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रामचरितमानस — बालकाण्ड प्रश्नोत्तर (पेज 5) — 320 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड से जुड़े 320 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 320 प्रश्न

जय-विजय कौन थे और उन्हें किसने शाप दिया?

जय-विजय भगवान विष्णु के वैकुण्ठ द्वारपाल थे। सनकादि ऋषियों (ब्रह्माजी के मानसपुत्र) ने शाप दिया — असुर योनि में जन्म लोगे। तीन जन्म — हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु, रावण-कुम्भकर्ण, शिशुपाल-दन्तवक्र। रामावतार में रावण-कुम्भकर्ण जय-विजय ही थे।

बालकाण्डजय-विजयशाप
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शिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?

शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।

बालकाण्डअवतार कारण संख्याशिवजी
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'असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु' — इसका अर्थ?

अर्थ — भगवान असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने वेदरूपी सेतु (धर्ममार्ग) की रक्षा करते हैं और जगत में निर्मल यश फैलाते हैं — यही श्रीराम जन्म का कारण है। 'श्रुति सेतु' = वेदमार्ग/धर्ममार्ग।

बालकाण्डदोहा अर्थअवतार उद्देश्य
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भगवान अवतार क्यों लेते हैं — रामचरितमानस के अनुसार?

अनेक कारण — (1) धर्म हानि पर रक्षा, (2) सज्जनों की पीड़ा हरना, (3) असुर वध, (4) वेदमार्ग रक्षा, (5) यश फैलाना, (6) भक्तों का प्रेम। पर शिवजी ने कहा — अवतार का कारण 'बस यही है' ऐसा निश्चित नहीं कहा जा सकता, अनेक कारण हो सकते हैं।

बालकाण्डअवतार कारणभगवान
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'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। चार कारण — धर्म हानि, असुरों का बढ़ना, अन्याय, और ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी का कष्ट। यह गीता के 'यदा यदा हि धर्मस्य' के समान सिद्धान्त है।

बालकाण्डधर्म हानिअवतार
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शिवजी ने भगवान के अवतार का मूल कारण क्या बताया?

शिवजी ने कहा — 'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — जब धर्म की हानि हो, राक्षस बढ़ें, ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी कष्ट पायें, तब भगवान अवतार लेकर असुरों को मार, देवताओं को स्थापित कर, वेदमार्ग की रक्षा करते हैं।

बालकाण्डअवतार कारणधर्म हानि
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'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने पार्वतीजी को क्या सुनाने का निर्णय लिया?

शिवजी ने पार्वतीजी को श्रीहरि (राम) के सम्पूर्ण अवतार चरित सुनाने का निर्णय लिया। कहा — 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — वेद-शास्त्रों में गाये गये राम के सुन्दर चरित्र सुनो। राम अतर्क्य हैं — बुद्धि, मन, वाणी से नहीं समझे जा सकते।

बालकाण्डशिव पार्वती संवादहरिचरित
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विवाह के बाद पार्वतीजी ने शिवजी से क्या प्रश्न किया?

पार्वतीजी ने कैलास पर शिवजी से रामकथा सुनने की जिज्ञासा प्रकट की। शिवजी ने पहले शम्भु चरित्र (विवाह कथा) संक्षेप में कहा, फिर रामावतार की कथा सुनानी शुरू की। भरद्वाजजी (याज्ञवल्क्यजी के माध्यम से) यह सुनकर अति प्रसन्न हुए।

बालकाण्डशिव पार्वती संवादरामकथा प्रश्न
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शिव-पार्वती विवाह कहाँ सम्पन्न हुआ?

हिमवान (पर्वतराज) की नगरी में। हिमाचल ने अत्यन्त विचित्र मण्डप बनवाया। नगर की शोभा इतनी सुन्दर थी कि ब्रह्माजी की रचना-चतुरी भी तुच्छ लगती। घर-घर तोरण-पताकाएँ शोभित थीं।

बालकाण्डशिव विवाह स्थानहिमवान नगरी
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शिव-पार्वती विवाह के बाद विदाई का वर्णन कैसा है?

हिमाचल ने भव्य दहेज दिया — दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, मणि, सोने के बर्तन। शिवजी पार्वतीजी को लेकर कैलास गये। 'सकल भुवन भरि रहा उछाहू' — सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द भर गया। बाद में कार्तिकेय का जन्म हुआ।

बालकाण्डशिव पार्वती विदाईदहेज
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शिव-पार्वती विवाह में वेद मंत्रों से किसने विवाह करवाया?

महामुनियों (श्रेष्ठ मुनिगणों) ने वेद मंत्रों की रीति से विवाह करवाया। हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी जानकर शिवजी को समर्पित किया। पहले गणेशजी का पूजन किया गया।

बालकाण्डशिव पार्वती विवाहवेद मंत्र
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शिवजी ने विवाह के समय कौन सा रूप धारण किया?

शिवजी ने विवाह मण्डप में अत्यन्त सुन्दर और दिव्य रूप धारण किया। पहले बारात में विचित्र भयानक रूप था, पर विवाह के समय मनोहर रूप देखकर सब प्रसन्न और मोहित हो गये।

बालकाण्डशिव सुन्दर रूपविवाह
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नारदजी ने माता मैना को कैसे समझाया?

पहले पार्वतीजी ने माता को समझाया — 'जो विधाता रच दे वह नहीं टलता, दोष किसी को मत दो।' फिर नारदजी ने आकर सबको समझाया कि शिवजी स्वयं भगवान हैं। शिवजी ने सुन्दर रूप धारण किया तो सब प्रसन्न हुए।

बालकाण्डनारदमैना
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माता मैना ने शिवजी की बारात देखकर क्या कहा?

मैना ने नारदजी को दोषी ठहराया — 'मैंने नारद का क्या बिगाड़ा, जिन्होंने मेरा घर उजाड़ दिया।' शिवजी की निन्दा की — 'न मोह, न माया, न घर, न लाज — बावले वर के लिये मेरी बेटी ने तप किया।' सारी स्त्रियाँ व्याकुल हुईं।

बालकाण्डमैनाशिव बारात
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शिवजी की बारात देखकर जनकपुर (हिमवान की नगरी) की स्त्रियों ने क्या प्रतिक्रिया दी?

नगर के लोग पहले डर गये, फिर समझदार माता-पिता ने बच्चों को समझाया — 'डरो मत, यह शिवजी का समाज है।' पर माता मैना ने बारात देखकर बड़ा दुख प्रकट किया और विलाप किया।

बालकाण्डशिव बारातस्त्रियाँ
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शिवजी की बारात का स्वरूप कैसा था — क्या विचित्रता थी?

बारात अत्यन्त विचित्र और भयानक — लड़कों ने कहा 'यह बारात है या यमराज की सेना? दूल्हा पागल है, बैल पर सवार, साँप-कपाल-राख के गहने।' जो बारात देखकर जीवित बचे उसके बड़े पुण्य। देवताओं का दल सुन्दर पर शिवजी का दल भयानक।

बालकाण्डशिव बारातविचित्र
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शिवजी की बारात में कौन-कौन शामिल थे?

शिवजी की बारात में भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ, राक्षस, विचित्र गण शामिल थे। दूल्हे के शरीर पर राख, साँप-कपाल के गहने, नग्न, जटाधारी। देवताओं का दल सुन्दर था पर शिवजी का दल देखकर सबके वाहन डरकर भागे।

बालकाण्डशिव बारातभूत-प्रेत
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शिवजी के विवाह का प्रस्ताव देवताओं ने किससे रखा?

देवताओं ने ब्रह्माजी से विनती की, ब्रह्माजी ने शिवजी से प्रार्थना की। शिवजी ने प्रभु रामजी के वचन याद कर प्रसन्नतापूर्वक कहा — 'ऐसेइ होउ' (ऐसा ही हो)। देवताओं ने नगाड़े बजाये और पुष्पवर्षा की।

बालकाण्डशिव विवाह प्रस्तावब्रह्मा
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कामदहन के बाद जगत में क्या प्रभाव पड़ा?

चार प्रभाव — (1) देवता डर गये (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा), (2) असुर सुखी हुए, (3) भोगी चिन्तित हुए कामसुख याद कर, (4) साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।

बालकाण्डकामदहन प्रभावदेवता
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कामदेव भस्म होने के बाद किस नाम से जाने गये?

कामदेव 'अनंग' (बिना शरीर/अंग के) नाम से जाने गये। शिवजी ने कहा — 'होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि' — बिना शरीर के ही सबके हृदय में काम-भावना जगाते रहेंगे।

बालकाण्डअनंगकामदेव
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रति को शिवजी ने क्या वरदान दिया?

शिवजी ने वरदान दिया — (1) कामदेव का नाम 'अनंग' (बिना शरीर) होगा, (2) बिना शरीर के ही सबके हृदय में व्यापेगा, (3) श्रीकृष्ण अवतार में प्रद्युम्न रूप में जन्म लेगा — तब रति को पति वापस मिलेगा।

बालकाण्डरति वरदानअनंग
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कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति ने क्या किया?

रति पति की दशा सुनकर मूर्छित हो गयीं। फिर रोती-चिल्लाती शिवजी के पास गयीं और अत्यन्त प्रेम से विनती की। आशुतोष कृपालु शिवजी ने अबला को देखकर सान्त्वना दी।

बालकाण्डरतिकामदेव भस्म
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शिवजी ने कामदेव को कैसे भस्म किया?

कामदेव ने आम के पेड़ से पाँच बाण शिवजी पर छोड़े, समाधि टूटी। शिवजी ने तीसरा नेत्र खोला — 'तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा॥' — देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गया। तीनों लोक काँप उठे।

बालकाण्डकामदहनतीसरा नेत्र
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'ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सबु भागा' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — ब्रह्मचर्य, संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य — विवेक की यह सारी सेना डरकर भाग गयी। कामदेव के प्रभाव से सृष्टि का सारा विवेक और संयम नष्ट हो गया। केवल शिवजी अप्रभावित रहे।

बालकाण्डकामदेवविवेक सेना
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कामदेव के बाण चलाने पर क्या-क्या प्रभाव पड़ा — सारी सृष्टि पर?

सारी सृष्टि काम-वश हो गयी — ब्रह्मचर्य, धीरज, ज्ञान, सदाचार, योग, वैराग्य सब भागे। स्त्री-पुरुष सब मर्यादा छोड़ बैठे। लताएँ वृक्षों पर झुकीं, नदियाँ समुद्र की ओर दौड़ीं। केवल शिवजी की समाधि अचल रही।

बालकाण्डकामदेव प्रभावसृष्टि
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कामदेव ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये क्या किया?

कामदेव ने — (1) वसन्त ऋतु प्रकट की, (2) सारी सृष्टि को काम-वश किया, (3) करोड़ों उपाय किये पर शिवजी की समाधि न डिगी, (4) अन्त में आम के पेड़ पर चढ़कर पुष्प-धनुष से पाँच बाण शिवजी पर छोड़े।

बालकाण्डकामदेववसन्त
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देवताओं ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये किसे भेजा?

देवताओं ने कामदेव को भेजा। कामदेव ने पहले कहा कि शिवजी से विरोध में मेरी कुशल नहीं, पर परोपकार धर्म मानकर काम स्वीकार किया — 'श्रुति कह परम धरम उपकारा' — वेद कहते हैं उपकार परम धर्म है।

बालकाण्डकामदेवशिव तपस्या
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सप्तर्षियों ने परीक्षा उत्तीर्ण होने पर पार्वतीजी को क्या आशीर्वाद दिया?

सप्तर्षि बोले — 'जय जय जगदंबिके भवानी!' — आप माया हैं, शिवजी भगवान हैं, आप दोनों जगत के माता-पिता हैं। मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर बार-बार पुलकित होते हुए चले गये।

बालकाण्डसप्तर्षि आशीर्वादपार्वती
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पार्वतीजी ने सप्तर्षियों की शिवनिन्दा सुनकर क्या उत्तर दिया?

पार्वतीजी ने कहा — 'जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी' — करोड़ जन्मों तक या तो शिवजी को वरूँगी या कुमारी रहूँगी। स्वयं शिवजी मना करें तब भी नारदजी का उपदेश नहीं छोडूँगी। ऋषि प्रसन्न हुए — 'जय जगदम्बिके भवानी!'

बालकाण्डपार्वती दृढ़ संकल्पसप्तर्षि
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सप्तर्षियों ने शिवजी के बारे में क्या-क्या बुराइयाँ बताईं?

शिवजी को बताया — (1) अवगुणों का भवन, (2) निर्गुण, निलज, (3) कुबेष (भस्म-साँप-खोपड़ी), (4) अकुल (कुलहीन), (5) अगेह (बेघर/श्मशानवासी), (6) दिगम्बर (नग्न), (7) उदासीन। ये सब परीक्षा के लिये कहा — पार्वतीजी का संकल्प जाँचने हेतु।

बालकाण्डसप्तर्षिशिव दोष
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सप्तर्षियों ने पार्वतीजी से क्या कहकर उनकी परीक्षा ली?

सप्तर्षियों ने शिवजी को अवगुणों का भवन, निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, दिगम्बर बताया। नारदजी के उपदेश की भी आलोचना की — कि जिसने सुना उसका घर बर्बाद हुआ। यह सब पार्वतीजी का संकल्प डिगाने के लिये था।

बालकाण्डसप्तर्षिपरीक्षा
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देवताओं ने पार्वतीजी की परीक्षा के लिये किन्हें भेजा?

सप्तर्षियों (सात ऋषियों) को भेजा। ऋषियों ने पार्वतीजी को देखा — 'मूरतिमंत तपस्या जैसी' — मानो मूर्तिमान तपस्या ही हो। उन्होंने प्रश्न पूछे और शिवजी की निन्दा करके पार्वतीजी का संकल्प डिगाने का प्रयास किया।

बालकाण्डसप्तर्षिपार्वती परीक्षा
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पार्वतीजी की तपस्या से तीनों लोकों में क्या प्रभाव पड़ा?

पार्वतीजी का शरीर तप से क्षीण हो गया, तब आकाश से ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — अब शिवजी मिलेंगे। ब्रह्माजी ने कहा कि ऐसा कठोर तप किसी ने नहीं किया। सप्तर्षि जब मिलें तब इस वाणी को प्रमाण जानना।

बालकाण्डपार्वती तप प्रभावब्रह्मवाणी
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पार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?

'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'

बालकाण्डअपर्णापार्वती
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पार्वतीजी की तपस्या कितनी कठोर थी — क्या-क्या त्यागा?

क्रमशः — (1) 1000 वर्ष कन्दमूल-फल, (2) 100 वर्ष केवल साग, (3) कुछ दिन जल-वायु फिर उपवास, (4) 3000 वर्ष केवल सूखे बेलपत्र, (5) पत्ते भी छोड़े — तब 'अपर्णा' नाम पड़ा। शरीर क्षीण हुआ तब ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — शिवजी मिलेंगे।

बालकाण्डपार्वती तपस्याकठोर तप
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पार्वतीजी ने अपनी तपस्या कहाँ की?

पार्वतीजी ने वन (बिपिन) में जाकर तपस्या की। 'उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना॥' — शिवजी के चरणों को हृदय में धारण करके वन में तप करने लगीं। सुकुमार शरीर होने पर भी सब भोग त्याग दिये।

बालकाण्डपार्वती तपस्यावन
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'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' — इसका अर्थ?

अर्थ — ऐसा तप करो जिससे शिवजी मिल जायें, दूसरे किसी उपाय से यह कष्ट नहीं मिटेगा। नारदजी ने स्पष्ट किया कि शिवजी प्राप्ति का एकमात्र मार्ग कठोर तपस्या है, कोई और उपाय काम नहीं करेगा।

बालकाण्डचौपाई अर्थतपस्या
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नारदजी ने पार्वतीजी को शिवजी प्राप्ति के लिये क्या उपाय बताया?

नारदजी ने कहा — 'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू॥' — ऐसी तपस्या करो जिससे शिवजी मिलें, दूसरा कोई उपाय काम नहीं करेगा। शिवजी दुराराध्य हैं पर आशुतोष भी हैं।

बालकाण्डनारद उपायतपस्या
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नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर क्या भविष्यवाणी की?

नारदजी ने कहा — (1) सब गुणों की खान, सुन्दर, सुशील, (2) पति को सदा प्यारी, सुहाग अचल, (3) जगत में पूज्य होगी। परन्तु एक दोष बताया — वर निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, अगेह, दिगम्बर होगा — जो शिवजी के ही लक्षण हैं।

बालकाण्डनारदभविष्यवाणी
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नारदजी हिमवान के घर क्यों आये?

नारदजी ने पार्वतीजी के जन्म के समाचार सुनकर कौतुकवश हिमवान के घर आये। पर्वतराज ने बड़ा आदर किया। नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर भविष्यवाणी की और शिवजी प्राप्ति के लिये तपस्या का उपाय बताया।

बालकाण्डनारदजीहिमवान
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पार्वतीजी का बचपन का क्या वर्णन है बालकाण्ड में?

नारदजी ने कहा — पार्वतीजी सब गुणों की खान हैं, स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी। सब सुलक्षणों से सम्पन्न, पति को सदा प्यारी होंगी, सुहाग अचल रहेगा। सारे जगत में पूज्य होंगी। नाम — उमा, अम्बिका, भवानी।

बालकाण्डपार्वती बचपनउमा
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हिमवान कौन हैं और उनकी पत्नी का क्या नाम है?

हिमवान (हिमालय) पर्वतों के राजा हैं — मानस में 'सैलराज', 'गिरिराज', 'हिमाचल' कहा गया। उनकी पत्नी का नाम मैना (मैनावती) है। इन्हीं के घर सतीजी ने पार्वती रूप में पुनर्जन्म लिया।

बालकाण्डहिमवानमैना
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सतीजी ने पुनर्जन्म किसके घर लिया?

सतीजी ने हिमवान (हिमालय/पर्वतराज) के घर माता मैना की कोख से पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। नारदजी ने उनका नाम बताया — उमा, अम्बिका, भवानी — और कहा कि ये सब गुणों की खान हैं।

बालकाण्डपार्वती जन्महिमवान
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सतीजी के देहत्याग के बाद शिवजी ने क्या किया?

शिवगण दक्ष यज्ञ को नष्ट करने लगे। 'सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।' मुनि भृगु ने यज्ञ की रक्षा की। मानस में यह प्रसंग संक्षिप्त है — विस्तार शिव पुराण में है। इसके बाद सीधे पार्वती जन्म की कथा आती है।

बालकाण्डशिवगणदक्ष यज्ञ विध्वंस
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'योगाग्नि' से शरीर त्यागने का क्या अर्थ है?

'योगाग्नि' = योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक दिव्य अग्नि। यह बाहरी आग नहीं, बल्कि प्राणशक्ति और योगसाधना से शरीर के भीतर अग्नि तत्व जाग्रत करना है। यह इच्छामृत्यु का उच्चतम रूप है जो केवल सिद्ध योगी कर सकते हैं।

बालकाण्डयोगाग्निअर्थ
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सतीजी ने किस प्रकार अपना शरीर त्यागा?

सतीजी ने योगाग्नि (योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक अग्नि) से शरीर त्यागा — बाहरी अग्नि में नहीं कूदीं। शिवजी को हृदय में धारण करके अपनी योगशक्ति से शरीर भस्म कर डाला।

बालकाण्डयोगाग्निसती देहत्याग
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सतीजी ने दक्ष यज्ञ में अपमान सहकर क्या किया?

सतीजी ने शिवजी को हृदय में धारण करके योगाग्नि से अपना शरीर भस्म कर डाला। 'अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा॥' — सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया।

बालकाण्डसती देहत्यागयोगाग्नि
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दक्ष प्रजापति ने शिवजी की निन्दा क्या कहकर की?

दक्ष ब्रह्मसभा से शिवजी पर नाराज़ थे और यज्ञ में उनकी निन्दा की। सतीजी ने सभा को चेतावनी दी — जिन्होंने शिवनिन्दा की या सुनी, उन सबको तुरन्त फल मिलेगा और पिता दक्ष भी पछतायेंगे।

बालकाण्डदक्षशिव निन्दा
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दक्ष यज्ञ में सतीजी का क्या अपमान हुआ?

दक्ष ने सतीजी का कोई आदर नहीं किया और सभा में शिवजी की खुलकर निन्दा की। यज्ञ में शिवजी का कोई भाग नहीं रखा गया। सतीजी से यह अपमान सहा नहीं गया और उन्होंने क्रोध में सभा को डाँटा।

बालकाण्डसती अपमानदक्ष यज्ञ
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शिवजी ने सतीजी को दक्ष यज्ञ में जाने से क्यों रोका?

तीन कारण — (1) न्योता नहीं आया — बिना बुलाये जाना अशोभनीय, (2) दक्ष का पुराना वैर — ब्रह्मसभा से शिवजी पर नाराज़, (3) 'रहइ न सीलु सनेहु न कानी' — बिना बुलाये जाने पर शील, स्नेह और मर्यादा सब नष्ट होगी।

बालकाण्डशिवजी चेतावनीदक्ष वैर
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रामचरितमानस — बालकाण्ड — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर रामचरितमानस — बालकाण्ड श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड को गहराई से समझने का तरीका

रामचरितमानस — बालकाण्ड के पेज 5 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

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अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

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