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लोक प्रश्नोत्तर (पेज 3) — 3617 प्रश्न

लोक से जुड़े 3617 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3617 प्रश्न

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में स्वर्लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण स्वर्लोक को कालगणना और प्रलय से जोड़ता है जबकि भागवत पुराण इसका विस्तृत भौगोलिक, खगोलीय और भक्ति-दृष्टिकोण से वर्णन करता है।

विष्णु पुराणभागवत पुराणस्वर्लोक
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स्वर्लोक के खगोलीय वर्णन में आकाशगंगा को क्या कहा गया है?

भागवत पुराण में शिशुमार चक्र के वर्णन में आकाशगंगा को शिशुमार का 'पेट' (Belly) कहा गया है — यह भगवान वासुदेव के विराट स्वरूप का एक दृश्यमान अंग है।

आकाशगंगाशिशुमारस्वर्लोक
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शिशुमार चक्र का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?

शिशुमार चक्र का दिन में तीन बार स्मरण और नमन करने से उस समय के समस्त पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ 'नमो ज्योतिर्लोकाय' मंत्र का जाप करते हैं।

शिशुमार चक्रध्यानपाप नाश
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शिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?

शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।

शिशुमार चक्रदेवतानक्षत्र
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शिशुमार चक्र में ध्रुव तारा किस स्थान पर है?

शिशुमार चक्र की पूंछ के अंतिम छोर पर ध्रुव तारा स्थित है। यही इस पूरे चक्र की धुरी है जिसके चारों ओर सभी ग्रह-नक्षत्र परिक्रमा करते हैं।

शिशुमार चक्रध्रुव तारापूंछ
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शाक द्वीप में किसकी पूजा होती है?

शाक द्वीप में ऋतव्रत, सत्यव्रत, दानव्रत और अनुव्रत नामक निवासी प्राणायाम और अष्टांग योग द्वारा वायु देव (प्राणतत्व) की उपासना करते हैं।

शाक द्वीपवायु देवयोग
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कुश द्वीप में किसकी पूजा होती है?

कुश द्वीप में कुशल, कोविद, अभियुक्त और कुलक नामक चार वर्ण के निवासी भगवान हरि के अग्नि स्वरूप (जातवेद) की पूजा करते हैं।

कुश द्वीपअग्नि देवजातवेद
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स्वर्लोक में देवताओं का शरीर कैसा होता है?

स्वर्ग में देवताओं को सात्त्विक ऊर्जा से बनी 'भोग-देह' मिलती है जो पंचभौतिक नहीं होती। इसमें भूख-प्यास-बुढ़ापा नहीं होता और यह दिव्य आभा से युक्त होती है।

स्वर्लोकदेव शरीरभोग देह
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नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।

नैमित्तिक प्रलयस्वर्लोकब्रह्मा
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महर्षि दधीचि की अस्थियों का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

महर्षि दधीचि ने स्वर्लोक की रक्षा के लिए अपना शरीर त्याग दिया। उनकी अस्थियों से बने वज्र से इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। यह बलिदान स्वर्लोक के इतिहास में अमर है।

दधीचिअस्थिवज्र
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वृत्रासुर और इन्द्र का युद्ध कैसे हुआ?

त्वष्टा ने पुत्र विश्वरूप के वध से क्रोधित होकर हवन से वृत्रासुर उत्पन्न किया। इन्द्र भयभीत हुए, फिर दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से वृत्रासुर का वध किया।

वृत्रासुरइन्द्रयुद्ध
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इन्द्र की सुधर्मा सभा में कौन से ऋषि आते हैं?

सुधर्मा सभा में महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, हरिश्चन्द्र, विश्वकर्मा, तुम्बुरु, बृहस्पति, शुक्राचार्य और भृगु-सप्तर्षि आते हैं।

सुधर्माऋषिनारद
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मानसोत्तर पर्वत क्या है?

मानसोत्तर 10,000 योजन ऊँचा पर्वत है जो पुष्कर द्वीप के मध्य में है। इस पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं — यह स्वर्लोक का प्रशासनिक केंद्र है।

मानसोत्तर पर्वतपुष्कर द्वीपइन्द्र राजधानी
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पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी का आसन कैसा है?

पुष्कर द्वीप में 10 करोड़ पंखुड़ियों वाला विशाल स्वर्ण कमल है जो ब्रह्मा जी का आसन है। यहाँ मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं।

पुष्कर द्वीपब्रह्माकमल
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शाल्मल द्वीप में गरुड़ का क्या महत्व है?

शाल्मल द्वीप में विशाल शाल्मली वृक्ष पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव का निवास है। यहाँ के निवासी चंद्र देव की पूजा करते हैं।

शाल्मल द्वीपगरुड़विष्णु
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प्लक्ष द्वीप में किसकी उपासना होती है?

प्लक्ष द्वीप में हंस, पतंग, ऊर्ध्वायन और सत्यांग नाम के निवासी 1000 वर्षों तक देवताओं जैसा जीवन जीते हैं और सूर्य देव की उपासना करते हैं।

प्लक्ष द्वीपसूर्य देवउपासना
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स्वर्लोक में सप्तर्षि मंडल कहाँ है?

सप्तर्षि मंडल शिशुमार चक्र के कूल्हे पर स्थित है। यह ध्रुवलोक से 13 लाख योजन नीचे है। इसमें सात महान ऋषियों का निवास माना जाता है।

सप्तर्षि मंडलस्वर्लोकशिशुमार
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ध्रुवलोक का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

ध्रुवलोक स्वर्लोक की सर्वोच्च सीमा है जो सप्तर्षि मंडल से 13 लाख योजन ऊपर है। शिशुमार चक्र की धुरी ध्रुवलोक है जिसके चारों ओर सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं।

ध्रुवलोकस्वर्लोकसर्वोच्च सीमा
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शिशुमार चक्र क्या है?

शिशुमार चक्र भगवान वासुदेव का विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप है जिसमें समस्त ग्रह, नक्षत्र और तारे विभिन्न अंगों में स्थित हैं। इसकी धुरी ध्रुवलोक है।

शिशुमार चक्रस्वर्लोकग्रह नक्षत्र
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जम्बू नदी स्वर्लोक में कैसे बनती है?

जम्बू नदी मेरुमंदराचल पर जम्बू वृक्ष के हाथी-आकार के फलों के 10,000 योजन से गिरने पर बनती है। इसके रस से जाम्बूनद दिव्य सोना बनता है।

जम्बू नदीस्वर्लोकजाम्बूनद
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अरुणोदा नदी कैसे बनती है?

अरुणोदा नदी मंदराचल पर्वत के देवचूत आम्र वृक्षों से गिरने वाले विशाल आम के फलों के रस से बनती है। यह पृथ्वी की नदियों से सर्वथा अलग है।

अरुणोदास्वर्लोकआम
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स्वर्लोक के चार दिव्य उद्यान कौन से हैं?

स्वर्लोक के चार दिव्य उद्यान हैं — नंदन, चैत्ररथ, वैभ्राजक और सर्वतोभद्र। इनमें कल्पवृक्ष और पारिजात हर इच्छा पूरी करते हैं।

स्वर्लोकदिव्य उद्याननंदन
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स्वर्लोक में चार दिव्य झीलें कौन सी हैं?

स्वर्लोक में चार दिव्य झीलें हैं जिनमें शुद्ध जल, दूध, शहद और गन्ने का रस भरा है। इनके सेवन से अष्ट-सिद्धियाँ और योग शक्तियाँ स्वतः प्राप्त होती हैं।

स्वर्लोकचार झीलेंदूध
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सुमेरु पर्वत का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

सुमेरु पर्वत स्वर्लोक का भौगोलिक केंद्र है। इसके 84,000 योजन ऊँचे शिखर पर देवताओं की राजधानियाँ हैं। यह जम्बूद्वीप के मध्य इलावृत वर्ष में स्थित है।

सुमेरु पर्वतस्वर्लोकस्वर्ग राजधानी
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शुंभ-निशुंभ ने स्वर्लोक से क्या छीना था?

शुंभ-निशुंभ ने इन्द्र, अग्नि, कुबेर, सूर्य, चंद्र, वायु और वरुण के यज्ञ-भाग और प्रशासनिक अधिकार छीनकर देवताओं को स्वर्ग से निर्वासित कर दिया था।

शुंभ निशुंभस्वर्लोकयज्ञ भाग
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क्या असुर भी स्वर्लोक पर अधिकार कर सकते हैं?

हाँ, असुर तपस्या के बल पर स्वर्लोक छीन सकते हैं। शुंभ-निशुंभ ने देवताओं को स्वर्ग से निर्वासित कर दिया था। तब देवी ने असुरों का वध कर स्वर्ग वापस दिलाया।

असुरस्वर्लोकतपस्या
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स्वर्लोक और मोक्ष में क्या फर्क है?

स्वर्लोक अस्थायी है — पुण्य क्षीण होने पर वापस आना पड़ता है। मोक्ष स्थायी है — वहाँ से कोई नहीं लौटता। गीता कहती है 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम।'

स्वर्लोकमोक्षफर्क
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स्वर्ग से पुण्य क्षीण होने का संकेत क्या है?

स्वर्ग में पुण्य क्षीण होने के दो संकेत हैं — शरीर से पसीना आना और गले की दिव्य माला का मुरझाना। ये संकेत मिलते ही स्वर्ग से निष्कासन निश्चित है।

पुण्य क्षीणस्वर्गमाला मुरझाना
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स्वर्ग से वापस कब आना पड़ता है?

पुण्य समाप्त होने पर स्वर्ग से वापस आना पड़ता है। संकेत मिलता है — शरीर से पसीना और गले की माला का मुरझाना। फिर पुनः पृथ्वी पर जन्म होता है।

स्वर्गवापसीपुण्य क्षीण
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स्वर्लोक कितने समय तक रहा जा सकता है?

स्वर्लोक में जितने पुण्य उतने समय। गीता (9.21) कहती है — पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर लौटना पड़ता है। यह अस्थायी निवास है।

स्वर्लोकसमयपुण्य
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श्राद्ध और तर्पण का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

पृथ्वी पर श्रद्धा से किया गया श्राद्ध-तर्पण स्वर्लोक में पूर्वजों को 'अमृत' के रूप में प्राप्त होता है। स्वर्ग में जो जैसा है उसे उसके अनुरूप श्राद्ध का फल मिलता है।

श्राद्धतर्पणस्वर्लोक
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मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।

मृत्युभगवान नामपाप नाश
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दान करने से स्वर्ग मिलता है क्या?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार गौ दान, तिल दान और भूमि दान स्वर्ग का द्वार खोलते हैं। ये दान सुपात्र ब्राह्मणों को देने से पाप नष्ट होते हैं।

दानस्वर्गगौ दान
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यज्ञ करने से स्वर्ग मिलता है क्या?

हाँ, यज्ञ स्वर्ग प्राप्ति का प्रमुख मार्ग है। स्वयं इन्द्र ने 100 यज्ञों से स्वर्ग प्राप्त किया। लेकिन यह स्वर्ग पुण्य क्षीण होने पर समाप्त हो जाता है।

यज्ञस्वर्गइन्द्र
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मृत्यु के बाद स्वर्ग कैसे जाते हैं?

पुण्यात्मा के लिए मृत्यु के बाद स्वर्ग का मार्ग सुगम होता है। मृत्यु के समय शालग्राम रखना, तुलसी दल और भगवान का नाम लेना स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है।

मृत्युस्वर्गयात्रा
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स्वर्लोक कैसे मिलता है?

स्वर्लोक धर्म पालन, दान (गौ, भूमि, तिल), यज्ञ और वैदिक अनुष्ठानों से मिलता है। मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से भी स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

स्वर्लोकप्राप्तियज्ञ
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जाम्बूनद सोना क्या है?

जाम्बूनद वह दिव्य सोना है जो जम्बू नदी के रस से भीगी मिट्टी के सूर्य और वायु से पककर बनता है। देवियाँ इससे अपने आभूषण बनाती हैं और अमरावती इसी से बनी है।

जाम्बूनदसोनाजम्बू नदी
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स्वर्ग की नदियाँ कैसी हैं?

स्वर्ग में अरुणोदा (आम के रस से बनी), जम्बू नदी (जामुन के रस से बनी) और दूध-दही-शहद-घी की नदियाँ हैं जो दिव्य वृक्षों के फलों से बनती हैं।

स्वर्गनदियाँअरुणोदा
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कल्पवृक्ष क्या होता है?

कल्पवृक्ष स्वर्ग का दिव्य वृक्ष है जो मांगते ही हर इच्छा पूरी करता है। यह नंदन वन सहित स्वर्ग के सभी दिव्य उद्यानों में स्थित है।

कल्पवृक्षइच्छापूर्तिस्वर्ग
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नंदन वन क्या है?

नंदन वन स्वर्ग का सबसे प्रसिद्ध दिव्य उद्यान है। स्वर्ग में कुल चार उद्यान हैं — नंदन, चैत्ररथ, वैभ्राजक और सर्वतोभद्र। यहाँ कल्पवृक्ष हर इच्छा पूरी करते हैं।

नंदन वनस्वर्गदेव उद्यान
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स्वर्ग में भोजन और वस्त्र कैसे मिलते हैं?

स्वर्ग में कल्पवृक्ष से इच्छानुसार भोजन मिलता है, दिव्य झीलों में दूध-शहद-रस है और कुमुद पर्वत के बरगद से वस्त्र और आभूषण भी प्राप्त होते हैं।

स्वर्गभोजनवस्त्र
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स्वर्ग में बुढ़ापा और रोग क्यों नहीं होते?

स्वर्ग में दिव्य 'भोग-देह' मिलती है जो सात्त्विक ऊर्जा से बनी है। यह पृथ्वी के स्थूल शरीर जैसी नहीं है इसलिए यहाँ बुढ़ापा, रोग और भूख-प्यास नहीं होते।

स्वर्गबुढ़ापारोग
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स्वर्ग में क्या-क्या सुख मिलते हैं?

स्वर्ग में कल्पवृक्ष से हर इच्छा पूरी होती है, दिव्य झीलों से सिद्धियाँ मिलती हैं, गंधर्वों का संगीत गूंजता है और भूख-प्यास-बुढ़ापा नहीं होता।

स्वर्गसुखकल्पवृक्ष
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सुधर्मा सभा में कौन-कौन होते हैं?

सुधर्मा सभा में इन्द्र-शची के अलावा सिद्ध, साध्य, महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, बृहस्पति, शुक्राचार्य और तुम्बुरु जैसे महान जन उपस्थित रहते हैं।

सुधर्मासदस्यऋषि
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सुधर्मा सभा में जाने से क्या होता है?

सुधर्मा सभा में प्रवेश करते ही शोक, बुढ़ापा, थकान, चिंता और भय का पूर्णतः नाश हो जाता है। यह सभा आकाश में इच्छानुसार गति भी कर सकती है।

सुधर्माशोक मुक्तिबुढ़ापा
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इन्द्र की राजसभा का क्या नाम है?

इन्द्र की राजसभा का नाम 'सुधर्मा' है जिसे 'पुष्कर-मालिनी' भी कहते हैं। यह अमरावती के मध्य में है और स्वर्लोक का शासन यहीं से होता है।

इन्द्रराजसभासुधर्मा
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अमरावती में रात और दिन कैसे होते हैं?

अमरावती में कभी अंधकार नहीं होता। प्रकाश देवताओं के दिव्य शरीरों, स्वर्ण महलों और रत्नों की आभा से उत्पन्न होता है। तापमान सदा वसंत ऋतु जैसा रहता है।

अमरावतीरात दिनप्रकाश
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लोक — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर लोक श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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लोक को गहराई से समझने का तरीका

लोक के पेज 3 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3617 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।