्यमंडल के नीचे तक फैला हुआ है।

भुवर्लोकलोकअंतरिक्ष
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

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